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UP High-Rise Buildings: 42 मंजिल तक की इमारतें, सुरक्षा सिर्फ 14 मंजिल तक
UP High-Rise Buildings: यूपी में लगातार हाईराइज इमारतें बन रही हैं, 42 मंजिल तक की बिल्डिंग शामिल हैं, लेकिन अग्निशमन विभाग की बाहरी पहुंच अभी सिर्फ 14 मंजिल तक सीमित है। ये सुरक्षा पर बड़ा सवाल है
High Rise Buildings Fire Security (Social Media).
Multi-Storey Building Security: दिल्ली में होटल में हुए अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश की बहुंखंडीय बिल्डिंगों और होटलों का अग्निशमन आडिट कराने के आदेश बेशक दे दिये हैं, लेकिन असली सवाल ये हैं कि उत्तर प्रदेश में दस फ्लोर से अधिक की हाई राइज बिल्डिंगों की वास्तविक संख्या क्या है, इससे भी मजेदार जानकारी ये है कि अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुरूप हम कितनी ऊंचाई से आग लगने की स्थिति में सुरक्षा दे सकते हैं, जवाब सुनकर आप चौंक जाएंगे। जानकारी यह बताती है कि मौजूदा उपकरणों के साथ अग्निशमन विभाग केवल 14 मंजिल यानी 42 मीटर ऊंचाई तक ही सुरक्षा दे सकता है उसके ऊपर नहीं।
दिल्ली अग्निकांड की भयावह स्थिति के बाद जहां उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार एलर्ट हुई और बहुखंडीय बिल्डिंगों और होटलों के अग्निशमन सुरक्षा प्रबंधों का आडिट करने के आदेश दिये वहीं एक सवाल यह भी आया कि हमारी व्यवस्था कितनी मंजिल तक सुरक्षा देने में सक्षम है।
कितना सक्षम है अग्निशमन विभाग
उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएँ मुख्य रूप से हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म और सीढ़ियों पर निर्भर करती हैं जो सुरक्षित रूप से 14 मंजिलों (लगभग 42 मीटर) तक पहुँच सकती हैं। इससे ऊँची इमारतों और गगनचुंबी भवनों के लिए, विभाग राज्य भवन संहिता द्वारा अनिवार्य आंतरिक अग्निशमन प्रणालियों और दबावयुक्त निकास मार्गों पर निर्भर करता है।
30 अप्रैल 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि नोएडा में आकाश छूने की लालसा में ऊंची से ऊंची इमारतें लगातार बन रही हैं, लेकिन शहर की अग्निशमन क्षमता काफी कम ऊंचाई तक ही सीमित प्रतीत होती है। रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि आठ मंजिलों से अधिक ऊंची 1,500 से अधिक इमारतों और 1,000 से अधिक मध्यम ऊंचाई वाली इमारतों के बीच, गौतम बुद्ध नगर अग्निशमन विभाग केवल चार हाइड्रोलिक प्लेटफार्मों के साथ काम कर रहा है - जिनमें से सबसे ऊंचा प्लेटफार्म केवल 42 मीटर, यानी लगभग 14 मंजिलों तक ही पहुंच सकता है। रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि जल्द ही 72 मीटर ऊंचा प्लेटफार्म मिल जाएगा। अगर वह मिल गया तो भी 24 मंजिल तक पहुंचेगा उसके ऊपर की मंजिलों में रहने वालों का क्या होगा। आज जब विकास के बढ़ते चरण में आज जब लखनऊ में 42 मंजिल ऊंचे तक अपार्टमेंट बन रहे हैं तब हमारा अग्निशमन विभाग कितना सक्षम है इस पर एक निगाह डालने की जरूरत है।
उन्नत हाईड्रोलिक प्लेटफार्म की डिमांड
इस गैप को भरने के लिए विभाग ने 72, 92 और यहां तक कि 104 मीटर की पहुंच क्षमता वाले अधिक उन्नत हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्मों की खरीद का प्रस्ताव दिया है। ये मशीनें दमकलकर्मियों को 30 या उससे अधिक मंजिलों तक की इमारतों की ऊपरी मंजिलों तक सीधे पहुंचने में सक्षम बनाएंगी।
वास्तव में लगातार हो रहे निर्माण के कारण नोएडा में स्थिति और भी गंभीर हो गई है। इसका एक प्रमुख उदाहरण सेक्टर 94 में स्थित सुपरनोवा टावर है - जो भारत की सबसे ऊंची आवासीय इमारतों में से एक है - जिसकी ऊंचाई लगभग 300 मीटर है और इसमें लगभग 80 मंजिलें हैं।
लखनऊ में भी लगभग यही स्थिति है कि अग्निशमन विभाग की हाइड्रोलिक मशीन 14 से 15 मंजिल तक ही पहुंच सकते हैं ऐसे 22, 28 या 42 मंजिल वालों की सुरक्षा का क्या होगा।
ऊपरी मंजिलों की आग से कैसे निपटा जाएगा
20 से 30 या उससे अधिक मंजिलों वाली इमारतों में बाहरी सीढ़ियाँ नहीं पहुँच पातीं। ऐसे मामलों में, अग्निशमन और बचाव अभियान काफी हद तक इमारत की आंतरिक प्रणालियों पर निर्भर करते हैं, जैसे कि दबावयुक्त सीढ़ीदार सीढ़ियाँ, स्प्रिंकलर हेड और होज़ रील, जिन्हें दमकलकर्मी निर्धारित मंजिलों पर जोड़ते हैं। अगर ये बंद न पड़ गए हों और इनकी समय समय पर जांच कर इन्हें चालू रखा गया हो।
हाई राइज बिल्डिंग कितनी हैं
यूपी में ऊंची इमारतों की संख्या कितनी है ये शायद किसी को पता नहीं है। ये सिर्फ मोटा मोटा अनुमान भर लगाया जा सकता है। चूंकि रेरा ने भी इस संबंध में कोई अधिकृत सूची जारी नहीं की है। हालांकि डेटा ये दर्शाता है कि बिल्डिंग नियमावली में शिथिलता के बाद दिल्ली के एनसीआर क्षेत्र में बड़ी संख्या में बहुखंडीय बिल्डिंग बनी हैं।
नोएडा में 1500 से अधिक
यूपी रेरा के डेटा से मिली जानकारी के आधार पर परियोजना के तहत और शहरी क्षेत्रीकरण कानूनों के आधार पर, 2026 में जिलेवार 10 से अधिक मंजिलों वाली ऊंची इमारतों का अनुमानित विवरण इस तरह लगाया जा सकता है कि गौतम बुद्ध नगर (नोएडा/ग्रेटर नोएडा) में लगभग 1,500 से अधिक ऊंची इमारतें हैं। राज्य में अग्रणी, नोएडा में अधिकांश सुपरटॉल और ऊंची वाणिज्यिक और आवासीय इमारतें शामिल हैं जिसमें सुपरनोवा स्पाइरा और एटीएस नाइट्सब्रिज के निर्माण शामिल हैं।
गाजियाबाद 600 से अधिक
नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड के डेटा से मिली जानकारी के मुताबिक गाजियाबाद में लगभग 600 से अधिक ऊंची इमारतें हैं। एनसीआर का यह प्रमुख केंद्र भारी ट्रैफिक और सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों के विस्तृत जाल के साथ-साथ समूह आवास समितियों की उच्च घनत्व वाली इमारतों से सुसज्जित है।
लखनऊ में 250 से अधिक
बीई रीयल्टी के डेटा से मिली जानकारी के अनुसार सूबे की राजधानी लखनऊ में 250 से अधिक ऊंची इमारतें हैं। राजधानी में तेजी से हाईराइज बिल्डिंग के निर्माण का विस्तार हो रहा है, जिसमें 42 मंजिलों तक ऊंचे आवासीय टावर बन रहे हैं। उदाहरण के लिए प्रेस्टीजिया टावर उल्लेखनीय है।
कानपुर में 100 से अधिक
यूपी रेरा के हवाले से ही मिली जानकारी के अनुसार कानपुर में 100 से अधिक ऊंची इमारतें हैं। मुख्य रूप से कई विशेष क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पीएमएवाई और मिश्रित उपयोग की विकास परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। जहां हजारों परिवारों का लाखों लोगों का सीधे जुड़ाव रहता है।
इन जिलों में 50 से 100 के बीच है आंकड़ा
इसी तरह से आगरा, मेरठ और प्रयागराज आदि जिलों में भी कुल मिलाकर 50-100 ऊंची इमारतें हैं। यहां विकास की गति तेज है, लेकिन वर्तमान में इसमें मुख्य रूप से कम से मध्यम ऊंचाई वाली इमारतें ही शामिल हैं।


