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Ghazipur News: गाजीपुर के गौसपुर में सहेजी गई द्वितीय विश्व युद्ध की विरासत, जानें क्या है इतिहास
Ghazipur News: गाजीपुर जनपद के मुहम्मदाबाद तहसील के गौसपुर गांव में अंग्रेज शासनकाल में बनी हवाई पट्टी आज भी द्वितीय विश्व युद्ध के इतिहास और आजादी संग्राम की याद दिलाती है।
गाजीपुर के गौसपुर में सहेजी गई द्वितीय विश्व युद्ध की विरासत, जानें क्या है इतिहास (Photo- Newstrack)
Ghazipur News: इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो गाजीपुर जनपद का नाम इतिहास के अभिलेखों में मोटे अक्षरों में लिखा मिलेगा। मिलना भी चाहिए क्यों की गाजीपुर मुगलों से लेकर अंग्रेज हुकूमत तक सभी को गाजीपुर की आवश्यकता पड़ी इसी जनपद में एक तहसील है मुहम्मदाबाद जिसका द्वितीय विश्व युद्ध से गहरा रिश्ता रहा है । मुहम्मदाबाद तहसील से करीब सात किलोमीटर पश्चिम राष्ट्रीय राजमार्ग 31 पर एक गांव पड़ता है । उस गांव का नाम गौसपुर है इसी गांव के पास व्रतानी हुकूमत ने एक हवाई अड्डे का निर्माण कराया था । जो आज भी अंग्रेजी हुकूमत की क्रुरता की याद दिलाती है । इस हवाई अड्डे पर आने के उपरांत हम उन आजादी के दीवानों की कुर्बानी भी याद आ जाती है । जिन्होंने इस हवाई अड्डे को आग के हवाले कर दिया था । खैर अब हम बात करते हैं इस हवाई पट्टी की जिसका निर्माण अंग्रेजों ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कराया था ।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेज हुकूमत ने कराया था हवाई पट्टी का निर्माण
द्वितीय विश्व युद्ध सन् 1939 में तब शुरू जब जर्मन के नाजी सेनाओं ने पौलेंड पर हमला कर दिया । इस हमले के ब्रिटिश सरकार ने नाजी सेनाओं के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी । तो उधर अंग्रेजो खिलाफ जापान ने भी युद्ध छेड़ दिया था । उस समय भारत ब्रिटिश भारत हुआ करता जहां अंग्रजों की हुकूमत चलती थी । अब जापान व जर्मनी पर हमले करने व युद्ध में लड़ रहे अंग्रेज सैनिकों को रसद पहुंचाने व सैन्य कार्रवाई करने के लिए ज्यादा हवाई पट्टी की आवश्यकता पड़ने लगी उसी दौर में अंग्रेजो उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जनपद में तीन हवाई पट्टी का निर्माण कराया था । जिसमें जिसमें वाराणसी गाजीपुर मार्ग गोमती नदी के पास दुसरा गाजीपुर मऊ मार्ग अंधऊ एयरपोर्ट व तीसरा मुहम्मदाबाद तहसील अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग 31 स्थित फिरोजपुर गांव जो गौसपुर गांव के समीप है । इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो इन हवाई पट्टी का निर्माण करना उतना ही आवश्यक था जितना एक पौधे के लिए पानी, गाजीपुर जनपद के इन हवाई पट्टियों से अंग्रेजी उड़न तस्तरी कोलकाता तब का कलकत्ता तुरंत पहुंच कर वहां सैन्यकर्मियों को रसद व आवश्यक वस्तुएं मुहैया करा सके ताकि जापानी व आजाद हिन्द की सैनिकों से कोलकाता को बचाया जा सके ।
सन् 1940 में गाजीपुर के फिरोजपुर गांव में कराया था निर्माण
अंग्रेज हुकूमत ने जापानी सैनिकों के प्रभाव को देखते हुए व पुर्वी ब्रिटिश भारत व कोलकाता पर पकड़ मजबूत करने के लिए हवाई अड्डों की आवश्यकता थी । तब अंग्रजों ने गाजीपुर जनपद में सन् 1940 में तीन हवाई अड्डों का निर्माण कराया था । ताकि पुर्वी भारत व कोलकाता पर होने वाले हमलों के दौरान सैन्य सहायता तुरंत भेजी जाये । हालांकि उस दौरान इस एयरपोर्ट पर अमेरिकी सैनिकों व ब्रिटिश सैनिक को लाने व ले जाना का कार्य होता था । भारत में भी अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन चरम पर था । जिसे दबाने के लिए सैनिकों की आवश्यकता पड़ती थी । तब अंग्रेज सैनिक व अधिकारी तुरंत यहां पहुंच जाते थे । हालांकि दो साल बाद ही गौसपुर के फिरोजपुर स्थित हवाई अड्डे को आग के हवाले कर दिया गया ।
सन् 1942 में यमुना गिरी ने फुंक दि हवाई पट्टी
सन् 1940 में अंग्रेजो ने फिरोजपुर हवाई अड्डे का निर्माण कराया था । उसी समय अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन चरम था । इसी दौरान गाजीपुर जनपद गौसपुर फिरोजपुर निवासी यमुना गिरी अपने साथियों के साथ मिलकर हवाई अड्डे पर बने कमरों व झोपड़ियों में आग लगा दी । इस हमले में अंग्रेजों यमुना गिरी व इनके साथियों पर जम कर तांडव मचाया। जिसमें यमुना गिरी बुरी तरह घायल हो गये । तब ब्रिटिश सैनिकों ने यमुना गिरी व उनके साथियों को गिरफ्तार कर लिया । अंग्रेजो ने यमुना गिरी व उनके साथियों से एक माफीनामा लिखने को कहां लेकिन साहसी वीर जवानों ने माफीनामा लिखने से सख्त मना कर दिया । तब अंग्रेजी पुलिस प्रशासन ने गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जहां अंग्रेज कोर्ट ने यमुना गिरी व उनके साथियों को सजा सुना दी ।
भारत सरकार ने गौसपुर हवाई अड्डे को छोड़
देश जब 1945 में आजाद हुआ और भारत की सत्ता भारतीय राजनेताओं के हाथ आई तो कुछ सालों बाद गौसपुर फिरोजपुर में बने इस हवाई अड्डे को छोड़ दिया गया तो वहीं गाजीपुर के अंधऊ एयरपोर्ट को अपने पास रखा । अब स्थिति में है की फिरोजपुर के इस हवाई अड्डे पर ग्रामीणों का कब्जा हो चुका है । जहां लोग अपने अपने तरिके से इस हवाई अड्डे पर काबिज है ।


