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Pilibhit News: जमीन कब्जाने को लेकर ग्राम विकास अधिकारी समेत कई लोगों पर किसान ने लगाए गंभीर आरोप
Pilibhit News: पीलीभीत के पूरनपुर क्षेत्र में एक किसान ने ग्राम विकास अधिकारी समेत कई लोगों पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन कब्जाने, गन्ने की फसल जलाने और जान से मारने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
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Pilibhit News: पीलीभीत जनपद में कृषि भूमि पर कब्जे को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। तहसील पूरनपुर क्षेत्र के एक किसान ने ग्राम विकास अधिकारी समेत कई लोगों पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन कब्जाने, फसल जलाने, पेड़ कटवाने की कोशिश करने और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित ने पुलिस क्षेत्राधिकारी को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है।
मामला सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। पीड़ित किसान का आरोप है कि कई दिनों से लगातार दबंगई के जरिए उसकी कृषि भूमि पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। विरोध करने पर उसे खुलेआम जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं।पूरनपुर तहसील क्षेत्र के गांव पिपरिया दुलई निवासी सर्वेश शुक्ल ने पुलिस को दिए शिकायती पत्र में बताया कि उसकी कृषि भूमि मौजा गोरखपुर जदी में गाटा संख्या 515 पर स्थित है।पीड़ित का आरोप है कि ग्राम विकास अधिकारी महेंद्र सिंह, जो वर्तमान में लखीमपुर खीरी जिले के बांकेगंज ब्लॉक में तैनात बताए जा रहे हैं, फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसकी जमीन पर कब्जा करने की योजना बनाई।
शिकायत में कहा गया है कि आरोपी पक्ष राजनीतिक संरक्षण का लाभ उठाकर लगातार दबाव बना रहा है और कई बार जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर चुका है।शिकायत में कहा गया है कि सूचना मिलने के बाद पीड़ित ने अपने भाई से तत्काल 112 नंबर पर फोन कर पुलिस और दमकल विभाग को जानकारी दी। दमकल टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया।पीड़ित जब खेत पर पहुंचा तो उसका आरोप है कि महेंद्र सिंह अपने साथियों के साथ खेत के पास मौजूद था और खुलेआम धमकी दे रहा था कि फसल जलने दो, बाद में जमीन पर कब्जा कर लिया जाएगा। इस घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई।
जेसीबी से गिराने की कोशिश किए गए फलदार पेड़
पीड़ित किसान ने आरोप लगाया कि 22 अप्रैल 2026 की सुबह करीब 8 बजे आरोपी महेंद्र सिंह फिर 7-8 लोगों और जेसीबी मशीन के साथ खेत पर पहुंच गया। उसने खेत में मौजूद प्रतिबंधित और फलदार पेड़ों, जिनमें आंवला, बेल और आम के पेड़ शामिल थे, को गिराने की कोशिश शुरू कर दी।जब पीड़ित ने विरोध किया तो कथित तौर पर दबंगई दिखाई गई। बाद में पुलिस सहायता मिलने पर काम रुकवाया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने पूरे घटनाक्रम की फोटो और वीडियो भी तैयार किए हैं, जिन्हें पुलिस को सौंप दिया गया है।शिकायती पत्र के अनुसार, 24 अप्रैल 2026 को आरोपी पक्ष फिर खेत पर पहुंचा। इस बार आरोप है कि आरोपी ईंटों से भरी ट्रॉली लेकर आया और खेत के किनारे ईंटें उतरवा दीं।पीड़ित का आरोप है कि विरोध करने पर आरोपी ने धमकी दी कि वह खेत पर कब्जा करके ही रहेगा और अगर रोका गया तो जान से मार देगा। इस धमकी के बाद किसान और उसका परिवार दहशत में है।
7-8 लोगों के साथ पहुंचकर कब्जे की कोशिश
पीड़ित के मुताबिक, 21 अप्रैल 2026 की सुबह करीब 9 बजे आरोपी महेंद्र सिंह 7-8 अज्ञात लोगों के साथ खेत पर पहुंचा और जबरन कब्जे का प्रयास करने लगा। जब गांव के लोग मौके पर पहुंचे और विरोध शुरू किया तो आरोपी वहां से चला गया।शिकायतकर्ता का कहना है कि उसी दिन वह अपने सहकर्मी लाइनमैन दिनेश राठौर के अंतिम संस्कार में शामिल होने चला गया था। इसी दौरान शाम करीब 4:15 बजे सूचना मिली कि उसके गन्ना बीज वाले खेत में आग लगा दी गई है।पीड़ित किसान ने शिकायत में बताया कि भूमि विवाद से संबंधित वाद संख्या 134/2026 सिविल न्यायालय पीलीभीत में विचाराधीन है। इसके बावजूद आरोपी पक्ष लगातार दबाव बनाकर जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहा है।शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसने थाना स्तर पर भी कई बार प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
गन्ना बीज नष्ट करने का आरोप
शिकायत के अनुसार, 23 मई 2026 की सुबह करीब 8 बजे महेंद्र सिंह अपने साथ सत्यपाल सिंह और सदन सिंह समेत कई मजदूरों को लेकर खेत पर पहुंचा। आरोप है कि इन लोगों ने खेत में खड़ी गन्ना बीज की फसल को नुकसान पहुंचाया और दोबारा कब्जा करने की कोशिश की।पीड़ित किसान का आरोप है कि आरोपी दबंग प्रवृत्ति के लोग हैं और उसे तथा उसके परिवार को जान-माल का खतरा बना हुआ है।
पुलिस से सुरक्षा और कार्रवाई की मांग
किसान ने पुलिस क्षेत्राधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो विवाद और बढ़ सकता है। भूमि कब्जा, फसल जलाने और जान से मारने की धमकियों जैसे आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।अब देखने वाली बात यह होगी कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और पीड़ित किसान को कब तक न्याय मिल पाता है।


