Raebareli News: रायबरेली कलेक्ट्रेट में देर रात फाइलें जलाने का वीडियो वायरल, प्रशासन पर उठे सवाल

Raebareli News: रायबरेली कलेक्ट्रेट परिसर में देर रात सरकारी दस्तावेज जलाने का कथित वीडियो वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया। प्रशासन ने इसे पुराने और अनुपयोगी अभिलेखों के नियमानुसार निस्तारण की प्रक्रिया बताया।

Narendra Singh
Published on: 1 Jun 2026 4:50 PM IST
Raebareli News: रायबरेली कलेक्ट्रेट में देर रात फाइलें जलाने का वीडियो वायरल, प्रशासन पर उठे सवाल
X

Raebareli News

Raebareli News: उत्तर प्रदेश के रायबरेली कलेक्ट्रेट परिसर का एक कथित वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसने प्रशासनिक हलकों में खलबली मचा दी है। वायरल वीडियो में दो कर्मचारी देर रात गत्तों में भरे सरकारी कागजातों और फाइलों को गुपचुप तरीके से जलाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में साफ दिख रहा है कि फाइलों के कुछ बंडल तो खोले भी नहीं गए थे और उन्हें सीधे आग के हवाले कर दिया गया।​बिना किसी वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी में रात के अंधेरे में की गई इस कार्रवाई को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर और आम जनता के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

​साजिश या सामान्य प्रक्रिया? उठ रहे कई सवाल

​इस पूरे घटनाक्रम को लेकर लोगों में भारी असमंजस और आक्रोश है। इस मामले को दो नजरियों से देखा जा रहा है। कुछ लोगों का मानना है कि किसी बड़े घोटाले या अनियमितता के सबूतों को मिटाने के उद्देश्य से इन महत्वपूर्ण फाइलों को रात के अंधेरे में जलाया गया है।वहीं, दूसरी ओर कुछ लोगों का कहना है कि यह समय-समय पर अनुपयोगी और पुराने अभिलेखों के निस्तारण (Weeding out) की एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है।

​एनजीटी के नियमों की भी उड़ी धज्जियां

​मामले में एक बड़ा पहलू पर्यावरण प्रदूषण से भी जुड़ा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों के मुताबिक खुले में इस तरह भारी मात्रा में कागज या कचरा जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। कलेक्ट्रेट जैसे जिम्मेदार परिसर में ही एनजीटी के नियमों की सरेआम अनदेखी ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

हालांकि, न्यूजट्रैक इस वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।​मामला तूल पकड़ने पर अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) सिद्धार्थ ने स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया है। उन्होंने बताया: ​यह कोई अवैध गतिविधि नहीं थी।​जिलाधिकारी (DM) के निर्देशानुसार ही निष्क्रिय हो चुके बेहद पुराने और अनुपयोगी दस्तावेजों को नष्ट किया गया है।​एडीएम का दावा है कि यह पूरी कार्रवाई अधिकारियों की देखरेख में संपन्न कराई गई है।प्रशासन भले ही इसे सामान्य प्रक्रिया बता रहा हो, लेकिन रात के अंधेरे में फाइलों को गुपचुप तरीके से जलाने के तरीके ने पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह गहन जांच का विषय है कि आखिर वे कौन से दस्तावेज थे, जिन्हें इस तरह नष्ट करना पड़ा।

Narendra Singh
ABOUT THE AUTHOR

Narendra Singh

Next Story