Kaushambi News: कौशाम्बी के थानों में ‘कारखास’ संस्कृति हावी, कानून व्यवस्था पर सवाल

Kaushambi News: जनपद के कई थानों में कारखासों का बढ़ता दखल चर्चा में है। अवैध वसूली, अवैध कारोबारियों से साठगांठ और घटनाओं को नजरअंदाज करने के आरोपों के बीच पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

Ansh mishra Mishra
Published on: 10 March 2026 6:46 PM IST
Karkhas culture dominates in Kaushambi police stations, questions over law and order
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 कौशाम्बी के थानों में ‘कारखास’ संस्कृति हावी, कानून व्यवस्था पर सवाल (Photo- Social Media)

Kaushambi News: कौशाम्बी। पुलिस विभाग में सबसे कमजोर कड़ी के रूप में थानों पर इंचार्ज की कृपा से तैनात किए जाने वाले कारखासों की वजह से आज भी कानून व्यवस्था कटघरे में खड़ी है। हालत यह कि शायद ही कोई थाना ऐसा हो जहां इनकी मौजूदगी मजबूती से न हो। कागज मे कहीं न दिखने वाला यह पद थाना प्रभारी के कृपा से अपने बेहद खास सिपाही को दिया जाता है। जनपद के थानो मे इन दिनों थाना प्रभारी घटनाओं को नज़रअंदाज़ कर थाने पर कारखासों का ओहदा बढ़ाने मे जुटे हुए हैं।

जनपद मे एक ऐसा भी थाना है जहाँ इस समय कारखासों की बाढ़ देखी जा सकती है, और वहाँ के प्रभारी हत्या जैसी घटनाओं का महीनों बीत जाने के बाद भी खुलासा करने मे नाकाम साबित हो रहे हैं। कार्यखास थाने पर किसी रोल मॉडल से कम नहीं होते हैं। थानेदार के अति करीबी माने जाते हैं तो विभागीय अधिकारियों के साथ भी राजनीतिक लोगों से सेटिंग करने में इन्हें महारत हासिल होती है। थानों को व्यवस्थित चलाने में इन 'कारखासों' की अहम भूमिका होती है। इनका आदेश इंचार्ज के आदेश की तरह होता है।

इंचार्ज के पास कोई बड़ी समस्या जाने से पहले कारखास के पास से ही होकर गुजरती है। इंचार्ज को किससे कब मिलना है, इसकी भी सेटिंग वही करते हैं। थानो पर हालत यह होती है कि इंचार्ज बिना 'कारखास' के एक कदम भी नहीं चल पाते। वह थाना क्षेत्र के अपराधियों से लेकर जनप्रतिनिधियों के संपर्क में रहते हैं। यहां तक कि इंचार्ज के व्यक्तिगत काम भी उन्हीं के जिम्मे रहता है। सुबह 'साहब' के उठने से पहले 'कारखास' उनके आवास पर पहुंच जाते हैं। फिर क्या करना है और कब किससे मिलना है, कौन मिलने आ रहा और क्षेत्र में कहां क्या घटित हुआ आदि की पूरी जानकारी देते हैं।

यहां तक कि थाने में तैनात अन्य सिपाही भी अपनी समस्या इंचार्ज से कहने के बजाय 'कारखास' से ही बताते हैं। वह इसकी जानकारी इंचार्ज को देते हुए निस्तारण कराकर उन पर अपना प्रभाव छोड़ते हैं। इससे सिपाही भी इसका विरोध नहीं कर पाते। यह थाने के अंदर व बाहर दोनों साइड पर अपना नियंत्रण रखते हैं। क्षेत्र की अधिकांश घटनाओं को मैनेज कराने में इनकी अच्छी भूमिका रहती है।

अपराध को बढ़ावा देने में 'कारखास' का अहम रोल....

थाना क्षेत्र में अपराध को बढ़ावा देने में भी 'कारखास' का अहम रोल माना जाता है। थाना क्षेत्र मे अवैध बालू का भंडारण, ओवरलोड गाड़ियों को पास कराना, जुआ, सट्टा के अड्डे चलवाने के साथ ही नशा विक्रेताओं, खनन माफियाओं, अवैध कारोबारियों से इनकी साठगांठ तगड़ी रहती है। अधिकांश समय यह सादे ड्रेस में रहते हैं। किसी बड़े अधिकारी के आने पर ही ये वर्दी धारण करते हैं। अवैध रूप से मिलने वाले धन के कारण इंचार्ज इनके इशारे पर नाचने लगते हैं।

जनपद मे ऐसे भी थाने हैं जहाँ' कारखासों ने अपना प्राइवेट कारखास रखा है,जो क्षेत्र से वसूली कर इनकी जेब मे पहुंचाता है। कारखास से थाने पर तैनात सिपाही भी पंगा लेने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं। ऐसे में कहे तो इनकी भूमिका चूल्हे से लेकर चौकी तक होती है, जिससे आज अपराध से लेकर कानून व्यवस्था तक लड़खड़ाते ही चल रहा है। थानो में तैनात कारखासों के माध्यम से ही क्षेत्र मे हो रहे अवैध कारोबार का सुविधा शुल्क प्रभारी के जेब तक पहुँचता है..।

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