Auraiya News: औरैया के नए प्रभारी मंत्री बने राकेश राठौर ‘गुरुजी’, बदले राजनीतिक समीकरण

Auraiya News: उत्तर प्रदेश सरकार ने औरैया जिले के प्रभारी मंत्री पद पर बड़ा बदलाव करते हुए प्रतिभा शुक्ला की जगह राकेश राठौर ‘गुरुजी’ को जिम्मेदारी सौंपी है।

Ashraf Ansari
Published on: 3 Jun 2026 4:21 PM IST
Auraiya News: औरैया के नए प्रभारी मंत्री बने राकेश राठौर ‘गुरुजी’, बदले राजनीतिक समीकरण
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Auraiya News: उत्तर प्रदेश सरकार ने जिलों के प्रभारी मंत्रियों की सूची में बड़ा बदलाव करते हुए औरैया जिले के प्रभारी मंत्री पद पर नई नियुक्ति की है। अब तक औरैया की प्रभारी मंत्री रहीं प्रतिभा शुक्ला को हटाकर अमेठी का प्रभार सौंप दिया गया है, जबकि उनकी जगह ओबीसी तेली समाज से आने वाले राकेश राठौर 'गुरुजी' को औरैया जिले का नया प्रभारी मंत्री बनाया गया है।

इस बदलाव के बाद जिले की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राकेश राठौर ‘गुरुजी’ को भाजपा का जमीनी नेता माना जाता है। उन्होंने साधारण पृष्ठभूमि से राजनीति में अपनी पहचान बनाई और वर्ष 2022 में विधानसभा चुनाव जीतकर मंत्री पद तक का सफर तय किया। उनके प्रभारी मंत्री बनाए जाने को भाजपा की सामाजिक और राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बदलाव वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया गया है। प्रतिभा शुक्ला ब्राह्मण समुदाय से आती हैं, जबकि राकेश राठौर ‘गुरुजी’ तेली समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में भाजपा द्वारा एक ओबीसी चेहरे को आगे लाना पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

औरैया लोकसभा सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है। जिले की तीनों विधानसभा सीटों—औरैया सदर, दिबियापुर और बिधूना—में वर्तमान समय में कोई भी सामान्य वर्ग का विधायक नहीं है। औरैया सदर से भाजपा की गुड़िया कठेरिया अनुसूचित जाति वर्ग का प्रतिनिधित्व करती हैं, जबकि दिबियापुर से सपा के प्रदीप यादव और बिधूना से रेखा वर्मा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से आते हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि प्रतिभा शुक्ला को हटाए जाने से ब्राह्मण नेतृत्व को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। वहीं, राकेश राठौर ‘गुरुजी’ की नियुक्ति के जरिए भाजपा ने गैर-यादव पिछड़े वर्गों को स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया है। माना जा रहा है कि यादव, कठेरिया, शाक्य, पाल और तेली जैसे प्रभावशाली ओबीसी समुदायों के बीच राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। जिले में इस बदलाव के राजनीतिक प्रभाव पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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