Pratapgarh News: प्रतापगढ़ में 10 फरवरी से फाइलेरिया बचाव अभियान, घर-घर पहुंचेंगी 527 स्वास्थ्य टीमे

Pratapgarh News: प्रतापगढ़ में 10 फरवरी से फाइलेरिया उन्मूलन अभियान शुरू, 527 स्वास्थ्य टीमें घर-घर जाकर दवा खिलाएंगी।

Sanjay Pal Pratapgarh
Published on: 6 Feb 2026 9:09 PM IST
Pratapgarh News: प्रतापगढ़ में 10 फरवरी से फाइलेरिया बचाव अभियान, घर-घर पहुंचेंगी 527 स्वास्थ्य टीमे
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Pratapgarh News: लगातार प्रयासों से प्रतापगढ़ अब फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में बढ़ रहा है। इसी कड़ी में इस बार केवल तीन ब्लॉकों—आसपुर देवसरा, कालाकांकर और प्रतापगढ़ सदर—में 10 फरवरी से 28 फरवरी तक सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान चलाया जाएगा। अभियान के सफल क्रियान्वयन हेतु सीएमओ सभागार में संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य जनता को फाइलेरिया की गंभीरता और इससे बचाव की दवाओं का महत्व समझाना था, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति दवा सेवन से वंचित न रहे।

कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए सीएमओ डॉ. ए0एन0 प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया मच्छरों से फैलने वाली गंभीर बीमारी है, जिसके लक्षण 10–15 साल बाद हाथीपाँव और हाइड्रोसील के रूप में सामने आते हैं। लंबे समय तक संक्रमण छिपा रहने के कारण इसका समुदाय में फैलने का खतरा बना रहता है। इस अभियान के दौरान कुल 5.52 लाख लोगों को दवा खिलाई जाएगी।

अभियान में 527 टीमें घर-घर जाकर दवा सेवन कराएंगी, और 106 सुपरवाइजर निगरानी करेंगे। सीएमओ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार फाइलेरिया उन्मूलन के लिए पांच-स्तरीय रणनीति पर काम कर रही है: सर्वजन दवा सेवन, रोग प्रबंधन, वाहक नियंत्रण, विभागीय समन्वय और डिजिटल नवाचार। पीसीआई के स्टेट मैनेजर डॉ. विकास द्विवेदी ने बताया कि कई लोग खुद को स्वस्थ समझकर दवा नहीं लेते, जिससे संक्रमण दूसरों में फैल सकता है। अभियान की सफलता के लिए कम से कम 90 प्रतिशत पात्र आबादी का दवा सेवन जरूरी है।

डब्ल्यूएचओ के ज़ोनल कोऑर्डिनेटर डॉ. निशांत कुमार ने कहा कि दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। हल्का बुखार या चक्कर आना सामान्य है और इसका कारण फाइलेरिया के सूक्ष्म कृमियों का नष्ट होना है। उन्होंने बताया कि असली खतरा दवा न लेने से होता है, क्योंकि एक संक्रमित व्यक्ति अनजाने में पूरे गांव को जोखिम में डाल सकता है। जिला मलेरिया अधिकारी राजेश पांडेय ने बताया कि वर्तमान में जनपद में 654 हाथीपाँव के मरीज चिन्हित हैं। हालिया नाइट ब्लड सर्वे में तीन ब्लॉकों में संक्रमण दर अधिक पाई गई, इसलिए केवल इन्हीं क्षेत्रों में अभियान चलाया जाएगा।

गर्भवती महिलाओं, दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों और गंभीर रोगियों को छोड़कर सभी को स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में दवा दी जाएगी, ताकि संक्रमण की श्रृंखला टूट सके। कार्यक्रम का संचालन एनएचएम डीपीएम आरबी यादव कर रहे हैं। अभियान में पीसीआई, पाथ, सीफार और डब्ल्यूएचओ की टीमें सहयोग कर रही हैं। इस अवसर पर पाथ से नीतीश गोविंद राव और अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।

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