TRENDING TAGS :
मजारों पर बुलडोजर एक्शन! KGMU से उखाड़ फेंकने का फरमान जारी, 15 दिन में खाली करने का अल्टीमेटम
KGMU llegal Mazar Remova: केजीएमयू प्रशासन ने कैंपस के भीतर मौजूद अवैध मजारों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए नोटिस चस्पा कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि ये मजारें न केवल नियमों के खिलाफ हैं, बल्कि यूनिवर्सिटी की साफ-सफाई और मरीजों के आने-जाने वाले रास्तों में बड़ा रोड़ा बन रही हैं।
KGMU llegal Mazar Remova: प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ है। चिकित्सा के क्षेत्र में देश का गौरव माने जाने वाले किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के गलियारों में ऐसा होने जा रहा है, जिसकी चर्चा पूरे शहर में आग की तरह फैल गई है। कैंपस की सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने ऐसा कदम उठाया है जिसने हर तरफ हलचल पैदा कर दी है। क्या आप सोच सकते हैं कि एक मेडिकल कॉलेज, जहां लोग जीवन की आस लेकर आते हैं, वहां बुलडोजर और कानूनी नोटिसों की गूंज सुनाई देगी?
अवैध मजारों पर चस्पा नोटिस
केजीएमयू प्रशासन ने कैंपस के भीतर मौजूद अवैध मजारों के खिलाफ अपनी तलवार खींच ली है। कई सालों से पैर पसारे हुए अवैध कब्जों पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए नोटिस चस्पा कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि ये मजारें न केवल नियमों के खिलाफ हैं, बल्कि यूनिवर्सिटी की साफ-सफाई और मरीजों के आने-जाने वाले रास्तों में बड़ा रोड़ा बन रही हैं। केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने दो-टूक शब्दों में साफ कर दिया है कि इन मजारों को हटाने के लिए मात्र 15 दिन का समय दिया गया है। इन्हें 15 दिनों के भीतर खुद नहीं हटाया गया, तो प्रशासन पुलिस बल के साथ मिलकर खुद ध्वस्त कर देगा। इस ध्वस्तीकरण में होने वाले खर्चे की वसूली मजारों के जिम्मेदार से होगी।
विवादों का केंद्र बना केजीएमयू
वैसे तो यह कार्रवाई अतिक्रमण के खिलाफ दिख रही है, लेकिन इसके पीछे की टाइमिंग को लेकर कई तरह की चर्चाएं गर्म हैं। पिछले कुछ समय से केजीएमयू लगातार विवादों के घेरे में रहा है। कैंपस के भीतर अनुशासन और सुरक्षा पर सवाल तब उठे थे, जब बंगाल की रहने वाली एक एमबीबीएस छात्रा ने डॉक्टर रमीज पर गंभीर आरोप लगाए थे। छात्रा का दावा था कि डॉक्टर रमीज ने उसे शादी का झांसा देकर न केवल उसका शारीरिक शोषण किया, बल्कि उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव भी बनाया। इस 'लव जिहाद' वाले मामले ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया था। घटना के बाद कैंपस के बाहर कई बार प्रदर्शन हुए। वहीं आरोपी डॉक्टर रमीज को जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा।
क्या कैंपस में बदलेगी व्यवस्था?
इस दौरान जांच में कई अन्य भी खुलासे हुए थे। इन मजारों के जिम्मेदारों पर लोगों को गुमराह करने के आरोप लगे थे। रेप और धर्म परिवर्तन के सनसनीखेज मामले के बाद केजीएमयू प्रशासन की साख पर जो दाग लगे थे, उसे धोने के लिए अब कैंपस को पूरी तरह 'क्लीन' करने की मुहिम शुरू हो गई है। लोगों का मानना है कि अवैध निर्माणों और मजारों को हटाकर प्रशासन यह संदेश देना चाहता है कि यहां नियमों से ऊपर कोई नहीं है। अब देखना होगा कि 15 दिन के अल्टीमेटम के बाद क्या मजारों के जिम्मेदार खुद पीछे हटेंगे या फिर लखनऊ में एक बार फिर पुलिस और प्रशासन का बड़ा एक्शन देखने को मिलेगा। जो भी हो, केजीएमयू के फैसले ने पूरे यूपी में एक नई बहस छेड़ दी है।


