Kanpur News: पीपल-अमलतास से निखरेगी कानपुर की पहचान, बनेंगे 7 थीमेटिक वन और 52 गोकुल वाटिकाएं

Kanpur News: कानपुर में हरियाली बढ़ाने और शहर की पहचान को नया स्वरूप देने के लिए 7 थीमेटिक वन और 52 गोकुल वाटिकाएं विकसित की जाएंगी। इसमें पीपल और अमलतास जैसे वृक्ष प्रमुख होंगे।

Avanish Kumar
Published on: 2 Jun 2026 3:03 PM IST
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Kanpur News(Photo-Social Media)

Kanpur News: कानपुर में आने वाले वर्षों में हरियाली और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा बदलाव देखने जा रहा है। शहर की प्रमुख सड़कों, ग्रामीण मार्गों और खाली भूमि को हरित क्षेत्र में बदलने के लिए व्यापक वृक्षारोपण योजना तैयार की गई है। इस योजना के तहत पीपल और अमलतास के पौधों से सड़कें सजाई जाएंगी, वहीं मियावाकी तकनीक से घने वन विकसित किए जाएंगे। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में हुई जिला वृक्षारोपण समिति की बैठक में इस महत्वाकांक्षी योजना को अंतिम रूप दिया गया।

हरियाली से चमकेंगी प्रमुख सड़कें और मार्ग

शहर की पहचान बदलने के लिए दो प्रमुख मार्गों को विशेष रूप से हरित कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। रमईपुर-साढ़-जहानाबाद मार्ग के दोनों ओर पीपल के पौधे लगाए जाएंगे, जिससे यह मार्ग प्राकृतिक छाया और शुद्ध हवा का केंद्र बनेगा। वहीं गंगा बैराज से मंधना मार्ग तक अमलतास के पौधों का रोपण किया जाएगा, जो गर्मियों में पीले फूलों की खूबसूरती से वातावरण को आकर्षक बनाएंगे। यह पहल न केवल सौंदर्य बढ़ाएगी बल्कि तापमान नियंत्रण और प्रदूषण कम करने में भी मदद करेगी। इन मार्गों को पर्यावरणीय पर्यटन के रूप में भी विकसित करने की योजना है।

7 थीम आधारित वन और 52 गोकुल वाटिकाएं

शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कुल सात विशेष थीम आधारित वन विकसित किए जाएंगे। इनमें कारगिल पार्क में सामाजिक समरसता वन, कैंटोनमेंट क्षेत्र में वंदे मातरम वाटिका, बिल्हौर के हाजीपुर गांव में 17,500 पौधों का ऊर्जा वन, सुधांशु जी महाराज आश्रम में महर्षि चरक वन शामिल हैं। इसके अलावा समृद्धि वन, ऑक्सी वन और फलदार वाटिका भी विकसित की जाएंगी। साथ ही 52 गोआश्रय स्थलों पर गोकुल वाटिकाएं बनाई जाएंगी, जहां खाली भूमि को हरियाली में बदला जाएगा। हर विकासखंड में मियावाकी फॉरेस्ट विकसित कर तेजी से घने जंगल तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा।

35.84 लाख पौधों का विशाल लक्ष्य और तैयारियां

इस वर्ष जिले में कुल 35.84 लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। जिले की 27 नर्सरियों में लगभग 52 लाख पौधे तैयार किए जा चुके हैं, जिनमें आम, पीपल, बरगद, जामुन, महुआ, सहजन, आंवला, बेल और इमली जैसी प्रजातियां शामिल हैं। प्रभारी प्रभागीय वनाधिकारी विकास नायक ने बताया कि सभी विभागों को अलग-अलग लक्ष्य सौंपे गए हैं ताकि अभियान को प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सके। वन विभाग, ग्राम्य विकास, कृषि और नगर विकास विभाग मिलकर इस अभियान को सफल बनाएंगे।

5 जून से शुरू होगा ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान

विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की शुरुआत की जाएगी, जिसे जन आंदोलन का रूप देने की तैयारी है। जिलाधिकारी ने सभी विभागों को समय से गड्ढों की खुदाई और पौधारोपण स्थलों की तैयारी पूरी करने के निर्देश दिए हैं। वृहद वृक्षारोपण अभियान जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून के साथ शुरू होगा। 15 जून से नर्सरियों से पौधों का उठान भी प्रारंभ कर दिया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य है कि यह कार्यक्रम केवल औपचारिकता न रहकर जनता की भागीदारी से पर्यावरण संरक्षण का बड़ा आंदोलन बने, जिससे आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और हरित वातावरण मिल सके।

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