फर्जी IAS बनकर 80 करोड़ की ठगी करने वाला मास्टरमाइंड गिरफ्तार, 6 साल से पुलिस को दे रहा था चकमा

Lucknow News: लखनऊ में 6 साल से फरार फर्जी IAS अधिकारी डॉ. विवेक मिश्रा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने सरकारी नौकरी का झांसा देकर 150 से ज्यादा लोगों से करीब 80 करोड़ रुपये की ठगी की थी। सीबीसीआईडी अब इस बड़े घोटाले की गहराई से जांच कर रही है।

Hemendra Tripathi
Published on: 17 Oct 2025 10:15 AM IST
फर्जी IAS बनकर 80 करोड़ की ठगी करने वाला मास्टरमाइंड गिरफ्तार, 6 साल से पुलिस को दे रहा था चकमा
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Lucknow News: लखनऊ में 6 साल से फरार चल रहा फर्जी IAS आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ गया। गुजरात कैडर का IAS अफसर बताने वाला आरोपी डॉ. विवेक मिश्रा सरकारी नौकरी का झांसा देता था। काफी खोजबीन के बाद सीबीसीआईडी और चिनहट पुलिस ने कमता बस स्टेशन के पास से गिरफ्तार कर लिया। विवेक मिश्रा ने 150 से ज्यादा लोगों से लगभग 80 करोड़ रुपये की ठगी की थी। वह न सिर्फ फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करता था, बल्कि सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए लड़कियों को झांसे में लेकर भी अपने ठगी नेटवर्क को फैलाता था। आपको बता दें कि पुलिस को उसकी तलाश साल 2019 से थी।

फर्जी IAS बनकर युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा

डॉ. विवेक मिश्रा पुत्र जे. मिश्रा, निवासी शिवपुरी कॉलोनी, बोकारो (झारखंड), खुद को गुजरात कैडर का IAS अफसर बताकर बेरोजगार युवाओं को ठगता था। उसकी मेल आईडी ([email protected]) के जरिए वह खुद को 2014 बैच का अधिकारी बताता था। वह दावा करता था कि वह गुजरात सरकार में प्रधान सचिव के पद पर तैनात है, और उसकी बहनें 'आईजी रैंक की आईपीएस अधिकारी' हैं। इन झूठे दावों से विश्वास जीतकर वह युवाओं से लाखों रुपये में सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाता था। उसने खुद को सरकारी नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा बताया और कई लोगों से लाखों रुपये वसूल लिए।

सोशल मीडिया पर बनाता था फर्जी पहचान

जांच में सामने आया कि विवेक मिश्रा सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर पहले युवतियों से दोस्ती करता था। कुछ दिनों में वह शादी का प्रस्ताव रखता और परिवारों को अपने 'आईएएस परिवार' का हवाला देकर प्रभावित करता। रिश्तों में भरोसा जीतने के बाद वह लोगों को सरकारी नौकरी के प्रस्ताव देता और रकम वसूलता। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ. आशुतोष मिश्रा, जो इस मामले के वादी हैं, ने बताया कि विवेक ने उन्हें भी फर्जी नियुक्ति पत्र देकर ठगने की कोशिश की थी। अप्रैल 2019 में उसने उन्हें गुजरात गृह मंत्रालय के तहत डिप्टी एसपी पद का जॉब लेटर दिया, जो जांच में फर्जी निकला।

6 साल की तलाश के बाद गिरफ्तारी, CID कर रही ठगी की गहराई से जांच

2019 में चिनहट थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद से आरोपी फरार था। आर्थिक अपराध संगठन (EOW) और बाद में सीबीसीआईडी (CID) ने मामले की जांच संभाली। विवेचक रमेश चंद्र तिवारी के नेतृत्व में टीम ने विवेक मिश्रा को कमता बस स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी ने कई राज्यों में ठगी का नेटवर्क फैला रखा था। सीबीसीआईडी अब यह जांच कर रही है कि 80 करोड़ की यह रकम कहां और किन लोगों के पास पहुंचाई गई।

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Hemendra Tripathi is a former Reporter at Newstrack.com.

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