Kushinagar News: यूरिया की किल्लत से किसान परेशान, प्राइवेट दुकानों पर मनमाने दाम पर बिक्री का आरोप

Kushinagar News: कुशीनगर में यूरिया की कमी से किसान परेशान हैं। समितियों पर लंबी कतारें लग रही हैं, जबकि प्राइवेट दुकानों पर मनमाने दामों पर बिक्री के आरोप लग रहे हैं।

Mohan Suryavanshi
Published on: 1 Jun 2026 8:47 AM IST
Urea crisis deepens in Kushinagar, farmers in Qatar for fertilizer
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कुशीनगर में यूरिया संकट गहराया, खाद के लिए कतारों में किसान (Photo- Newstrack)

Kushinagar News: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद में यूरिया खाद की भारी किल्लत ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। सहकारी समितियों पर यूरिया की सीमित आपूर्ति के कारण किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि जहां भी यूरिया आने की सूचना मिलती है, वहां खाद पहुंचने से पहले ही किसानों की लंबी कतारें लग जाती हैं। किसानों का आरोप है कि कई स्थानों पर प्राइवेट दुकानों में यूरिया मनमाने और मुंहमांगे दामों पर बेची जा रही है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

सुबह से ही समितियों पर लग रही लंबी कतारें

यहां सोमवार को मोरवन साधन सहकारी समिति पर यूरिया आने की सूचना मिलते ही भोर से ही किसानों की भारी भीड़ जुट गई। खाद लेने के लिए किसानों की लंबी कतारें लग गईं और कई किसान सुबह से अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। समितियों पर उपलब्ध यूरिया की मात्रा किसानों की मांग के मुकाबले बेहद कम होने के कारण बड़ी संख्या में किसान खाली हाथ लौटने को मजबूर हो रहे हैं।

गन्ना और धान की फसल पर संकट के बादल

वहीं किसानों का कहना है कि समय पर हुई बारिश के बाद गन्ने की फसल में यूरिया डालने का यह सबसे अहम समय है। ऐसे में खाद की अनुपलब्धता से फसल की बढ़वार प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है। कुशीनगर गन्ना बहुल क्षेत्र होने के कारण यहां बड़ी संख्या में किसान गन्ने की खेती करते हैं और फसल की बेहतर पैदावार के लिए समय पर यूरिया का मिलना बेहद जरूरी माना जाता है। वहीं धान की रोपाई का मौसम भी शुरू हो चुका है, ऐसे में धान की नर्सरी और रोपित फसल के लिए भी यूरिया की जरूरत बढ़ गई है।

पारंपरिक खाद की मांग

दरअसल सरकार की ओर से नैनो यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन अधिकांश किसान अभी भी दानेदार यूरिया पर ही भरोसा जता रहे हैं। किसानों का कहना है कि नैनो यूरिया के परिणामों को लेकर उनके बीच पूरी तरह विश्वास नहीं बन पाया है, इसलिए वे पारंपरिक यूरिया की मांग कर रहे हैं।

सचिव का बयान और प्रशासन से मांग

रामकोला क्षेत्र के मोरवन समिति पर तैनात सचिव पारस सिंह ने बताया कि क्षेत्र में यूरिया की मांग काफी अधिक है जबकि आपूर्ति अपेक्षाकृत कम है, इसी वजह से समितियों पर भीड़ बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे यूरिया की खेप उपलब्ध होगी, उसे किसानों को वितरित किया जाएगा।

वहीं किसानों ने प्रशासन और कृषि विभाग से मांग की है कि समितियों पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध कराई जाए, ताकि गन्ना और धान जैसी प्रमुख फसलों की खेती प्रभावित न हो और किसानों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

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