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Lucknow News: कॉलेज आगरा बना नवजातों का जीवनदाता, अन्य राज्यों के बच्चों को भी मिल रहा नया जीवन
Lucknow News: आगरा का एसएन मेडिकल कॉलेज आधुनिक SNCU और CPAP तकनीक से यूपी, राजस्थान और मध्य प्रदेश के नवजातों को नया जीवन दे रहा है। हर साल 200 से अधिक बच्चों का सफल इलाज।
Lucknow News(Photo-Social Media)
Lucknow News: आधुनिक सुविधाओं से लैस आगरा का सरोजनी नायडू (एसएन) मेडिकल कॉलेज अब केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश और राजस्थान के नवजात शिशुओं के लिए भी जीवनदाता साबित हो रहा है। यहां उपलब्ध उन्नत चिकित्सा सुविधाओं और प्रशिक्षित चिकित्सा टीम की बदौलत हर साल सैकड़ों नवजातों को नया जीवन मिल रहा है।
आधुनिक तकनीक से हो रहा सफल उपचार
योगी सरकार द्वारा प्रदेश में नवजात मृत्यु दर (IMR) को कम करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। इसी क्रम में सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU), न्यूबॉर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट (NBSU) और सी-पैप (CPAP) मशीनों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। इन सुविधाओं के कारण न केवल प्रदेश में नवजात मृत्यु दर में कमी आई है, बल्कि अन्य राज्यों के गंभीर रूप से बीमार बच्चों को भी जीवनदान मिल रहा है।
हर साल करीब 200 नवजातों को मिल रहा नया जीवन
एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा इसका एक प्रमुख उदाहरण है। यहां हर वर्ष मध्य प्रदेश और राजस्थान से आने वाले लगभग 200 नवजात शिशुओं का सफल इलाज किया जाता है। एसएनसीयू के नोडल अधिकारी प्रो. नीरज यादव के अनुसार, उत्तर प्रदेश के अलावा इन दोनों राज्यों के करीब एक दर्जन जिलों से मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं।
मरीजों का विश्वास बना आधार
राजस्थान के धौलपुर की रहने वाली 27 वर्षीय सुमन का अनुभव इस भरोसे को और मजबूत करता है। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र के कई बच्चों को एसएन मेडिकल कॉलेज में नया जीवन मिला है। इसी विश्वास के चलते जब उनके नवजात बच्चे की तबीयत जन्म के छठे दिन बिगड़ी, तो वे तुरंत आगरा पहुंचीं। 18 अप्रैल को भर्ती हुए बच्चे को संक्रमण और सांस लेने में दिक्कत थी, जिसके बाद उसे सी-पैप सपोर्ट पर रखा गया। कुछ दिनों में बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हो गया और घर लौट गया। सुमन के अनुसार, यह अस्पताल उनके लिए वरदान साबित हुआ।
विशेषज्ञों की देखरेख में इलाज
प्रो. नीरज यादव बताते हैं कि राजस्थान के भरतपुर, धौलपुर और मध्य प्रदेश के भिंड व मुरैना जैसे क्षेत्रों से बड़ी संख्या में बच्चे यहां आते हैं। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में हर साल लगभग 1800 मरीज भर्ती होते हैं, जिनमें से करीब 1 प्रतिशत (लगभग 200) मरीज अन्य राज्यों के होते हैं। इनमें 25 प्रतिशत प्री-मैच्योर बच्चे होते हैं, जबकि 800 से 1000 ग्राम वजन वाले गंभीर नवजात भी स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं।
सी-पैप मशीन बनी जीवनरक्षक
एसएनसीयू में स्थापित सी-पैप मशीनें अत्याधुनिक और किफायती तकनीक से लैस हैं। इनका उपयोग नवजातों को सांस लेने में सहायता देने के लिए किया जाता है। यह मशीन नाक के माध्यम से ऑक्सीजन और हवा को संतुलित अनुपात में फेफड़ों तक पहुंचाती है, जिससे बच्चे को आसानी से सांस लेने में मदद मिलती है। वेंटिलेटर की तुलना में सी-पैप के दुष्प्रभाव कम होते हैं और इसके उपयोग से कंगारू मदर केयर (KMC) भी जल्दी शुरू की जा सकती है।
स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार
मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता के अनुसार, एसएनसीयू में केवल आगरा ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और अन्य राज्यों से भी मरीज आते हैं। उनकी टीम लगातार नवजातों की जान बचाने में जुटी हुई है। राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वे (NFHS-5) के अनुसार, उत्तर प्रदेश में प्रति 1000 नवजातों में से 28 की मृत्यु विभिन्न कारणों से हो जाती है। इस दर को कम करने के लिए प्रदेश में वर्तमान में 48 एसएनसीयू सक्रिय हैं। इन इकाइयों में स्थापित सी-पैप मशीनें नवजातों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के महाप्रबंधक डॉ. मिलिंद वर्धन के अनुसार, नवजातों में सांस संबंधी समस्याएं मृत्यु का एक प्रमुख कारण हैं, और ऐसे में सी-पैप तकनीक एक गेम-चेंजर के रूप में उभर रही है। वहीं, मिशन की निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल ने बताया कि पहले चरण में 48 एसएनसीयू के लिए 350 डॉक्टरों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया है। दूसरे चरण में शेष 72 इकाइयों में प्रशिक्षण और संसाधनों का विस्तार किया जाएगा। इस प्रकार, उत्तर प्रदेश की सुदृढ़ होती स्वास्थ्य सेवाएं न केवल राज्य बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए आशा की किरण बनती जा रही हैं।


