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Moradabad News: पदम श्री पुरस्कार से सम्मानित मुरादाबाद के चिरंजी लाल यादव: देश-विदेश में रोशन किया
Moradabad News: मुरादाबाद के चिरंजी लाल यादव को 2026 में पदम श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। गरीबी को मात देकर पीतल कला में देश-विदेश में नाम रोशन किया।
Moradabad News(Photo-Social Media)
Moradabad News: 2026 के पदम श्री पुरस्कार पाने वालों में मुरादाबाद के चिरंजी लाल यादव का नाम भी शामिल है। न्यूज़ ट्रैक से बातचीत में चिरंजी लाल यादव ने अपने जीवन और कला यात्रा से जुड़ी अनेक जानकारी साझा की। चिरंजी लाल यादव मुरादाबाद के थाना कोतवाली क्षेत्र के कटरा पुराण जाट जीवन की सराय में रहते हैं। वे एक गरीब परिवार से संबंध रखते हैं। उन्होंने बताया कि केवल कक्षा 7 तक पढ़ाई करने के बाद ही गरीबी के कारण उन्हें काम पर लगना पड़ा। उन्होंने अपने गुरु स्वर्गीय अमर सिंह जी से पीतल पर नक्काशी की कला सीखना शुरू किया।
चिरंजी लाल ने 22 वर्ष की उम्र से भारत सरकार के माध्यम से 1970 से 1973 तक इस क्षेत्र में प्रशिक्षण लिया और कला में पूर्ण दक्षता हासिल की। उन्होंने महाराव वर्क, वर्मा, विदर रंग, पचरंगा वर्क, अंगूरी वर्क, फाइनल वर्क और मरोड़ी वर्क जैसी तकनीकों में महारत हासिल की। उनके अनुसार, सबसे बारीक और कठिन काम मरोड़ी वर्क का होता है।
उनकी कला का प्रदर्शन देश और विदेशों में भी हुआ है। 2010 में वे बांग्लादेश के ढाका गए, जबकि 2015 में जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में अपनी कला का प्रदर्शन किया। भारत के विभिन्न हिस्सों में भी उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन किया, जिनमें शामिल हैं:
प्रगति मैदान, नई दिल्ली
तालकोट, नई दिल्ली
नेशनल क्राफ्ट म्यूजियम, कला ग्राम, चंडीगढ़
वेल्लूरमक कोट्टम, चेन्नई
पंप विहार, चेन्नई
गांधी नगर, अहमदाबाद
शिल्पारामम, हैदराबाद
बेंगलुरु
इसके अलावा, उन्होंने नई दिल्ली में सेंट्रल कार्टेज इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन लिमिटेड में भी कार्य किया और मुरादाबाद में पीतल की सप्लाई जारी रखी।
चिरंजी लाल यादव को अब तक कई पुरस्कार मिल चुके हैं:
2019: शिल्प गुरु अवॉर्ड
2008: नेशनल मेरिट अवॉर्ड
1998-1999: राज्य पुरस्कार
1994-1995: राज्य दस्तकार पुरस्कार
1912: राज्य दक्षता पुरस्कार
शिल्प गुरु पुरस्कार उन्हें भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के माध्यम से उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल द्वारा भी प्रदान किया गया था। चिरंजी लाल यादव की यह उपलब्धि न केवल मुरादाबाद, बल्कि पूरे देश के शिल्पकार समुदाय के लिए गौरव का अवसर है। गरीबी और कठिनाइयों को मात देकर उन्होंने पीतल कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।


