Kushinagar News: हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पर कुशीनगर के प्रो. सुनील मिश्र ने बिखेरी शोध की चमक

Kushinagar News: हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कोलकाता में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में कुशीनगर के प्रो. सुनील कुमार मिश्र ने ‘दस्तावेज पत्रिका का साहित्यिक योगदान’ विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत किया।

Mohan Suryavanshi
Published on: 2 Jun 2026 5:12 PM IST
Kushinagar News: हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पर कुशीनगर के प्रो. सुनील मिश्र ने बिखेरी शोध की चमक
X

Kushinagar News

Kushinagar News: हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर कोलकाता में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में शिक्षाविद् प्रो. सुनील कुमार मिश्र ने शोधपत्र प्रस्तुत कर जनपद का गौरव बढ़ाया। उनकी शोधपरक एवं प्रभावशाली प्रस्तुति को देश-विदेश से आए विद्वानों और शोधार्थियों ने सराहा।

सेखुई मिश्र गांव निवासी एवं वर्तमान में गुजरात में प्रोफेसर पद पर कार्यरत प्रो. सुनील कुमार मिश्र ने संगोष्ठी में ‘दस्तावेज पत्रिका का साहित्यिक योगदान’ विषय पर अपना शोध आलेख प्रस्तुत किया। दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 29 और 30 मई को भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद तथा कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। इसमें देश-विदेश के प्रतिष्ठित विद्वानों, शोधार्थियों और हिंदी साहित्य के अध्येताओं ने भाग लिया।अपने शोधपत्र में प्रो. मिश्र ने हिंदी साहित्य और आलोचना की चर्चित पत्रिका ‘दस्तावेज’ के साहित्यिक अवदान, उसकी वैचारिक भूमिका तथा हिंदी जगत में उसके योगदान का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया।

उन्होंने बताया कि वरिष्ठ साहित्यकार एवं पद्मश्री सम्मानित विश्वनाथ प्रसाद तिवारी के संपादन में गोरखपुर से प्रकाशित होने वाली यह पत्रिका हिंदी साहित्य की गंभीर और महत्वपूर्ण पत्रिकाओं में प्रमुख स्थान रखती है।संगोष्ठी में उपस्थित विद्वानों ने प्रो. मिश्र की प्रस्तुति को तथ्यपूर्ण, शोधपरक और प्रभावशाली बताते हुए इसकी सराहना की। उनकी इस उपलब्धि पर कुशीनगर सहित पूरे पूर्वांचल में हर्ष का माहौल है। क्षेत्र के साहित्यप्रेमियों, शिक्षकों और बुद्धिजीवियों ने इसे जनपद के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं।हिंदी पत्रकारिता के द्विशताब्दी वर्ष में प्रो. सुनील कुमार मिश्र की यह अकादमिक उपलब्धि न केवल कुशीनगर बल्कि पूरे हिंदी भाषी समाज के लिए भी गर्व का विषय बन गई है।


Mohan Suryavanshi
ABOUT THE AUTHOR

Mohan Suryavanshi

Next Story