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Auraiya डीएम ने की ईसन नदी संरक्षण, वन भूमि सुरक्षा और वृक्षारोपण अभियान की तैयारियों की समीक्षा
Auraiya News : औरैया में डीएम ने ईसन नदी संरक्षण, वन भूमि सुरक्षा और वृक्षारोपण अभियान की तैयारियों की समीक्षा की।
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Auraiya News : औरैया जनपद को पर्यावरणीय दृष्टि से समृद्ध और हरित बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी डॉ. इन्द्रमणि त्रिपाठी ने जिला वृक्षारोपण, पर्यावरण, गंगा एवं आर्द्रभूमि समिति की समीक्षा बैठक आयोजित की। बैठक में उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, नदी सुरक्षा, वन भूमि संरक्षण तथा आगामी वृक्षारोपण अभियान की तैयारियों को लेकर अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें।
बैठक के दौरान ईसन नदी संरक्षण की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने नदी के दोनों किनारों का सीमांकन कर संरक्षित क्षेत्र को स्पष्ट रूप से चिह्नित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नदी संरक्षण से जुड़े न्यायालयों एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के सभी दिशा-निर्देशों का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नगर क्षेत्र में ईसन नदी की मध्य धारा से दोनों ओर 50-50 मीटर के दायरे में किसी भी भवन मानचित्र की स्वीकृति के लिए सिंचाई विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) अनिवार्य होगा। बिना एनओसी के कोई भी मानचित्र स्वीकृत नहीं किया जाएगा। इसके अलावा अधिकारियों को डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।
वन भूमि की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने वन विभाग से सभी वन ब्लॉकों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। रिपोर्ट में वन विभाग के कब्जे वाली भूमि, पट्टे पर दी गई भूमि, विवादित भूमि तथा राजस्व या न्यायालय स्तर पर लंबित मामलों का पूरा विवरण शामिल करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने राजस्व एवं वन विभाग को संयुक्त रूप से ग्रामवार सूची तैयार करने के लिए भी कहा।डॉ. त्रिपाठी ने निर्देश दिए कि जिन वन भूमियों पर अभी तक पट्टा नहीं हुआ है, उन्हें संरक्षित श्रेणी में दर्ज किया जाए। साथ ही धारा-20 की अधिसूचना के बाद जारी पट्टों की विधिक जांच कर आवश्यक होने पर उनके निरस्तीकरण की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।
आगामी वृक्षारोपण अभियान की तैयारियों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने समय पर सूचनाएं उपलब्ध न कराने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने दो दिन के भीतर गड्ढा खुदान और पौधारोपण लक्ष्य से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। "वृक्ष भंडारा" और "एक पेड़ मां के नाम" अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देने पर जोर देते हुए उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म, क्यूआर कोड ट्रैकिंग और जनसहभागिता आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित करने की बात कही। साथ ही मियावाकी वनीकरण परियोजना को जैव विविधता संरक्षण का मॉडल बनाने तथा गौरैया सहित स्थानीय पक्षी प्रजातियों के संरक्षण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।


