हैलो, अब न कहना वाशिंग मशीन, निपट रहे न भाजपाई, जल्द ही निपटेगा आयातित माननीय

बांदा में धनकुबेरों के ठिकानों पर ईडी और आयकर की छापेमारी के बाद सियासत तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर आयातित भाजपाइयों और उनके सहयोगियों की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

Om Tiwari
Published on: 14 March 2026 10:46 AM IST
हैलो, अब न कहना वाशिंग मशीन, निपट रहे न भाजपाई, जल्द ही निपटेगा आयातित माननीय
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Banda News. ओए..! अब न कहना, विपक्षी भाजपा की वाशिंग मशीन में धुल कर धवल हो जाते हैं। करतूतें नहीं छिपतीं। खुल जाती हैं। देखा.. ईडी आईटी ने बांदा में जिन धनकुबेरों के कान उमेठे हैं, वे सब भाजपाई हैं। बेशक, आयातित हैं, लेकिन संगठन और सरकार में इनकी इनकी गहरी पैठ से भला कौन इन्कार करता है? नहीं न! लेकिन उन आयातित भाजपाइयों का क्या, जो मोदी-योगी माला जपंत की बदौलत उत्तर प्रदेश विधानसभा की शोभा बढ़ाते हुए महज दाम के लिए न केवल नियम कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि नैतिक पतन की नित नई मिसाल भी पेश कर रहे हैं। इसे लेकर सत्ता प्रतिष्ठान भी सवालों के घेरे में है। शासन निरुत्तर लगे तो प्रशासन का बगलें झांकना लाजिमी है। बांदा में कमोवेश यही हो रहा है।

करतूतों को बदनाम माननीय बात बात पर पढ़े विकास का ककहरा

मसला, चुनिंदा धनकुबेरों के घरों ठिकानों में ईडी आईटी की मैराथन छापेमारी को लेकर पूरे मसल पावर के साथ प्रकटीकरण का है। न पहचानो तो अनाड़ी। बांदा-बुंदेलखंड के तकरीबन हर गली कूचे में कहा जा रहा है कि आयातित भाजपाई धुरंधरों युवराज, सीरध्वज और दिलीप सिंह और उनके गुर्गों सोमेश भारद्वाज, अज्ञात गुप्ता, शिवशरण आदि पर ईडी आईटी के चाबुक का स्वागत होना चाहिए, लेकिन इस चाबुक का माउस बदलने की जरूरत है। इसके अभाव में माननीय बने बैठे आयातित भाजपाई पूरी मशीनरी को मुंह चिढ़ाते हैं।


विदूषक की भांति हंसते मुस्कुराते हुए बांदा शहर के कायाकल्प का दम बघारते हैं। सड़कों के लिए बजट दिलाने का हल्ला मचाते हैं। चमचों से पीठ ठुकवाते हैं। और.. चमचे हैं कि चिरकुट से चौरंगजेब बनने के लिए नौटंकीबाज माननीय की जूतियां उठाने को अभिशाप के बजाय वरदान मान छाती फुलाए मिलते हैं।

बांदा में तमाशा बनी ईडी आईटी की धनकुबेरों के घर मैराथन छापेमारी

इन छाती फुलाय चिरकुटों से अलग हों तो बांदा में आयातित भाजपाइयों और उनके घरों आदि ठिकानों पर ईडी आईटी का छापा तमाशा बन गया है। बुधवार तड़के शुरू हुई छापेमारी शुक्रवार को खबर भेजते समय भी जारी है। हालांकि इस बीच जांच टीमों का फोकस दिलीप सिंह और सोमेश भारद्वाज के ठिकानों पर केंद्रित हो गया है। लेकिन हासिल के नाम पर हर ओर घंटा ही बज रहा है।


आपस में प्रतिद्वंदी माने जाने वाले जाने माने कनपुरिया अखबार छापों में 16 करोड़ की संपत्ति मिलने की खबरची लय मिलाते हैं। लेकिन सूत्र इसे 600 करोड़ तक जाने का संकेत देने में कोई हील हुज्जत नहीं करते। सही क्या है, देखना होगा। इस बीच आयातित भाजपाइयों के तहखाने खंगाले जाने कि बात भी जोर पकड़ गई है।

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