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Kasganj News: कासगंज गौशाला में बदहाल हालात, 11 गौवंश मृत मिले
Kasganj News: सपा सांसद देवेश शाक्य के औचक निरीक्षण में पचलाना गौशाला की बदहाली उजागर, कई गौवंश बीमार व अधमरे मिले, लापरवाही पर कार्रवाई की मांग।
कासगंज गौशाला में बदहाल हालात, 11 गौवंश मृत मिले (Photo- Newstrack)
Kasganj News: उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के पचलाना गांव स्थित गौशाला में भारी अव्यवस्थाओं का मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक लापरवाही और पशु संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। समाजवादी पार्टी के एटा-कासगंज सांसद देवेश शाक्य ने शिकायतों के आधार पर इस गौशाला का औचक निरीक्षण किया, जहां की स्थिति बेहद दयनीय पाई गई।
निरीक्षण के दौरान सांसद ने 11 गौवंशों को मृत अवस्था में पाया, जबकि कई अन्य गौवंश गंभीर रूप से बीमार और मरणासन्न हालत में पड़े थे। कुछ घायल गौवंश जमीन पर तड़पते नजर आए, वहीं एक गाय दलदल में फंसी हुई जिंदा पाई गई, जिसे समय पर बाहर नहीं निकाला गया था। यह दृश्य न केवल दर्दनाक था, बल्कि पशु देखभाल में घोर लापरवाही को भी उजागर करता है।
स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मृत गौवंशों को पक्षी नोच-नोचकर खा रहे थे। कई मामलों में पक्षियों ने गौवंशों की आंखें तक निकाल ली थीं, जो कि बेहद अमानवीय और चिंताजनक तस्वीर पेश करता है। सांसद देवेश शाक्य ने इस दृश्य को देखकर गहरा दुख जताया और इसे संवेदनहीनता का उदाहरण बताया।
व्यवस्थाओं की पोल खुली
सांसद के अनुसार गौशाला में न तो पर्याप्त मात्रा में भूसा उपलब्ध था और न ही गौवंशों के लिए छांव की समुचित व्यवस्था की गई थी। कर्मचारियों की अनुपस्थिति और नियमित देखभाल के अभाव में यह स्थिति उत्पन्न हुई है। गौवंशों के लिए जरूरी चिकित्सा सुविधाएं भी नदारद पाई गईं, जिससे उनकी हालत और खराब हो गई।
कार्रवाई की मांग
देवेश शाक्य ने मौके पर ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस गंभीर मामले में तुरंत कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार कर्मचारियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। साथ ही, गौशाला में तत्काल संसाधनों की व्यवस्था की जाए, जिसमें पर्याप्त चारा, स्वच्छ पानी, छांव और पशु चिकित्सकों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों में आक्रोश
स्थानीय ग्रामीणों ने भी गौशाला की बदहाल स्थिति पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि लंबे समय से यहां प्रबंधन की लापरवाही जारी है, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों ने प्रशासन से नियमित निगरानी और सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है।
आगे की चेतावनी
सांसद ने बताया कि उन्होंने जिला प्रशासन से संपर्क कर तत्काल सुधार की मांग की है। यदि जल्द ही हालात नहीं सुधरे, तो वह इस मुद्दे को राज्य स्तर पर उठाएंगे। यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि गौशालाओं के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना कितना आवश्यक है।


