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Azamgarh News: '13 हजार गोंड कहां गए', आजमगढ़ में जनगणना को लेकर उठे सवाल
Azamgarh News: आजमगढ़ में गोंड समाज की जनगणना को लेकर भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की और तत्काल समाधान की मांग की क।।
'13 हजार गोंड कहां गए', आजमगढ़ में जनगणना को लेकर उठे सवाल (Photo- Newstrack)
Azamgarh News: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जनपद मे भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा एवं गोंड युवा छात्र संघ के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा गया और मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई। भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष भीम प्रसाद गोंड ने आरोप लगाया कि जनगणना से जुड़े कुछ अधिकारी और प्रगणक यह तर्क दे रहे हैं कि आजमगढ़ जनपद में गोंड अनुसूचित जनजाति के लोग नहीं रहते, जबकि वर्ष 2011 की आधिकारिक जनगणना के अनुसार जिले में 13 हजार से अधिक गोंड समाज के लोग दर्ज हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ वर्षों के भीतर पूरे समाज को सरकारी अभिलेखों से गायब दिखाना गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि स्व-जनगणना के दौरान गोंड परिवारों द्वारा अपनी जाति अनुसूचित जनजाति दर्ज कराए जाने के बावजूद प्रगणक उसे बदलकर ‘अन्य’ श्रेणी में दर्ज कर रहे हैं।
गोंड समाज के लोगों में क्यों है निराशा
समाज के प्रतिनिधियों ने इसे नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए कहा कि किसी भी जनगणना अधिकारी को किसी व्यक्ति की जातीय पहचान बदलने का अधिकार नहीं है। संगठन की ओर से मांग की गई कि यदि प्रशासन अथवा राजस्व विभाग के पास ऐसा कोई आदेश है, जिसमें यह कहा गया हो कि आजमगढ़ में गोंड अनुसूचित जनजाति के लोग नहीं रहते, उसे सार्वजनिक किया जाए। अन्यथा प्रगणकों की कथित मनमानी पर तत्काल रोक लगाते हुए गोंड समाज के लोगों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी में ही दर्ज कराने के निर्देश जारी किए जाएं।
प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि भारत सरकार द्वारा जनगणना से संबंधित पोर्टल और एप में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की सूची उपलब्ध कराई गई है, जिसका पालन करना अनिवार्य है।
उनका आरोप है कि सूची की अनदेखी शासनादेश तथा राष्ट्रपति के आदेशों की भावना के विपरीत है। जिलाध्यक्ष भीम प्रसाद गोंड ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस मामले का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के पदाधिकारी सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफा देने पर विचार करेंगे। साथ ही गोंड समाज अपने अधिकारों की रक्षा के लिए व्यापक और उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन और जिला प्रशासन की होगी।


