मस्जिद पर गरजा बुलडोजर, गिरी 35 फीट ऊंची मीनार, बढ़ा तनाव, पुलिस बल तैनात, जानें क्यों हुआ एक्शन

Bulldozer Action on Sambhal Masjid: उत्तर प्रदेश के संभल जिले के मुबारकपुर बंद गांव में शुक्रवार को प्रशासन की कार्रवाई तेज हो गई। दोपहर करीब डेढ़ बजे मस्जिद की 35 फीट ऊंची मीनार को गिरा दिया गया। जानें पूरा मामला।

Aditya Kumar Verma
Published on: 17 April 2026 2:03 PM IST (Updated on: 17 April 2026 2:58 PM IST)
Bulldozer Action on Sambhal Masjid
X

Bulldozer Action on Sambhal Masjid: उत्तर प्रदेश के संभल जिले के मुबारकपुर बंद गांव में शुक्रवार को प्रशासन की कार्रवाई तेज हो गई। दोपहर करीब डेढ़ बजे मस्जिद की 35 फीट ऊंची मीनार को गिरा दिया गया। इसके बाद बुलडोजर से मस्जिद के बाकी हिस्सों को तोड़ने का काम जारी है। इससे पहले सुबह साढ़े 9 बजे से लेकर दोपहर 1 बजे तक मस्जिद के बाहर बनी पांच दुकानों को भी गिराया गया।

हाइड्रा मशीनों से गिराई गई मीनार

मस्जिद की ऊंची मीनार को गिराने के लिए प्रशासन ने दो हाइड्रा मशीनों का इस्तेमाल किया। पहले एक मजदूर मीनार पर चढ़ा और रस्सी बांधी। इसके बाद रस्सी के दूसरे सिरे को दोनों हाइड्रा मशीनों से जोड़ा गया। फिर मशीनों ने एक साथ खींचकर मीनार को नीचे गिरा दिया। पूरी कार्रवाई प्रशासन की निगरानी में की गई।

मौके पर भारी पुलिस बल तैनात

कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए डीएम राजेंद्र पेंसिया और एसपी केके बिश्नोई खुद मौके पर मौजूद रहे। उनके साथ 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी भी तैनात किए गए। जैसे ही गांव के लोग वहां इकट्ठा होने लगे, विरोध की आशंका को देखते हुए पुलिस ने उन्हें मौके से हटा दिया।

12 दिन पहले नहीं टूटी थी मीनार

इससे पहले 5 अप्रैल को भी मस्जिद पर कार्रवाई की योजना बनाई गई थी, लेकिन उस समय बुलडोजर चालक ने मीनार तोड़ने से मना कर दिया था। उसका कहना था कि मीनार गिरने पर वह उसके ऊपर आ सकती है। हालांकि उस दिन मदरसा, पांच दुकानें और मस्जिद का गेट तोड़ दिया गया था। दुकानों का करीब 20 फीसदी हिस्सा बच गया था, जिसे अब शुक्रवार को गिराया गया।

ग्रामीण खुद तोड़ रहे अपने घर

कार्रवाई के बीच गांव के दो ग्रामीण गुलाम रसूल और आसमा भी अपने मकानों के कुछ हिस्से खुद ही तोड़ते नजर आए। प्रशासन के मुताबिक उनके मकान का हिस्सा सरकारी जमीन पर बना हुआ था, इसलिए उन्हें खुद ही कब्जा हटाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद आसमा ने घर के आगे का हिस्सा और गुलाम ने अपने घर का गेट छैनी और हथौड़ी से तोड़ना शुरू कर दिया।

गुलाम रसूल ने बताया कि उन्होंने यह जमीन गांव के प्रधान के चाचा से 30 हजार रुपये में खरीदी थी और उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि यह ग्राम समाज की जमीन है। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें काफी नुकसान हुआ है। वहीं आशा कार्यकर्ता आसमा ने सवाल उठाया कि अगर जमीन सरकारी थी तो उसे बेचा क्यों गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने करीब 30 साल पहले यह जमीन खरीदी थी और अगर अब उन्हें खाली करना पड़ रहा है तो उन्हें पैसे वापस मिलने चाहिए।

क्यों हुआ एक्शन?

इस पूरे मामले की बात करें तो मुबारकपुर बंद गांव में करीब 30 साल पहले सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया था। करीब 5 साल पहले इसी जमीन पर खेल मैदान की 150 वर्गमीटर जगह में मस्जिद का निर्माण कराया गया। इसके अलावा वहां पांच दुकानें और आठ मकान भी बनाए गए। हैरानी की बात यह है कि इसी जमीन पर दो सरकारी प्राइमरी स्कूल भी बने हुए हैं। सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत मिलने के बाद प्रशासन हरकत में आया।

यहां डीएम को शिकायत मिलने के बाद तहसीलदार कोर्ट ने 28 मार्च को अवैध निर्माण हटाने के लिए नोटिस जारी किया। उसी दिन जमीन की पैमाइश कराई गई। इसके बाद 30 मार्च से स्थानीय मजदूरों के जरिए अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

31 मार्च से मुस्लिम समुदाय के लोगों ने खुद ही मदरसा और पांच दुकानों को तोड़ना शुरू किया, लेकिन काम पूरा नहीं हो सका। इसके बाद मस्जिद कमेटी और ग्राम प्रधानपति हाजी मुनव्वर की मांग पर 5 अप्रैल को प्रशासन ने 2100 रुपये शुल्क लेकर करीब दो घंटे में मदरसा और दुकानों को ध्वस्त कराया।

मस्जिद को खुद नहीं तोड़ा, प्रशासन से हटाने की मांग

ग्रामीणों ने मस्जिद को खुद नहीं तोड़ा और प्रशासन से ही इसे हटाने की मांग की थी। ग्राम प्रधानपति का कहना है कि स्कूलों को छोड़कर बाकी सभी अवैध निर्माण हटाए जाएं।

फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई जारी है और गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है। पुलिस बल की तैनाती के बीच लगातार अवैध निर्माण हटाने का काम चल रहा है, ताकि सरकारी जमीन को पूरी तरह कब्जामुक्त कराया जा सके।

Aditya Kumar Verma
ABOUT THE AUTHOR

Aditya Kumar Verma

आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

Next Story