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धनकुबेरों पर गुरुवार को भी शिकंजा, बीमार पिता को छोड़ मुंबई से बांदा पहुंचे दिलीप
बांदा में धनकुबेरों के ठिकानों पर ईडी और आयकर की कार्रवाई दूसरे दिन भी जारी, जांच एजेंसी के बुलावे पर भाजपा नेता दिलीप सिंह बीमार पिता को छोड़ मुंबई से बांदा पहुंचे।
Banda ED IT Raid (Photo_ Social Media)
Banda News. उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में चंद धनकुबेरों के घर आदि ठिकानों में बुधवार तड़के शुरू हुई ईडी-आईटी की छापेमारी गुरुवार को खबर भेजते समय भी जारी है। कहां क्या मिला, कौन किससे कैसे मुखातिब हुआ और जांच में किसने कैसा सहयोग किया, इसे लेकर जितने मुंह उतनी बातें हो रही हैं। बातों से पता चला, जांच एजंसी के बुलावे पर भाजपा नेता दिलीप सिंह को आनन-फानन मुंबई से बांदा आना पड़ा है। बीमार पिता को सहयोगियों की देखभाल के सुपुर्द कर दिलीप अपने अनुज कुलदीप के साथ रात करीब 2 बजे बांदा स्थित घर पहुंचे। इसके बाद एक बार फिर अंदर बाहर जाने में पाबंदी का नजारा कायम है।
बांदा की राजनीति का केंद्र रहे परिवार के वारिसों पर तोहमत
जिन धनकुबेरों के बांदा समेत लखनऊ, नोएडा, महोबा, भोपाल आदि ठिकानों पर जांच एजेंसियों की नजरें इनायत हुई हैं, उनमें एक समय बांदा की राजनीति का केंद्र रहे परिवार के प्रमुख उत्तराधिकारी युवराज सिंह का नाम सबसे पहले लिया जाता है। युवराज के बाबा बांदा से दो बार MLA रहे। ताऊ भी बांदा से MlA रहे। MLC भी रहे। पिता मौदहा से MLA और UP में मिनिस्टर रहे। इसी मौदहा से युवराज पहली बार
1989 में कांग्रेस MLA निर्वाचित हुए। तब पहली बार बाहुबली बादशाह सिंह को बतौर भाजपा उम्मीदवार पराजय से दो-चार होना पड़ा था। बाद में बादशाह ने मौदहा विधानसभा क्षेत्र का अस्तित्व रहने तक अपना झंडा गाड़े रखा। युवराज को बांदा-हमीरपुर निकाय क्षेत्र से सपा MLC चुने जाने का गौरव भी हासिल है। भाजपा की बम बम में वह भी भाजपाई हो गए। हमीरपुर सदर उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी बन दोबारा विधानसभा पहुंच गए। जिसे हराया था, उसे भाजपा ने 2022 में हमीरपुर MLA बना दिया।
युवराज बोले- उनकी छवि खराब करने की सोची समझी साजिश
आकांक्षा किसे नहीं होती। युवराज सिंह ने भी 2027 को लेकर उम्मीद पाली हो तो अचरज कैसा। लेकिन 10 मार्च की अल सुबह आईटी की छापेमारी ने मानो सब गुड़ गोबर कर दिया है। उन्होंने गुरुवार को FB में लिखा, सारी कवायद उनकी छवि खराब करने पर केंद्रित है। उनके यहां छापा पड़ा ही नहीं। वो सपरिवार एक पारिवारिक विवाह प्रोग्राम को लेकर बाहर हैं। खामखां उन्हें छापेमारी का हिस्सा बनाने का षड्यंत्र हो रहा है।
छापेमारी का शुरुआती निष्कर्ष: सभी धनकुबेर सीरजध्वज के शागिर्द
अब युवराज सिंह को कौन बताए कि उनके जिन कजिन कजिन और सपा नेता सीरध्वज सिंह के यहां भी रेड हुई है, उनका और आपका आवास एक अहाते में समानांतर हैं। अहाते में आने जाने में मनाही है। ऐसे में अहाते के अंदर रेड का अनुमान ही लगाया जा सकता है। वैसे भी युवराज और कजिन सीरज में कोई अंतर नहीं माना जाता। भले ही सीरज 2007 में बांदा विधानसभा क्षेत्र से सपा उम्मीदवार रहे हों और अभी भी टेक्निकल सपाई माने जाते हों, लेकिन उन्हें युवराज की ही छवि माना जाता है। चूंकि छापेमारी का पूरा केंद्र ही सीरज को माना जा रहा है। सीरज के चुनिंदा करीबियों का एक साथ जांच की जद में आना इसकी मुनादी माना जाता है। लिहाजा युवराज की सफाई पर सवाल खड़े करने वालों की भी कमी नहीं है।
अज्ञात पर घर के विभीषण की तोहमत, क्या बनेगा सरकारी गवाह
सीरज, दिलीप, शशांक, अज्ञात और शिवशरण आदि ने खुद के घरों आफिसों में आईटी छापों को लेकर फकत चुप्पी साधी हुई है। इस बीच अज्ञात को घर का विभीषण प्रचारित करने की मुहिम का आगाज भी हो गया है। कहते हैं, बड़े दांव ने उसकी नीयत खराब कर दी है। आकाओं के चंगुल से बाहर आने की छटपटाहट ने उसे बागी बना दिया है। लेकिन छापा तो उसके यहां भी पड़ा है। ऐसे में उस पर सवाल क्यों। इस सवाल पर इसी टीम के एक चतुर सुजान कहते हैं, शायद सरकारी गवाह जैसी बला भी होती है साहेब! यह बला खुद को उबारने और टारगेट को निपटाने का सक्षम उपकरण मानी जाती है। देखना होगा कि चतुर सुजान की इस धारणा में कितनी सच्चाई है।


