Banda News: बांदा में पर्यावरण पर युवाओं की चौपाल, खनन और पौधारोपण के दावों पर उठे सवाल

Banda News: बांदा में युवाओं ने पर्यावरण चौपाल आयोजित कर खनन, वन क्षेत्र में कमी और करोड़ों पौधारोपण के दावों की पारदर्शी समीक्षा की मांग उठाई।

Anwar Raza
Published on: 1 Jun 2026 8:03 PM IST
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Banda News (Social Media)

Banda News: बढ़ते तापमान, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संकट को लेकर बांदा के युवाओं ने अवस्थी पार्क में "जल, जंगल, पहाड़ एवं नदी बचाओ अभियान" के तहत एक दिवसीय विचार गोष्ठी आयोजित की। छात्र नेता एवं विधि विद्यार्थी लव सिन्हा और शैलेन्द्र कुमार वर्मा की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार और छात्र शामिल हुए।

हाल के दिनों में बांदा का तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने और देश के सबसे गर्म शहरों में शामिल होने के बाद पर्यावरण का मुद्दा स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी पृष्ठभूमि में आयोजित चौपाल में प्रतिभागियों ने खनन, जंगलों की कमी, पौधारोपण और जलवायु परिवर्तन पर खुलकर विचार रखे।

कार्यक्रम में युवाओं ने बांदा की सीमा से लगे मौरंग खनन क्षेत्रों में हो रहे भारी उत्खनन पर चिंता जताई और अगले दस वर्षों तक नई खदानों पर रोक लगाने की मांग उठाई। साथ ही वन विभाग और अन्य सरकारी विभागों द्वारा हर वर्ष किए जाने वाले पौधारोपण के दावों की निगरानी सुनिश्चित करने की बात कही।



पर्यावरण कार्यकर्ता एवं पत्रकार आशीष सागर दीक्षित ने सूचना के अधिकार से प्राप्त आंकड़े साझा करते हुए कहा कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान चित्रकूट में 5,159, बांदा में 641, महोबा में 3,565, हमीरपुर में 458 और जालौन में 329 पेड़-पौधे काटे गए। इसके बदले संबंधित एजेंसियों को लगभग 948 हेक्टेयर ग्रीन बेल्ट विकसित करनी थी, लेकिन धरातल पर इसका अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं देता।

उन्होंने बताया कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 तक केवल चित्रकूट मंडल में ही करीब 3.90 करोड़ पौधे लगाए जाने का दावा किया गया है। वहीं उत्तर प्रदेश में वर्ष 2022-23 में 25 करोड़, 2023-24 में 30 करोड़ और 2024-25 में 36 करोड़ पौधारोपण का दावा किया गया। इसके बावजूद बुंदेलखंड के अधिकांश जिलों में वन क्षेत्र राष्ट्रीय वन नीति के 33 प्रतिशत लक्ष्य से काफी पीछे है।

फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022 तक बांदा में कुल भूभाग का केवल 2.31 प्रतिशत, महोबा में 5.14 प्रतिशत, जालौन में 5.42 प्रतिशत, हमीरपुर में 5.65 प्रतिशत, झांसी में 6.05 प्रतिशत, ललितपुर में 11.54 प्रतिशत और चित्रकूट में 19.64 प्रतिशत हिस्सा ही वन क्षेत्र के रूप में दर्ज है।

वक्ताओं ने कहा कि यदि करोड़ों पौधे लगाए गए हैं तो फिर वन क्षेत्र में अपेक्षित वृद्धि क्यों नहीं दिखाई दे रही है। इस सवाल पर पारदर्शी समीक्षा और सामाजिक निगरानी की जरूरत बताई गई।

युवा पत्रकार अभिषेक शुक्ला ने कहा कि अभियान को आगे बढ़ाते हुए हस्ताक्षर अभियान, पोस्टकार्ड अभियान, मानव श्रृंखला, स्कूल-कॉलेजों में जनसभाएं और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों को लेकर जनहित याचिका दायर करने पर भी विचार किया जाएगा।

कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता उमाशंकर पांडेय ने युवाओं की पहल का समर्थन करते हुए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। तिंदवारी क्षेत्र के जयराम सिंह बछेऊरा ने भी मंच से पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों में सहयोग देने की बात कही।

इस अवसर पर बांदा के जूझारू पत्रकार आशीष सागर दीक्षित, अभिषेक शुक्ला, पदम् श्री पुरस्कार से सम्मानित भाई उमाशंकर पांडेय , सामाजिक कार्यकर्ता अरून निगम,अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार मिश्रा दीनदयाल सोनी , राकेश बाजपेई विनय तिवारी जी मनोज धुरिया, दीपक पांडेय सहित बड़ी संख्या में युवाओं और पर्यावरण प्रेमियों ने भाग लिया। आयोजन के अंत में हर वार्ड से कम से कम पांच युवाओं को अभियान से जोड़कर पर्यावरण संरक्षण की इस पहल को व्यापक जन आंदोलन बनाने का संकल्प लिया गया।

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