Lucknow News: यूपी में टैंक बने मौत का कुआं, अब तक 86 की मौत

Lucknow News: बदायूं हादसे के बाद फिर उठे सवाल, यूपी में टैंक और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान 2017 से 86 लोगों की मौत दर्ज। फिर भी सुप्रीम को्र्ट और सरकार के आदेश दरकिनार

Ramkrishna Vajpei
Published on: 5 Jun 2026 8:34 PM IST (Updated on: 5 Jun 2026 8:35 PM IST)
UP Tank Cleaning Deaths
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UP Tank Cleaning Deaths (Social Media).jpg

Lucknow News: उत्तर प्रदेश में टैंक और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान होने वाली मौतें थमने का नाम ही नहीं ले रही हैं। ताजा घटना बदायूं की है, जहां मेंथा प्लांट के टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से दो सगे भाइयों की मौत हो गई है। हालांकि खासकर यह घटना औद्योगिक टैंक की सफाई से जुड़ा मामला है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर टैंकों की सफाई के दौरान सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 से अब तक उत्तर प्रदेश में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान 86 लोगों की मौत दर्ज की जा चुकी है। जो कि एक बहुत बड़ी संख्या है और ध्यान आकर्षित करती है। टैंक की सफाई के दौरान सबसे अधिक 18 मौतें गाजियाबाद में हुई हैं, जबकि गौतमबुद्ध नगर में 16 और लखनऊ में 9 लोगों की जान जा चुकी है। वाराणसी में 7, कानपुर और सीतापुर में 6-6 तथा आगरा में 5 मौतों के मामले भी इस कड़ी में दर्ज हो चुके हैं। इसके अलावा चंदौली और मथुरा में 4-4, अंबेडकर नगर, गाजीपुर, रायबरेली और साहिबाबाद में 2-2 तथा जालौन, पीलीभीत और सुल्तानपुर में एक-एक मौत की घटना दर्ज की गई।


चिंताजनक यह है कि इस तरह की घटनाएं सुप्रीम कोर्ट द्वारा मैनुअल सीवर सफाई पर रोक लगाए जाने और राज्य सरकार की ओर से मशीनों के उपयोग तथा सुरक्षा उपकरण अनिवार्य किए जाने के बावजूद सामने आ रही हैं।

13 मामलों में मुआवजे का इंतजार

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 86 मौतों में से 68 मामलों में ही पूर्ण मुआवजा दिया गया है, जबकि 13 मामलों में अब तक कोई मुआवजा नहीं मिला है। जो कि सरकारी अफसरों की संवेदनहीनता को उजागर करता है।

मार्च में कानपुर और मई 2026 में लखनऊ में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान हुई मौतों ने भी सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोली थी। जबकि सूबे की राजधानी में सारा शीर्ष प्रशासनिक अमला बैठता है और यहां मशीनों से सफाई के पूरे प्रबंध भी हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सीवर और टैंक सफाई का पूरी तरह मशीनीकरण नहीं होगा और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसों पर रोक लगा पाना मुश्किल होगा। संसद में उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान होने वाली मौतों के मामले में देश के सबसे प्रभावित राज्यों में शामिल है।

आंकड़े बताते हैं कि मैनुअल स्कैवेंजिंग और बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवर अथवा सेप्टिक टैंक में उतरने पर प्रतिबंध के बावजूद उत्तर प्रदेश के कई जिलों में यह खतरनाक प्रथा पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी है। हाल के वर्षों में लखनऊ, पीलीभीत और अन्य जिलों में सामने आए हादसे इस बात का संकेत हैं कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा मानकों के पालन में अभी भी गंभीर खामियां मौजूद हैं।

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Ramkrishna Vajpei

Ram Krishna Vajpei is a veteran cross-media journalist, political analyst, and data journalism expert whose distinguished career began in 1982. Spanning over four decades across print, broadcast (TV/Radio), and digital platforms, he specializes in rigorous research and deep analytical reporting on socio-political affairs. An authority on modern data journalism and the technical application of AI/LLMs in media, Vajpei also trains next-generation journalists and is currently pursuing a PhD in media studies. His work is defined by an absolute commitment to objectivity and a comprehensive editorial vision.

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