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Kanpur News : बिठूर महोत्सव 2026: कला, संगीत, साहित्य और संस्कृति का तीन दिवसीय भव्य संगम
Kanpur News : बिठूर महोत्सव 2026: तीन दिन कला, संगीत, साहित्य और लोक-परंपरा का भव्य संगम, राष्ट्रीय व स्थानीय कलाकारों के साथ
Bithoor Festival 2026
Kanpur News : बिठूर की ऐतिहासिक धरोहर, आध्यात्मिक आभा और सांस्कृतिक पहचान एक बार फिर जीवंत होने जा रही है। 26 से 28 फरवरी तक आयोजित होने वाला बिठूर महोत्सव तीन दिनों तक कला, संगीत, साहित्य और परंपरा का भव्य संगम प्रस्तुत करेगा। इस बार का आयोजन राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों, स्थानीय प्रतिभाओं और विविध सांस्कृतिक विधाओं की भागीदारी के कारण विशेष महत्व रखता है।
रॉक बैंड पलाश सेन व यूफोरिया बनेगा आकर्षण का केंद्र
महोत्सव में देशभर में लोकप्रिय रॉक बैंड पलाश सेन एवं यूफोरिया की प्रस्तुति युवाओं के आकर्षण का केंद्र रहेगी। समापन संध्या पर सुप्रसिद्ध गायक गोपाल एम. तिवारी अपनी सुरीली आवाज से महोत्सव को यादगार बनाएंगे। साहित्य प्रेमियों के लिए आयोजित कवि सम्मेलन में दिनेश बावरा, प्रताप फौजदार, शंभु शिखर, राव अजात शत्रु और सबीना अदीब जैसे प्रतिष्ठित कवि अपनी रचनाओं से समां बांधेंगे। शास्त्रीय नृत्य के लिए भोपाल कथक कमेटी तथा कर्ण आधारित नाट्य मंचन के लिए श्री राम कला केंद्र की भागीदारी आयोजन की गरिमा बढ़ाएगी।
महोत्सव का होगा शुभारंभ
26 फरवरी को विद्यालयों के छात्र-छात्राओं की नृत्य, रंगोली, स्लोगन और कला प्रतियोगिताओं के साथ महोत्सव का शुभारंभ होगा। पारंपरिक स्वागत, दीप प्रज्वलन और बिठूर थीम गीत की प्रस्तुति कार्यक्रम को स्थानीय पहचान से जोड़ेगी। इसके बाद कथक नृत्य और रात्रि में म्यूजिकल नाइट के दौरान पलाश सेन एवं यूफोरिया की प्रस्तुति मुख्य आकर्षण रहेगी।
स्थानीय प्रतिभाओं को कला दिखाने का मिलेगा मौका
27 फरवरी को युवाओं के लिए “बैटल ऑफ बैंड” और “कानपुर’स गॉट टैलेंट” जैसे मंच तैयार किए गए हैं, जहां स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी कला दिखाने का अवसर मिलेगा। शाम को श्री राम कला केंद्र द्वारा कर्ण आधारित नाट्य प्रस्तुति और रात्रि में कवि सम्मेलन का आयोजन होगा, जिसमें हास्य, व्यंग्य और ओजपूर्ण काव्य से वातावरण गुंजायमान रहेगा।
लोक और शास्त्रीय परंपराओं का मिलेगा संगम
28 फरवरी को लोक और शास्त्रीय परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। प्रयागराज सांस्कृतिक केंद्र द्वारा बुंदेलखंड का पाई डंडा, ब्रज की होली, राजस्थानी मांगणियार गायन, पंजाब का गतका और उड़ीसा का गोतिपुआ मंचित किया जाएगा। संध्या में पत्थर घाट पर गंगा आरती और उसके बाद गोपाल एम. तिवारी का संगीत समारोह महोत्सव का भव्य समापन करेगा।
व्यापक मंच देने का है सशक्त प्रयास
मेला अधिकारी की माने तो तीन दिवसीय यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि बिठूर की ऐतिहासिक पहचान, पर्यटन संभावनाओं और स्थानीय कलाकारों को व्यापक मंच देने का सशक्त प्रयास भी है। बड़ी संख्या में दर्शकों के आगमन की संभावना को देखते हुए तैयारियां अंतिम चरण में हैं। बिठूर एक बार फिर कला, संस्कृति और संगीत के उत्सव का साक्षी बनने जा रहा है।


