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गोरखपुर से ‘गोविष्टि यात्रा’ शुरू करेंगे अविमुक्तेश्वरानंद महाराज, 81 दिन की यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण
Gorakhpur News: गोरखपुर से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज 81 दिवसीय ‘गोविष्टि यात्रा’ की शुरुआत करने जा रहे हैं। इस यात्रा के दौरान वे विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में गो-रक्षा और धर्म जागरण को लेकर जनजागरण करेंगे।
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Gorakhpur News: ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामीश्री: अविमुक्तेश्वरानंद महाराज अपनी घोषित ‘गोविष्टि यात्रा’ का शुभारंभ 03 मई को गोरखपुर से करने जा रहे हैं। अनवरत 81 दिन तक प्रतिदिन 5 विधानसभा में गोष्ठी, आशीर्वचन, पदुकापूजन के कार्यक्रम के साथ यह यात्रा आगे बढ़ेगी। शंकराचार्य 2 मई की शाम को अपने दीक्षित शिष्य एडवोकेट मनीष पांडेय के आवास सहारा स्टेट पहुंच जाएंगे। जहां से वह 3 मई की सुबह भारत माता मंदिर से लोगों के बीच गोविष्टी यात्रा के संबंध में अपने विचार व्यक्त करेंगे।
यह यात्रा देश की पहली यात्रा है जिसमें पूज्य शंकराचार्य भगवान जन जन को जगाने उनके द्वार पहुंचेगे ( सकल विधानसभा क्षेत्र- सकल उत्तरप्रदेश) में निकल रहे हैं। शंकराचार्य महाभाग समूचे इतिहास में पहले धर्माचार्य होंगे जो कि 81 दिवस की यात्रा अनवरत रूप से करके गो माता के सम्मान के लिए लोगों को जाग्रत करने कड़कड़ाती चिलचिलाती धूप में भ्रमण करेंगे। यह एक युग की शुरुवात है। जिसमें धर्म जागरण के लिए ईश्वरीय चलित प्रतिमूर्ति हम सबके लिए चलायमान हैं।
कई मायनों में अहम है गोरखपुर से शुरू होने वाली यात्रा
गोरखपुर की गोरक्षपीठ नगरी से यात्रा का शुभारंभ होना कई मायनों में महत्वपूर्ण होगा। इस यात्रा में सैकड़ों गाड़ियों का काफिला होगा। यह यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें तमाम धर्मानुयाई और कानून विद भी शामिल हो रहे हैं। प्रत्येक सनातनियों के अस्तित्व व स्वाभिमान के साथ जुड़ाव है इस गोविष्टि यात्रा का। शंकराचार्य की मीडिया टीम ने बताया कि यह यात्रा सहारा स्टेट से निकलकर सहजनवा, खजनी, बांसगांव, चिल्लुपार विधानसभा से होते हुए चौरी चौरा विधानसभा में पहुंचेगी जहां शंकराचार्य और टीम के लोगों का रात्रि विश्राम होगा। अगले दिन 4 मई की सुबह फिर यह यात्रा गोरखपुर की सीमा को छोड़ते हुए हाटा, रामकोला, खड्डा, पडरौना, तमकुहीराज, फाजिलनगर पहुंचेगी।
कुंभ मेला में विवाद से सुर्खियों में हैं शंकराचार्य
प्रयागराज में मौनी अमावस्या के मौके पर स्नान को लेकर ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन आमने-सामने आ गए थे। मौनी अमावस्या के दौरान मेला प्रशासन ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पालकी पर सवार होकर स्नान के लिए जाने से रोक दिया था। इसके बाद शंकराचार्य समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हो गई थी। इससे नाराज होकर शंकराचार्य ने धरना शुरू कर दिया।


