Gorakhpur: जल संकट से बचने को वाटर डिस्चार्ज और रिचार्ज में संतुलन जरूरी: जल पुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह

Gorakhpur News: भारत के जलपुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह ने गोरखपुर में आयोजित संगोष्ठी में कहा कि जल संकट से बचने के लिए वाटर डिस्चार्ज और रिचार्ज में संतुलन बेहद जरूरी है।

Purnima Srivastava
Published on: 17 Feb 2026 4:03 PM IST
Gorakhpur: जल संकट से बचने को वाटर डिस्चार्ज और रिचार्ज में संतुलन जरूरी: जल पुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह
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Gorakhpur News: भारत के जलपुरुष कहे जाने वाले रैमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि सनातन विकास या विकास का सनातन मॉडल ही भारत को दोबारा विश्वगुरु बना सकता है। विकास के साथ प्रकृति का भी चिंतन भारत का सनातन विचार है। इस परिप्रेक्ष्य में उत्तर प्रदेश के लिए सुखद स्थिति है कि यहां के मुख्यमंत्री विकास के सनातन मॉडल को, प्राकृतिक और सांस्कृतिक विविधता के एकीकरण को आगे बढ़ा रहे हैं, जहां विकास का विचार है तो साथ ही प्रकृति और पर्यावरण को बचाने का प्रतिबद्ध चिंतन भी।

डॉ. सिंह मंगलवार को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) और महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘विकास के साथ पर्यावरणीय चुनौतियां : साझा प्रयास से सतत विकास’ विषयक संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विकास के साथ पर्यावरण की चुनौतियों को समझते हुए इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन के लिए प्रदेश सरकार, खासकर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बधाई दी और पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन से विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने वाले विकास के सनातन मॉडल की चर्चा करते हुए कहा कि सनातन का मतलब सदैव, नित्य नूतन निर्माण। जिसका न आदि हो न अंत हो, वही सनातन है। इस परिप्रेक्ष्य में प्राचीन भारत का विकास सनातन विकास था।

जलपुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि संविधान के अस्तित्व में आने से हजारों वर्ष पहले वेदों, उपनिषदों में प्रकृति और पृथ्वी के प्रति मानव के कर्तव्य को समझाया गया है। पंचभूत की परिकल्पना के साथ ही प्रकृति के प्रति संस्कार और व्यवहार को भारत में सदियों पहले ही बता दिया गया था। इसी ज्ञान के कारण दुनिया भारत को विश्वगुरु मानती थी। आज दोबारा विश्वगुरु बनने के लिए भारत को अपनी प्राचीन ज्ञान परंपरा का अनुसरण करना होगा।

जल संकट का विस्तार से उल्लेख करते हुए डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि जल संकट वैश्विक समस्या है लेकिन इसका स्थानीय हल निकाला जा सकता है। इसके लिए जल साक्षरता बढ़ाने की आवश्यकता है। जल संकट से बचने के लिए वाटर डिस्चार्ज और वाटर रिचार्ज में संतुलन बनाना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि विकास पर एकतरफा ध्यान देने से हमने नदियों से उनकी निर्मलता और अविरलता को छीन लिया। पश्चिम की डैम डिजाइन को भारत की नदियों पर थोप देने से ही आज पारिस्थितिकी बदलने की समस्याएं दिख रही हैं। आज देश के 365 जिले पानी के संकट से जूझ रहे हैं। जल संकट से बचने, पर्यावरण संरक्षण के साथ सतत विकास की अवधारणा पर काम करने के लिए छोटे छोटे कार्य करने चाहिए। छोटे काम से बड़े काम की कल्पना में जोखिम नहीं है और सफलता शत प्रतिशत हो जाती है। छोटे छोटे प्रयासों से उन्होंने 50 साल में 23 नदियों को पुनर्जीवित किया है। डॉ. सिंह ने कहा कि सरिताएं बहती हैं तो सभ्यताएं भी जीवंत रहती हैं।

प्रकृति का लाडला बेटा है उत्तर प्रदेश

डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि प्रकृति व पर्यावरण के दृष्टिकोण से यूपी भगवान का लाडला बेटा है। यहां प्रचुर पानी और मिट्टी बेहतरीन है। यहां भविष्य में कोई जल संकट न हो, इसके लिए फसल पद्धति को वर्षा पद्धति से जोड़ने की जरूरत है।

पर्यावरण संरक्षण हर व्यक्ति की जिम्मेदारी : मनोज कुमार सिंह

संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव एवं स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मनोज कुमार सिंह ने कहा कि पर्यवारण किसी एक व्यक्ति या संस्था से नहीं संभल सकता। पर्यावरण के संरक्षण में हर व्यक्ति और हर संस्था को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। व्यक्तिगत जिम्मेदारी से ही सामूहिक प्रयास और व्यापक परिणाम की तरफ बढ़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान की शुरुआत में पर्यावरण शब्द का उल्लेख नहीं था। पर्यावरण शब्द का पहली बार उल्लेख 1976 में आया, तब संशोधन कर इसे जोड़ा गया। श्री सिंह ने कहा कि सबसे ज्यादा विकसित देश सबसे ज्यादा साफ सुथरे हैं। उनका पानी स्वच्छ है और एयर क्वालिटी इंडेक्स भी। इससे स्पष्ट है कि पर्यावरण सुरक्षित रखकर भी तीव्र विकास संभव है। समृद्धि से पर्यावरण और बेहतर बनाया जा सकता है।

स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ ने कहा कि जापान, दक्षिण कोरिया में आठ साल तक के बच्चों को किताबी पढ़ाई की बजाय स्वच्छता के व्यावहारिक ज्ञान पर अधिक जोर दिया जाता है। इससे शुरुआती दौर से ही पर्यावरण के प्रति चेतना जागृत होने लगती है। उन्होंने कहा कि हर विकास की गतिविधि का पर्यावरण पर कुछ न कुछ नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसे देखते हुए सरकार ने एन्वॉयरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट बनाया। इसके तहत संभावित नुकसान का आकलन कर पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी कदम उठाए जाते हैं। श्री सिंह ने कहा कि हम सभी लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक होना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण पूरी तरह संभव है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने इसे करके दिखाया है। यूपी देश का एकमात्र ऐसा बड़ा राज्य है जहां वन क्षेत्रफल बढ़ा है।

सीएम योगी के नेतृत्व में विकास संग पर्यावरण संरक्षण भी : डॉ. सुरिंदर सिंह

संगोष्ठी में एमजीयूजी के कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सतत विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी पूरी गंभीरता से ध्यान देना होगा। अच्छी बात यह है कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अनेकानेक महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। उन्होंने कहा कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में पर्यावरण संरक्षण के लिए अपना योगदान देने के लिए सतत प्रयत्नशील है।

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में यूपी ने हासिल की उल्लेखनीय उपलब्धि : अनिल कुमार

स्वागत संबोधन में अपर मुख्य सचिव वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन अनिल कुमार ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र भी शहरीकरण की ओर जा रहे है ऐसे में पर्यावरण संतुलन से जुड़े कार्य और महत्वपूर्ण हो गए हैं। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में यूपी ने बेहतरीन कार्य किया है। यूपी में 95 प्रतिशत डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का ट्रीटमेंट किया जा रहा है। बड़े पैमाने पर लिगेसी वेस्ट का ट्रीटमेंट किया गया है। यूपी में लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। इसी का नतीजा है कि हमारे यहां डॉल्फिन की संख्या सबसे ज्यादा बढ़ी है। श्री कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विगत आठ सालों में रिकार्ड ढाई सौ करोड़ वृक्षारोपण होने से वनाच्छादित क्षेत्र में पांच सौ किलोमीटर क्षेत्रफल की वृद्धि हुई है। यह पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि है।

तीव्र विकास के साथ पर्यवारण संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध हैं सीएम योगी : डॉ. रविंद्र प्रताप सिंह

आभार ज्ञापित करते हुए यूपीपीसीबी के चेयरमैन डॉ. रविंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यह आयोजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पर्यावरण संरक्षण के प्रति दूरदर्शी सोच का परिणाम है। मुख्यमंत्री हमेशा इस बात और जोर देते हैं कि विकास तेजी से हो लेकिन उसके समानांतर पर्यवारण की रक्षा के लिए भी वह प्रतिबद्ध रहते हैं। उन्होंने कहा कि विकास अपरिहार्य है लेकिन इसका भोग हम तब कर पाएंगे जब वायु, जल स्वच्छ होंगे और धरती हमारे अनुकूल रहेगी। छोटे छोटे प्रयास पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े उद्देश्य की पूर्ति कर सकते हैं।

संगोष्ठी के शुभारंभ में मंचासीन अभ्यागतों का पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र व स्मृतिचिन्ह देकर अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर मंडलायुक्त अनिल ढींगरा, जिलाधिकारी दीपक मीणा, नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल, एम्स की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता, एमजीयूजी के कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव, यूपीपीसीबी के सदस्य सचिव संजीव सिंह, गोरखपुर के प्रभागीय वनाधिकारी विकास यादव सहित कई अधिकारी, एमजीयूजी के शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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