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Saharanpur News: यूजीसी कानून के विरोध में भाजपा नेता सुरेंद्र मोहन कालड़ा का इस्तीफा
Saharanpur News: यूजीसी के नए कानून को छात्र विरोधी बताते हुए भाजपा हकीकत मंडल के उपाध्यक्ष सुरेंद्र मोहन कालड़ा ने पद छोड़ा, बोले– यह व्यवस्था बच्चों का भविष्य बिगाड़ रही है।
यूजीसी कानून के विरोध में भाजपा नेता सुरेंद्र मोहन कालड़ा का इस्तीफा (Photo- Newstrack)
Saharanpur News: सहारनपुर। सहारनपुर में यूजीसी के नए कानून को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी हकीकत मंडल के उपाध्यक्ष सुरेंद्र मोहन कालड़ा ने इस कानून के विरोध में अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है। उन्होंने इसे छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय बताते हुए भाजपा नेतृत्व से असहमति जताई।
पार्टी से दशकों पुराना नाता
इस्तीफे की घोषणा करते हुए सुरेंद्र मोहन कालड़ा भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि वे उस दौर से भाजपा से जुड़े हैं, जब पार्टी के लिए घर-घर जाकर पोस्टर लगाए जाते थे, झंडे बांधे जाते थे और सड़कों पर दरी बिछाकर सभाएं की जाती थीं। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि राम मंदिर आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी रही और इस दौरान उन्हें आठ दिन जेल में रहने का अवसर भी मिला।
लाठियां खाईं, जेल गए, फिर भी पार्टी से जुड़े रहे
कालड़ा ने बताया कि पार्टी के लिए उन्होंने कई बार लाठियां खाईं और जेल भी गए, लेकिन कभी पीछे नहीं हटे। उनका कहना है कि उनका रिश्ता पार्टी से सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि करीब पांच साल पहले कुछ मुद्दों को लेकर नाराजगी जरूर हुई थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने न तो सोशल मीडिया पर पार्टी के खिलाफ कुछ लिखा और न ही कभी गद्दारी की।
यूजीसी कानून पर गंभीर आपत्ति
सुरेंद्र मोहन कालड़ा ने यूजीसी के तहत लाए गए नए कानून को छात्रों के लिए घातक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून सरकारी स्तर पर भेदभाव को बढ़ावा देता है, जिससे खासतौर पर स्वर्ण वर्ग के बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कभी भी जातिगत भेदभाव के समर्थक नहीं रहे, लेकिन मौजूदा व्यवस्था प्रतिभाशाली छात्रों के साथ अन्याय कर रही है।
छात्रों पर बढ़ता मानसिक दबाव
भाजपा नेता ने कहा कि हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि छात्रों पर मानसिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। कई बार परिस्थितियां छात्रों को आत्महत्या जैसे कदम उठाने की ओर धकेल देती हैं। उन्होंने कहा कि जब कोई विकल्प नहीं बचता, तब मजबूरी में ऐसे फैसले लिए जाते हैं, जो बेहद दुखद हैं।
इस्तीफे के पीछे कारण
कालड़ा ने साफ शब्दों में कहा कि छात्रों के भविष्य को बचाने और यूजीसी कानून के विरोध में अपनी आवाज बुलंद करने के लिए उन्होंने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस कानून पर दोबारा विचार करेगी और छात्रों के हित में बदलाव करेगी।


