Lucknow News: निजीकरण के विरोध में संविदा चालक-परिचालकों का प्रदर्शन, पुलिस ने हिरासत में लेकर इको गार्डेन भेजा

Lucknow News: लखनऊ में दुबग्गा डिपो के संविदा चालक-परिचालकों ने निजीकरण के विरोध और विभिन्न मांगों को लेकर गांधी प्रतिमा, हजरतगंज पर प्रदर्शन किया। पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर इको गार्डेन भेज दिया।

ashutosh
Published on: 3 Jun 2026 4:55 PM IST (Updated on: 3 Jun 2026 4:55 PM IST)
Lucknow Protest
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Lucknow Protest (Image Credit-Newstrack)

लखनऊ: दुबग्गा डिपो के संविदा चालक और परिचालकों ने बुधवार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर गांधी प्रतिमा, हजरतगंज पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और परिवहन विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि उनकी समस्याओं पर लगातार अनदेखी की जा रही है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर इको गार्डेन भेज दिया।

प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों का कहना था कि उन्हें एक निजी कंपनी के अधीन करने की प्रक्रिया चल रही है, जिसका वे लगातार विरोध कर रहे हैं।


कर्मचारियों के अनुसार, सिटी बस सेवा में कार्यरत सैकड़ों संविदा परिचालक और चालक इस निर्णय से असंतुष्ट हैं और पिछले कई दिनों से कार्य बहिष्कार कर रहे हैं। इसके चलते शहर के कई प्रमुख रूटों पर बस संचालन प्रभावित हुआ है, जिससे यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


प्रदर्शनकारी सुनील ने बताया कि संविदा कर्मियों की नियुक्ति परिवहन निगम के तहत हुई थी, इसलिए उन्हें किसी निजी कंपनी के अधीन किए जाने का कोई औचित्य नहीं है। उनका कहना है कि अधिकांश कर्मचारी निजी कंपनी के साथ काम करने के पक्ष में नहीं हैं और इस फैसले से उनके रोजगार तथा अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।


वहीं महेंद्र ने कहा कि संविदा कर्मचारियों को पहले से ही सीमित वेतन और सुविधाओं के साथ काम करना पड़ रहा है। ऐसे में निजी व्यवस्था लागू होने से कर्मचारियों के शोषण की आशंका और बढ़ जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।


प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाने वाले कई कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने गिरफ्तार साथियों की रिहाई और दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की।


कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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