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खून के आंसू रो रहा संत समाज! संगम तट पर शंकराचार्य के महा-अपमान पर अनिरुद्धाचार्य ये क्या बोल गए
Magh Mela 2026: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने अनुयायियों के साथ पालकी पर सवार होकर संगम स्नान के लिए निकल रहे थे। नियम और सुरक्षा के नाम पर प्रशासन ने उनकी पालकी को रोक दिया। देखते ही देखते यह बहस धक्का-मुक्की और खींचतान में बदल गई।
Magh Mela 2026: धर्म की नगरी प्रयागराज में भक्ति की धारा कम और विवाद की आग ज्यादा दहक रही है। संगम की रेती पर लोग मोक्ष की कामना लेकर आते हैं, वहां इस बार कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरे हिंदू समाज को झकझोर कर रख दिया है। मौनी अमावस्या के पवित्र स्नान के दौरान देश के सर्वोच्च धर्मगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ बर्ताव हुआ, उसने अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है।
अनुयायियों के साथ पालकी पर सवार
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने अनुयायियों के साथ पालकी पर सवार होकर संगम स्नान के लिए निकल रहे थे। नियम और सुरक्षा के नाम पर प्रशासन ने उनकी पालकी को रोक दिया। देखते ही देखते यह बहस धक्का-मुक्की और खींचतान में बदल गई। पुलिस और प्रशासन ने संतों के साथ बदसलूकी की, ब्रह्मचारियों की चोटी पकड़ करके धसीटा गया। अपमान से आहत शंकराचार्य उसी दिन से अपने शिविर के बाहर धरने पर जमे हुए हैं।
कथावाचक स्वामी अनिरुद्धाचार्य महाराज
खबर आ रही है कि भीषण ठंड की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ रही है, लेकिन उनका संकल्प अडिग है। इस पूरे मामले में पर दुनिया में मशहूर कथावाचक स्वामी अनिरुद्धाचार्य महाराज की एंट्री हो गई है। उन्होंने प्रशासन को दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि जो अपराध हुआ है, उसके लिए माफी ही एकमात्र रास्ता है। अनिरुद्धाचार्य ने भावुक होते हुए कहा कि प्रशासन के अधिकारियों को तुरंत शंकराचार्य की शरण में जाना चाहिए।
प्रभु राम ने रावण जैसे शत्रु को किया था माफ
अपने कृत्य के लिए क्षमा मांगनी चाहिए। उन्होंने भगवान राम का उदाहरण देते हुए कहा कि जब प्रभु राम रावण जैसे शत्रु को शरण में आने पर माफ कर सकते हैं, तो ये तो दयालु संत हैं। अगर अधिकारी महाराज जी के चरणों में गिरकर अपनी गलती मान लें, तो वह निश्चित रूप से उन्हें माफ कर देंगे। पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने मामले पर चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने प्रशासन के दुर्व्यवहार की कड़ी निंदा की है।
शंकराचार्य पद का विवाद संतों की एकजुटता
उन्होंने कहा कि साधु-संतों के साथ मारपीट और उनकी चोटी पकड़ना सनातन परंपरा का घोर अपमान है। उन्होंने मर्यादाओं का पालन करने की बात भी कही, लेकिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अपना 'लाड़ला' बताकर यह साफ कर दिया कि संकट की घड़ी में संत समाज उनके साथ खड़ा है। क्या प्रशासन अपनी जिद छोड़कर माफी मांगेगा या फिर संगम तट पर संतों का गुस्सा किसी बड़ी क्रांति की शुरुआत करेगा? पूरी दुनिया की नजरें प्रयागराज पर टिकी हैं।


