Prayagraj News: करछना में एसीपी सुनील सिंह का कथित ऑडियो वायरल, छात्रों से अभद्र भाषा के आरोप

Prayagraj News: करछना में एसीपी सुनील सिंह का कथित ऑडियो वायरल, छात्रों से अभद्र भाषा के आरोप, जिलाधिकारी से सख्त कार्रवाई की मांग।

Ansh mishra Mishra
Published on: 26 March 2026 11:07 AM IST (Updated on: 26 March 2026 11:28 AM IST)
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Prayagraj News(Photo-Social Media)

Prayagraj News: करछना सर्किल में तैनात एसीपी सुनील सिंह से जुड़ा एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद पूरे इलाके में हलचल मच गई है। यह बातचीत उस समय की बताई जा रही है जब छात्रों द्वारा प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन की सूचना प्रशासन तक पहुंची थी। छात्र नेता संदीप पटेल के मोबाइल पर एसीपी का फोन आया, और उसी बातचीत ने विवाद खड़ा कर दिया। वायरल ऑडियो के अनुसार, एसीपी कथित रूप से पूछ रहे हैं:

— “कल आप लोगों का धरना प्रदर्शन है? किस विद्यालय से हो आप?” इसके बाद पहचान को लेकर बार-बार पूछताछ की बात सामने आई। कथित तौर पर कहा गया: — “अपना वो भेज दीजिए हमारे पास…” — “कोई लिखित भेजो… व्हाट्सएप पर भेजो… प्रमाण के लिए कि आप उसी विद्यालय के छात्र हो या नहीं…” अदालत के अनुसार, बातचीत के दौरान ऐसे शब्द भी बोले गए जिन्हें लोग आपत्तिजनक बता रहे हैं। हालांकि, वायरल ऑडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन फैलने के कारण मामला गंभीर बन गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पूछताछ करना पुलिस का अधिकार है, लेकिन अधिकार के साथ मर्यादा भी जरूरी है। अगर भाषा ही विवाद बन जाए, तो मामला छोटा नहीं रहता। अब इस प्रकरण को लेकर जिलाधिकारी प्रयागराज से हस्तक्षेप की मांग उठने लगी है। लोग चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही हैं, तो सख्त कार्रवाई की जाए। ताकि कोई अधिकारी अपनी भाषा की सीमा न भूले।

लोग सवाल उठा रहे हैं:

— क्या धरना की सूचना मिलते ही इस तरह पूछताछ करना उचित था?

— क्या किसी छात्र से पहचान पूछना गलत है? नहीं।

— क्या पूछताछ का तरीका नियमों के अंदर था?

— बार-बार प्रमाण मांगना प्रक्रिया थी या दबाव?

— यह सामान्य बातचीत थी या दबाव बनाने की कोशिश?

जनता का सवाल है: हर छात्र से इसी लहजे में बात होती है या मामला ज्यादा सख्त हो गया? एसीपी का पद छोटा नहीं होता। हर शब्द विभाग की छवि बनाता है। अगर बातचीत में अपमानजनक शब्द बोले गए हैं, तो क्या इसे गुस्सा कहकर छोड़ दिया जाएगा या अनुशासनहीनता माना जाएगा? क्या अब जिलाधिकारी हस्तक्षेप करेंगे? लोगों का कहना है कि मामला सिर्फ पुलिस का नहीं है। प्रशासन को भी देखना चाहिए कि क्या अधिकारी का व्यवहार पूरे माहौल को खराब कर रहा है। क्या सच्चाई सामने आएगी और सख्त कार्रवाई होगी या मामला ठंडा पड़ जाएगा?

अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो क्या आगे कोई अधिकारी इसी तरह बात करने को सामान्य मान लेगा? क्या नियम सबके लिए बराबर हैं या पद देखकर बदल जाते हैं? अपमान के शब्दों का भी कोई हिसाब होगा? जनता का सीधा सवाल: वर्दी बड़ी है या मर्यादा? फैसला अब होना चाहिए। अधिकारी को गुस्सा करने का अधिकार है, अपमान करने का नहीं। पूछताछ के नाम पर किसी भी भाषा का प्रयोग नहीं होना चाहिए। सम्मान सिर्फ जनता से चाहिए, देना भी जरूरी है। करछना में वायरल यह कथित ऑडियो पूरे क्षेत्र में यही सवाल खड़ा कर गया है: कानून की ताकत बड़ी है या कानून की मर्यादा? वायरल ऑडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने के कारण मामला चर्चा में है।

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