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Mathura News: जवाहर बाग कांड: अर्चना द्विवेदी ने पति मुकुल द्विवेदी को शहीद दर्जे की उठाई मांग
Mathura News: मथुरा के जवाहर बाग कांड की 10वीं बरसी पर अर्चना द्विवेदी ने पति व तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी को शहीद सेवा मेडल देने की मांग उठाई।
जवाहर बाग कांड: अर्चना द्विवेदी ने पति मुकुल द्विवेदी को शहीद दर्जे की उठाई मांग (Photo- Newstrack)
Mathura News: मथुरा के चर्चित जवाहर बाग कांड की 10वीं बरसी पर तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी की पत्नी अर्चना द्विवेदी ने सरकार से अपने पति को शहीद का दर्जा और शहीद सेवा मेडल देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि घटना को दस साल बीत चुके हैं, लेकिन आज तक उनके पति के बलिदान को वह आधिकारिक सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार हैं।
केवल आश्वासन मिलता है
अर्चना द्विवेदी ने कहा कि मुकुल द्विवेदी ने कानून व्यवस्था बनाए रखने और सरकारी जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के दौरान अपनी जान की परवाह नहीं की। ड्यूटी निभाते हुए उन्होंने वीरगति प्राप्त की, लेकिन अब तक उन्हें आधिकारिक रूप से शहीद घोषित नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि हर साल बरसी पर जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी श्रद्धांजलि देने आते हैं तथा सम्मान दिलाने का आश्वासन देते हैं, लेकिन कोई ठोस फैसला नहीं हो सका है।
गौरतलब है कि 2 जून 2016 को मथुरा के जवाहर बाग में रामवृक्ष यादव के नेतृत्व वाले एक समूह ने सरकारी भूमि पर कब्जा कर रखा था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस और प्रशासन अतिक्रमण हटाने पहुंचा। इस दौरान हिंसक झड़प हुई, जिसमें तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और फरह थानाध्यक्ष संतोष कुमार यादव की मौत हो गई। घटना में कुल 29 लोगों की जान गई थी, जिनमें दोनों पुलिस अधिकारी और 27 अन्य लोग शामिल थे। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री भी बरामद की थी।
शहीद का दर्जा क्यों नहीं
जवाहर बाग कांड की दसवीं बरसी पर अर्चना द्विवेदी के बयान के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले पुलिस अधिकारियों को अब तक आधिकारिक शहीद का दर्जा क्यों नहीं मिला।
कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने भी सरकार से मांग की है कि मुकुल द्विवेदी और संतोष कुमार यादव के बलिदान को उचित सम्मान दिया जाए। अर्चना द्विवेदी ने कहा कि उनका परिवार वर्षों से सम्मानजनक निर्णय का इंतजार कर रहा है और सरकार को इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ जल्द फैसला लेना चाहिए।


