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Jhansi News: कान्हा उपवन गौशाला की गायों को मिल रही ठंडक, शेडों में लगाया गया फॉग कूलिंग सिस्टम
Jhansi News: झांसी की कान्हा उपवन गौशाला में गर्मी से राहत के लिए गायों को ठंडक दी जा रही है। शेडों में फॉग कूलिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे पशुओं को बेहतर वातावरण मिल रहा है।
Jhansi News(Photo-Social Media)
Jhansi News: उत्तर प्रदेश के झांसी नगर निगम की बिजौली स्थित कान्हा उपवन गऊशाला में संरक्षित गोवंश को हीटवेव और गर्मी से बचाने के लिए शेडों में मिस्ट फॉगर सिस्टम लगाया गया है, जिससे गायों को एयरकंडीशन जैसी ठंडक मिलने लगी है। ऐसे में गऊशाला में संरक्षित लगभग 600 गाय भीषण गर्मी और लू से अपने आपको सुरक्षित महसूस कर रही हैं। गऊशाला में इस सिस्टम को लगाने में नगर निगम को बहुत कम धनराशि खर्च करनी पड़ी, ऐसे में नगर निगम की यह गऊशाला बुंदेलखंड में एक मॉडल के रूप में देखी जा रही है।
झांसी में इस वर्ष गजब की गर्मी पड़ रही है, बीते कई दिनों से महानगर का तापमान 45 डिग्री से नीचे आने का नाम नहीं ले रहा है। इस भीषण गर्मी में लोग तो अपने घरों में कूलर, पंखों और एयरकंडीशन से ठंडी हवा लेकर राहत महसूस कर रहे हैं, लेकिन मूक पशु-पक्षी गर्मी की वजह से बदहाल हैं। इन हालातों में महापौर बिहारी लाल आर्य और नगर आयुक्त आकांक्षा राणा ने पशु पालन विभाग को गऊशाला में संरक्षित गोवंश को गर्मी और लू से बचाने के लिए समुचित उपाय करने को कहा। इसके बाद नगर निगम द्वारा बिजौली स्थित कान्हा उपवन गऊशाला में मिस्ट फॉगर सिस्टम लगाया गया, जिससे गऊशाला में संरक्षित गायों को बहुत राहत मिली है।
इस संबंध में नगर निगम के पशु पालन अधिकारी डॉ.राघवेंद्र सिंह ने बताया कि बिजौली में नगर निगम की कान्हा उपवन गऊशाला संचालित है। यहां चार विशाल शेडों में गाय संरक्षित हैं। प्रत्येक शेड 50 फीट गुणा 125 फीट का है। प्रत्येक शेड में लगभग 150 गाय हैं। गायों को भीषण गर्मी से बचाने के लिए महापौर और नगर आयुक्त के निर्देश पर मिस्ट फॉगर सिस्टम लगाए गए हैं। इस सिस्टम के लगाने से गऊशाला के शेडों के तापमान में 6 से 10 डिग्री तक गिरावट दर्ज की गई। सिस्टम से कोहरेनुमा पानी की महीन बूंदों की फुहार निकलती है जिससे गायों को तरावट और ताजगी मिल रही है। डॉ.राघवेंद्र ने बताया कि पूरी गऊशाला के चारों शेडों में मिस्ट फॉगर सिस्टम लगाने में बहुत कम खर्च आया है।
मिस्ट फॉगर सिस्टम में एक हाई-प्रेशर पंप से फिल्टर में तेजी से पानी छोड़ा जाता है, फिल्ट से महीन पाइप जुड़े होते हैं। पाइपों में पानी की बारीक फुहार छोड़ने के लिए पीतल या अन्य धातुओं के नोजल लगे होते हैं। पंप द्वारा प्रेशर से पानी छोड़े जाने पर नोजल से पानी कोहरेनुमा नन्हीं बूंदों के रूप में तेजी से निकलने लगता है। पानी की बारीक बूंदों (फॉग) को हवा में छोड़ने से उक्त स्थान के तापमान में 10 से 20डिग्री तक की कमी महसूस की जाती है। यह गर्मी कम करने और नमी बनाए रखने वाली एक अत्यधिक प्रभावी कूलिंग तकनीक है।
आमतौर पर इस तकनीक की प्रयोग घर की बालकनी, गार्डन, रूफ-टॉप (छत), कैफे और ओपन रेस्टोरेंट में किया जाता है। वहीं डेयरी फार्म, पोल्ट्री फार्म और मशरूम की खेती में भी यह कारगर है। सार्वजनिक स्थान बस स्टैंड, स्टेडियम, विवाह समारोह या जहां बहुत अधिक संख्या में लोग होते हैं उन्हें ठंडक प्रदान करने के लिए इस सिस्टम का प्रयोग किया जाता है। हालांकि इसकी कीमत बहुत कम होती, फिर भी क्षेत्रफल के अनुसार बढ़ सकती है।


