TRENDING TAGS :
UP Politics: अखिलेश ने कांग्रेस के लिए बनाया 'प्लान 75'! UP चुनाव 2027 में होगा बड़ा खेला, 403 सीटों पर तैयारी तेज
UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग का सस्पेंस गहरा गया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 'प्लान 75' के तहत कांग्रेस को अधिकतम 75 सीटें देने की रणनीति बनाई है, जबकि कांग्रेस 120 सीटों की मांग पर अड़ी है।
UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां अभी से बेहद तेज हो गई हैं। देश के इस सबसे बड़े राज्य में अगले साल फरवरी के महीने में चुनाव होने निर्धारित हैं, लेकिन राजनीतिक दलों के बीच सीटों के तालमेल और नए गठबंधनों को लेकर पर्दे के पीछे की चर्चाएं अभी से शुरू हो चुकी हैं। इस समय पूरे देश और प्रदेश की नजरें विपक्षी दलों के बड़े गठबंधन 'इंडिया' ब्लॉक में शामिल समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस की जोड़ी पर टिकी हुई हैं।
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में इन दोनों दलों के आपसी गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए सबको पूरी तरह चौंका दिया था। उस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 37 और कांग्रेस ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जिससे दोनों ने मिलकर राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 43 सीटें अपने नाम कर ली थीं। इसी शानदार प्रदर्शन के चलते केंद्र में सत्ताधारी भाजपा बहुमत के आंकड़े से दूर रह गई थी। अब राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह तैर रहा है कि क्या आगामी विधानसभा चुनाव में भी यह गठबंधन इसी मजबूती के साथ बरकरार रहेगा।
गठबंधन के बीच मायावती से मुलाकात
उत्तर प्रदेश के इस चुनावी माहौल में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच के रिश्तों को लेकर कई तरह की अंदरूनी खबरें और अटकलें सामने आ रही हैं। पिछले महीने जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी उत्तर प्रदेश के एक राजनीतिक कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे, ठीक उसी समय कांग्रेस पार्टी के दो बड़े दलित नेता, राजेंद्र पाल गौतम और तनुज पुनिया, अचानक बिना किसी पूर्व सूचना या आधिकारिक घोषणा के बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती से मिलने उनके आवास पर पहुंच गए। हालांकि, बसपा सुप्रीमो मायावती ने इन दोनों कांग्रेस नेताओं से मिलने से साफ इनकार कर दिया। इस घटना के तुरंत बाद कांग्रेस आलाकमान ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपने इन दोनों नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। कांग्रेस की तरफ से स्पष्ट किया गया कि पार्टी ने आधिकारिक तौर पर किसी भी नेता को मायावती के पास बातचीत के लिए नहीं भेजा था।
इस अचानक हुए घटनाक्रम के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक सार्वजनिक मंच पर कांग्रेस के साथ गठबंधन के भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर बहुत ही नपा-तुला बयान दिया। उन्होंने कहा कि वे भविष्य में केवल चुनाव जीतने के उद्देश्य से ही किसी दल के साथ गठबंधन करेंगे, साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें गठबंधन की राजनीति को सही ढंग से चलाना बहुत अच्छी तरह आता है। अखिलेश यादव के इस बयान के तुरंत बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तारीख अनवर ने मीडिया के सामने आकर स्थिति को संभालने की कोशिश की और स्पष्ट किया कि कांग्रेस का समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन तोड़ने का दूर-दूर तक कोई इरादा या सवाल ही नहीं उठता।
अखिलेश यादव का कांग्रेस के लिए 'प्लान 75'
समाजवादी पार्टी के बेहद करीबी और अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आगामी चुनाव में कांग्रेस पार्टी को साधने के लिए एक विशेष रणनीति तैयार की है, जिसे 'प्लान 75' का नाम दिया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के जिला और ब्लॉक स्तर के संगठनकर्ताओं से साफ तौर पर कहा है कि वे उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक-एक ऐसी विधानसभा सीट की सूची तैयार करें, जो गठबंधन के तहत आसानी से कांग्रेस पार्टी के खाते में दी जा सके। इस रणनीति से यह साफ संकेत मिलता है कि अखिलेश यादव इस बार के चुनाव में कांग्रेस को अधिकतम 75 सीटें देने का मन बना चुके हैं। दूसरी तरफ, कांग्रेस कार्य समिति ने भी उत्तर प्रदेश में संगठन का काम देख रहे अपने बड़े नेताओं को उन सीटों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया है, जिन पर समाजवादी पार्टी के सामने मजबूती से मोलभाव किया जा सके।
2017 की गलतियों से सबक और सीटों की खींचतान
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समाजवादी पार्टी इस बार साल 2017 के विधानसभा चुनाव जैसी उदारता दिखाने के मूड में बिल्कुल भी नहीं है। साल 2017 के चुनाव में सपा ने गठबंधन के तहत कांग्रेस को कुल 105 सीटें दे दी थीं, और उस समय 9 ऐसी सीटें भी थीं जहां दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों के बीच आपस में ही दोस्ताना मुकाबला हुआ था। उस चुनाव में कांग्रेस को महज सात सीटों पर ही जीत नसीब हुई थी और उसका कुल वोट बैंक केवल 6.2 प्रतिशत के आसपास सिमट गया था। सूत्रों की मानें तो अखिलेश यादव इस बार दोस्ताना मुकाबले जैसी किसी भी भ्रम की स्थिति को पैदा नहीं होने देना चाहते हैं और वे चाहते हैं कि चुनाव की तारीखों के एलान से बहुत पहले ही सीट बंटवारे का काम शांति से पूरा हो जाए। इसके विपरीत, उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नेता आगामी चुनाव में समाजवादी पार्टी के सामने कम से कम 120 सीटों की मांग रखने की बड़ी तैयारी कर रहे हैं।
अकेले चुनाव लड़ने के लिए भी तैयार रहने का निर्देश
सीटों के इस बड़े अंतर को देखते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के सभी विधायकों, पूर्व विधायकों और जमीनी नेताओं को पूरी तरह से सतर्क रहने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि भविष्य में सीटों के तालमेल को लेकर कांग्रेस के साथ सहमति नहीं बन पाती है, तो समाजवादी पार्टी को उस स्थिति का सामना करने के लिए भी पूरी तरह तैयार रहना चाहिए। इसी वजह से उन्होंने संगठन को राज्य की सभी 403 विधानसभा सीटों पर जमीनी स्तर की तैयारियां पूरी रखने की हिदायत दी है। हालांकि, यह पूरी तरह तय माना जा रहा है कि अखिलेश यादव ने मन बना लिया है कि वे राहुल गांधी की कांग्रेस को 60 से लेकर अधिकतम 75 सीटें ही ऑफर करेंगे। अब आने वाले समय में जब दोनों ही राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं के बीच औपचारिक बैठकों का दौर शुरू होगा, तभी उत्तर प्रदेश की इस बड़ी चुनावी बिसात और सीट शेयरिंग की असल तस्वीर पूरी तरह साफ हो पाएगी।


