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अपर्णा यादव ने आनंदी बेन से बताया कि 'क्या हुआ था उस रात?' टूटे शब्दों में बयां किया प्रतीक का आखिरी संघर्ष
Prateek Yadav Death: मैं जवान हूं, मुझे कुछ नहीं होगा… प्रतीक यादव की जिद बनी जानलेवा, अपर्णा यादव ने राज्यपाल से टूटे शब्दों में बयां किया आखिरी संघर्ष
Prateek Yadav Death Reason: बीजेपी नेता अपर्णा यादव और उनके परिवार के दुख की परतें अब धीरे-धीरे सामने आ रही हैं। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के साथ बातचीत में अपर्णा यादव ने पति प्रतीक यादव की बीमारी, इलाज और आखिरी दिनों की ऐसी दर्दनाक कहानी सुनाई, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में अपर्णा यादव बेहद भावुक अंदाज में बताती नजर आ रही हैं कि प्रतीक यादव की सर्जरी के बाद शरीर में ब्लड क्लॉट यानी खून का थक्का बनने लगा था। डॉक्टरों ने समय रहते खतरे की घंटी बजा दी थी। उन्हें साफ कहा गया था कि अगर लगातार इलाज और निगरानी नहीं हुई तो स्थिति गंभीर हो सकती है। अपर्णा ने बताया कि जिस डॉक्टर ने सर्जरी की थी, उसने कंप्रेशन गारमेंट को भी समस्या बढ़ने की एक वजह बताया। बाद में मेदांता अस्पताल के डॉक्टरों ने जांच में थ्रॉम्बोसिस डिटेक्ट किया और तुरंत अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी।
ठीक हो सकते थे प्रतीक
“डॉक्टर कह रहे थे कि दवाओं से क्लॉट खत्म हो सकता है… लेकिन वक्त और सावधानी दोनों जरूरी हैं,” अपर्णा ने भारी आवाज में कहा। डॉक्टरों ने पांच से सात दिन तक अस्पताल में भर्ती रहकर लगातार निगरानी में इलाज कराने की सलाह दी थी। उनका मानना था कि तीन महीने तक नियमित दवाएं लेने से खून का थक्का धीरे-धीरे गल सकता था। लेकिन यहीं से शुरू हुई वह जिद, जो आखिरकार जिंदगी पर भारी पड़ गई।
अस्पताल में नहीं रुकने की जिद
अपर्णा ने बताया कि प्रतीक अस्पताल में रुकना ही नहीं चाहते थे। अपर्णा ने कहा कि उन्हें लगता था कि वह युवा हैं और जल्द ठीक हो जाएंगे। वह बार-बार कहते थे कि हॉस्पिटल नहीं जाना है। इलाज अधूरा छोड़कर वह घर लौट आए। ऑफिस जाना, दोस्तों से मिलना और सामान्य दिनचर्या फिर से शुरू कर दी।
अपर्णा यादव ने बताया कि 29 तारीख को जब वह एयरपोर्ट पर थीं, तभी प्रतीक का फोन आया कि तबीयत बिगड़ रही है। वह उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाना चाहती थीं, लेकिन प्रतीक घर जाने की जिद करते रहे। बड़ी मुश्किल से एक बार उन्हें भर्ती कराया गया, लेकिन 1 मई को उन्होंने अस्पताल छोड़ दिया।
डॉक्टरों ने यह भी बताया था कि लंबे समय तक लगातार बैठे रहने की आदत ने भी खतरा बढ़ाया। ऑफिस की ज्यादातर मीटिंग्स वह घंटों बैठकर करते थे, जो ब्लड क्लॉट की समस्या को और गंभीर बना सकती थी।
फिर आया 13 मई का वह मनहूस दिन…
इस दिन अचानक तबीयत बिगड़ी और प्रतीक यादव की जिंदगी की डोर टूट गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह खून का थक्का जमना बताया गया। इस खबर ने राजनीतिक और सामाजिक जगत को गहरे सदमे में डाल दिया। अब वायरल हो रही अपर्णा यादव की यह बातचीत सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि उन तमाम लोगों के लिए चेतावनी भी बन गई है, जो बीमारी के संकेतों को हल्के में लेते हैं और इलाज को टालते रहते हैं।


