Banda News: धीरेंद्र शास्त्री की पटकथा: ये खुरहंड वाला, वो बुंदेलखंडी

बांदा के खुरहंड में पंडित धीरेंद्र शास्त्री की मौजूदगी को लेकर सियासी और सामाजिक हलचल तेज। बागेश्वर धाम सरकार, विधायक प्रकाश द्विवेदी और आयोजकों के रिश्तों पर उठे सवाल।

Om Tiwari
Published on: 30 Jan 2026 7:39 PM IST (Updated on: 19 March 2026 2:11 PM IST)
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Banda News(Photo-Social Media)

Banda News: पंडित धीरेंद्र शास्त्री के रंग निराले हैं। बागेश्वर धाम के नाम पर लोकप्रियता के घोड़े पर सवार शास्त्री जब चाहें, तब किसी को भी टोपी पहना सकते हैं। यह हम या Neustrack नहीं कह रहा, बल्कि यह संवाद शुक्रवार को स्वयंभू बादशाह कहे जाने वाले बांदा सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी के आंगन का है।जहां मूंछें मरोड़ते विधायक और जुल्फें लहराते पंडित शास्त्री एक-दूसरे के कसीदे पढ़ते नज़र आए। इसी बीच किसी ने तंज कसते हुए कहा— “धिक्कार है शास्त्री…! तू ठग तो नहीं?”

बाबा को बिना कहे ठाकुर-ब्राह्मण से भी गुरेज नहीं

पता नहीं सच्चाई क्या है। यह भी स्पष्ट नहीं कि इस पूरे मामले पर बागेश्वर धाम सरकार क्या प्रतिक्रिया देंगे। लेकिन इस घटनाक्रम ने इस धारणा को और मज़बूत किया है कि बाबा अपने लाभ के लिए कुछ भी कर सकते हैं। हिंदू-मुस्लिम उनका प्रिय शगल रहा है, लेकिन जब पेट भरने की बात आती है तो चाहे-अनचाहे, कहे-अनकहे ठाकुर-ब्राह्मण का सहारा लेने से भी उन्हें परहेज़ नहीं। इस कार्यक्रम को लेकर मोटे तौर पर यही निष्कर्ष निकाला जा रहा है।

प्रवीण के लिए खींची अपनी ही लकीर नहीं मिटा पाए बागेश्वर सरकार

गौरतलब है कि बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र शास्त्री 16 से 20 जनवरी तक बांदा में कथा के जरिए अब तक की सबसे बड़ी महफिल के केंद्र बने। कथा आयोजक प्रवीण सिंह की तारीफ में उन्होंने अपने मुखारविंद से कितने फूल बरसाए, इसका हिसाब लगाना मुश्किल है। लेकिन उन्हीं धीरेंद्र शास्त्री ने महज 10 दिन के भीतर जिस तरह बांदा सदर विधायक के घर तक सड़क मार्ग से दौड़ लगाई, उसने सभी को चौंका दिया। कहते हैं न, हांडी बार-बार नहीं चढ़ती—यहां भी वही हुआ। तमाम बातों और दावों के बावजूद वे प्रवीण के लिए खींची गई अपनी ही लकीर से बड़ी लकीर नहीं खींच पाए। अंततः प्रकाश को बौना का बौना ही मानकर रुखसत हो लिए। इससे पहले यह कहकर कि उन्होंने विधायक को कथा सुनाई है, खुद को छोटा साबित करने में भी उन्हें कोई झिझक नहीं हुई।

पिता का अपमान भूल नतमस्तक रहा ‘चंडाल चौकड़ी’ का सरताज

खुरहंड प्रवास के दौरान बागेश्वर धाम सरकार की तथाकथित चंडाल चौकड़ी का जलवा देखने लायक रहा। इनमें एक थे उनके कथित दाहिने हाथ दिया महाराज। बताया जाता है कि गिरवां क्षेत्र निवासी दिया महाराज के पिता को कभी विधायक ने जुनून के काम से बैरंग लौटा दिया था—या यूं कहें कि दौड़ा दिया था। इसके बावजूद आज वही दिया महाराज जिस तरह विधायक की बलैया लेने को गिरते-पड़ते दिखे, उसने न सिर्फ़ सबका ध्यान खींचा बल्कि चर्चाओं का बाज़ार भी गर्म कर दिया। एक ग्रामीण ने तंज कसते हुए कहा—“एत्ते बड़े बाबा का खास, विधायक के पांव मा बिछा है।” इस एक वाक्य से ही पूरे माहौल का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

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