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Jhansi News: झांसी में ऑपरेशन कन्विक्शन का असर, 48 मुकदमों में 46 को सजा
Jhansi News: झांसी में ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत मई माह में 48 मामलों में 46 अभियुक्तों को सजा मिली, पुलिस और अभियोजन की प्रभावी पैरवी से बढ़ी दोषसिद्धि दर।
Jhansi News: झांसी। ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के तहत जिले की मानीटरिंग सेल पुलिस ने विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन मामलों में पैरवी कर अपराधियों को सजा दिलाई है। मई माह में 48 मुकदमों में 46 लोगों को सजा सुनाई गई। इसमें पॉक्सो एवं बलात्कार के पांच मामलों में चार अभियुक्तों, सनसनी खेज के 36 मामलों में 35 अभियुक्त शामिल है। ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत अभियुक्तों को सजा कराने के लिए पुलिस व अभियोजन की ओर से मजबूत पैरवी की जा रही है। इसमें मई माह की रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।
जघन्य और महिला संबंधी अपराधों के साथ अन्य अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई करने के बाद उन्हें न्यायालय में दोषी सिद्ध करने तक पुलिस की सक्रिय भूमिका रहती है। पुलिस द्वारा न्यायालय में की गई पैरवी से सरकार का आपरेशन कन्विक्शन अभियान कारगर साबित हो रहा है। क्योंकि जनपद में इस अभियान के तहत मई 2026 में 48 मुकदमों में से 46 अभियुक्तों को सजा दिलाई गई। इस अवधि में किसी भी मामले में मृत्यु दंड की सजा नहीं दी गई।
इस अभियान की सफलता में पुलिस तीन नए आपराधिक कानून को भी एक कुंजी मान रहे हैं, जिसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत समय रहते कार्रवाई होती है। प्रदेश सरकार की ओर से जून 2025 से ऑपरेशन कन्विक्शन की शुरुआत की गई थी, जिसमें पुलिस ने सशक्त विवेचना, समयबद्ध चार्जशीट और न्यायालय में प्रभावी पैरवी के जरिए अपराधों के खिलाफ निर्णायक बढ़त बनाना है। वर्ष 2026 के पांचवें माह अप्रैल में 46 मामलों में सजा सुनाई गई, जिनमें 46 अभियुक्त दोषसिद्ध हुए हैं। पॉक्सो एवं बलात्कार के मामलों में चार अभियुक्त, सनसनीखेज के 36 मामलों में 35 अभियुक्त, अन्य प्रकरण के सात मामलों में सात अभियुक्तों को सजा सुनाई गई।
यह अभियान पुलिस महानिदेशक द्वारा न्यायालयों में लंबित मुकदमों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। इसका लक्ष्य प्रभावी पैरवी के माध्यम से दोषियों को सजा दिलाना है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बीबीजीटीएस मूर्ति के कुशल निर्देशन में यह उपलब्धि हासिल की गई। इसमें मॉनिटरिंग सेल, अभियोजन शाखा, कोर्ट मोहर्रिर, कोर्ट पैरोकार, विशेष लोक अभियोजक, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता, अभियोजन अधिकारी और सहायक अभियोजन अधिकारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन सभी के समन्वित प्रयासों और प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरुप, मई 2026 में न्यायालयों में विचाराधीन 48 अभियोगों में 46 अभियुक्तों को सजा सुनाई गई। बताते हैं कि जनवरी माह में 79 मामलों में से 78, फरवरी माह में 55 मामलों में से 49, मार्च माह में 47 मामलों में से 46 और अप्रैल माह में 32 मामलों में से 28 व मई माह में 48 मामलों में से 46 अभियुक्तों को सजा दिलाई गई है।
यह महत्वपूर्ण फैसले न्यायालय एडीजे विशेष न्यायाधीश (आवश्यक वस्तु अधिनियम) अनुभव द्विवेदी ने संजय वर्मा के अंगरक्षक कांड में सोनू गेड़ा उर्फ सचिन गुप्ता, रिंकू गेड़ा उर्फ मनीष गुप्ता, बॉबी गेड़ा उर्फ संदीप गुप्ता, प्रहलाद, राजेंद्र सिंह गुर्जर, भूपेंद्र सिंह उर्फ पुष्पेंद्र सिंह गुर्जर, कमलेश यादव व ऊधम सिंह, प्रत्येक को दफा 302 संपठित धारा -149 के अंतर्गत आजीवन कारावास की सजा तथा एक लाख रुपए अर्थदंड से दंडित किया है। आठ आरोपियों पर 13 लाख 90 हजार के अर्थदंड से दंडित किया।
एडीजे गरौठा ने एरच थाना क्षेत्र के 302 के मामले में राकेश पाल निवासी ग्राम गोकुल थाना एरच को आजीवन कारावास व 14 हजार रुपए के अर्थदंड, एडीजे-1 ने कोतवाली थाना क्षेत्र के तलैया मोहल्ले में रहने वाले वसीम खान को आजीवन कारावास व 63 हजार रुपए के अर्थदंड, एडीजे गरौठा ने गरौठा थाना क्षेत्र के निमगहना निवासी ओम प्रकाश व केश कुमार को सात वर्ष के कठोर कारावास व दो हजार रुपए के अर्थदंड, एडीजे एफटीसी द्वितीय ने लहचूरा थाना क्षेत्र के ग्राम कोटरा निवासी टिप्पू उर्फ मुकेश शर्मा को गांजा रखने पर आठ साल का कारावास और बीस हजार रुपए के अर्थदंड, न्यायालय एडीजे-2 ने दहेज हत्याकांड में मऊरानीपुर थाना क्षेत्र के अल्याई मोहल्ले में रहने वाले अतुल खरे, रमेश खरे व आशा खरे को दस साल का कारावास व तीन हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है।
यह टीम है मॉनीटरिंग सेल
पुलिस अधीक्षक ग्रामीण/ नोडल अधिकारी अरविन्द कुमार, निरीक्षक चंद्रशेखर दुबे, उपनिरीक्षक सर्वेन्द्र सिंह, आरक्षक सलमान पठान, पर्वत सिंह, महिला आरक्षी कुसुम पटेल, दीपिका उपाध्याय व नेहा सचान शामिल है।
इनका कहना है
बीबीजीटीएस मूर्ति, एसएसपी झांसी ने बताया ऑपरेशन कन्विक्शन अभियान के अंतर्गत जैसे ही भारतीय न्याय संहिता के साथ-साथ पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता लागू हुई है। उसे पुलिस की कार्यप्रणाली में भी तेजी आई है। न्यायालय में भी बेहतर पैरवी हो रही है। जिसके चलते हम प्रत्येक वर्ष दोषियों को सजा दिलाने में सफल रहे हैं।


