अब इस दिग्गज नेता ने किया यूजीसी नियमों का विरोध , अब क्या करेगी सरकार

पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र ने यूजीसी के नए नियमों को छात्रों में भेदभाव बढ़ाने वाला बताया, सवर्ण समाज व भाजपा नेताओं का विरोध तेज।

Ramkrishna Vajpei
Published on: 28 Jan 2026 4:32 PM IST
अब इस दिग्गज नेता ने किया यूजीसी नियमों का विरोध , अब क्या करेगी सरकार
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Deoria: भाजपा सांसद मनोज तिवारी के बाद अब भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र ने भी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के इन नियमों पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि इससे छात्रों के बीच भेदभाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है और सामाजिक समरसता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। गौरतलब है कि यूजीसी के नए नियमों का सवर्ण समाज की ओर से विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। जिसमें भाजपा के कई दिग्गज नेता एमएलए, एमएलसी व पूर्व केंद्रीय मंत्री विरोध दर्ज करा चुके हैं।

नियम लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित कई राज्यों में सवर्ण समाज से जुड़े संगठन और व्यक्ति सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से लोकतांत्रिक ढंग से इसका विरोध दर्ज करा रहे हैं। देवरिया में भी बड़ी संख्या में लोग यूजीसी नियमों के खिलाफ अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। विरोध करने वालों का कहना है कि इन नियमों के चलते सवर्ण समाज के छात्र मानसिक दबाव में रहेंगे।

कलराज मिश्र ने कहा है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में जाति के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह नियम छात्रों के बीच विभाजन की भावना को बढ़ावा दे सकता है, जिससे समानता और सामाजिक समरसता प्रभावित होगी तथा अलगाववादी प्रवृत्तियों को बल मिल सकता है। उन्होंने सरकार से इस नियम पर पुनर्विचार करने की मांग की।

गौरतलब है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026 को 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया गया है। ये विनियम वर्ष 2012 से लागू भेदभाव-रोधी नियमों का अद्यतन रूप हैं। इससे पूर्व फरवरी 2025 में यूजीसी ने इन नियमों का मसौदा सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया था।

मसौदा नियमों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा से बाहर रखा गया था और झूठी शिकायतों को हतोत्साहित करने के लिए जुर्माने का भी प्रस्ताव किया गया था। हालांकि, अंतिम अधिसूचित नियमों में यूजीसी ने ओबीसी को भी जाति-आधारित भेदभाव के दायरे में शामिल किया है और झूठी शिकायतों से संबंधित प्रावधान हटा दिया गया है।

नवीन नियमों में 'भेदभाव' की परिभाषा को विस्तारित करते हुए कहा गया है कि किसी भी हितधारक के खिलाफ धर्म, जाति, लिंग, जन्मस्थान, विकलांगता अथवा इनमें से किसी भी आधार पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किया गया अनुचित या पक्षपातपूर्ण व्यवहार भेदभाव की श्रेणी में आएगा। साथ ही, शैक्षणिक संस्थानों को जाति, धर्म, भाषा या लिंग के आधार पर अलग शैक्षणिक व्यवस्था स्थापित करने से रोकने का भी प्रावधान किया गया है।

यूजीसी नियमों के लागू होने के बाद से ही सवर्ण समाज से जुड़े विभिन्न संगठनों द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है, जो अब लगातार व्यापक होता जा रहा है।

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Ramkrishna Vajpei

Ram Krishna Vajpei is a veteran cross-media journalist, political analyst, and data journalism expert whose distinguished career began in 1982. Spanning over four decades across print, broadcast (TV/Radio), and digital platforms, he specializes in rigorous research and deep analytical reporting on socio-political affairs. An authority on modern data journalism and the technical application of AI/LLMs in media, Vajpei also trains next-generation journalists and is currently pursuing a PhD in media studies. His work is defined by an absolute commitment to objectivity and a comprehensive editorial vision.

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