प्रशासनिक लापरवाही: दो बहनों की उम्र में 4 माह का अंतर, एसडीएम ने रिपोर्ट रोकी

UP News: जिले के लालगंज तहसील क्षेत्र में प्रशासनिक लापरवाही का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ दो सगी बहनों की उम्र में महज चार महीने का अंतर दिखाकर जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की रिपोर्ट पेश कर दी गई।

Gautam Kumar
Published on: 22 April 2026 10:50 PM IST (Updated on: 22 April 2026 10:57 PM IST)
प्रशासनिक लापरवाही: दो बहनों की उम्र में 4 माह का अंतर, एसडीएम ने रिपोर्ट रोकी
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UP News: जिले के लालगंज तहसील क्षेत्र में प्रशासनिक लापरवाही का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ दो सगी बहनों की उम्र में महज चार महीने का अंतर दिखाकर जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की रिपोर्ट पेश कर दी गई। मामले की गंभीरता और तकनीकी खामी को देखते हुए एसडीएम लालगंज ने न केवल जारी आदेश को स्थगित कर दिया है, बल्कि सरेनी के खंड विकास अधिकारी (BDO) को भ्रामक रिपोर्ट देने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

​सरेनी क्षेत्र के छतौना गांव निवासी सद्दीक ने अपनी दो बेटियों, साबरीन खातून और नाजरीन खातून के जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। आवेदन के एक साल बाद भी प्रमाण पत्र न मिलने पर उन्होंने एसडीएम कोर्ट की शरण ली। कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट और साक्ष्यों में साबरीन की जन्मतिथि 18 फरवरी 2002 और नाजरीन की 23 जून 2002 दिखाई गई।

चार माह के अंतर पर फंसा पेंच

​हैरानी की बात यह है कि सगी बहनों की उम्र में केवल 4 माह 5 दिन का अंतर दिखाया गया, जो जैविक रूप से असंभव प्रतीत होता है। प्रारंभिक जांच में बताया गया कि सगी बहनों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों और बीडीओ द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में भी यही संदिग्ध तिथियां अंकित थीं। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर एसडीएम ने पहले 10 रुपये विलंबित शुल्क के साथ प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश दे दिया था।

एसडीएम ने साधी सख्ती, रिपोर्ट तलब

​जैसे ही यह तकनीकी विसंगति पकड़ में आई, एसडीएम लालगंज मिथलेश त्रिपाठी ने तत्काल प्रभाव से आदेश पर रोक लगा दी। उन्होंने सरेनी बीडीओ को पत्र लिखकर पूछा है कि ऐसी भ्रामक और त्रुटिपूर्ण रिपोर्ट कैसे तैयार की गई?

​"मुकदमे में प्रस्तुत शैक्षिक प्रमाण पत्रों और बीडीओ की रिपोर्ट के आधार पर ही फैसला सुनाया गया था। लेकिन दोनों बहनों की आयु में मात्र चार माह का अंतर होना संदेह पैदा करता है। सरेनी बीडीओ को मामले की गहन जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने और जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।"

​जांच के घेरे में जिम्मेदार

अब इस मामले में गांव से लेकर ब्लॉक स्तर तक के उन कर्मचारियों पर गाज गिरना तय है, जिन्होंने बिना सत्यापन किए ऐसी अव्यावहारिक रिपोर्ट तैयार कर कोर्ट को गुमराह किया। प्रशासन की इस सख्ती से उन लोगों में हड़कंप मच गया है जो गलत साक्ष्यों के आधार पर सरकारी दस्तावेज बनवाने का खेल खेलते हैं।

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Gautam Kumar is an Former Content Writer at Newstrack.com.

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