Sambhal News: संभल में ग्राम समाज की जमीन पर बनी मस्जिद-दरगाह अवैध घोषित, प्रशासन ने दिया आदेश

Sambhal News: संभल की तहसीलदार अदालत ने सैफ खां सराय गांव में ग्राम समाज की जमीन पर बने मस्जिद और दरगाह को अवैध कब्जा बताया। आरोपियों को बेदखली के साथ 6.94 करोड़ रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया गया।

Satish Siingh
Published on: 9 March 2026 6:10 PM IST
Mosque-dargah built on village society land in Sambhal declared illegal, administration issues order
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संभल में ग्राम समाज की जमीन पर बनी मस्जिद-दरगाह अवैध घोषित, प्रशासन ने दिया आदेश (Photo- Newstrack)

Sambhal News: उत्तर प्रदेश के संभल जिले से एक ऐसा फैसला सामने आया है जिसने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है। सदर तहसील की अदालत ने ग्राम समाज की जमीन पर बने मस्जिद और दरगाह को अवैध कब्जा करार देते हुए बड़ा आदेश जारी किया है। अदालत ने कब्जा करने वालों को जमीन से बेदखल करने के साथ-साथ करीब 6 करोड़ 94 लाख 79 हजार रुपये की भारी भरकम क्षतिपूर्ति भी लगाने का आदेश दिया है।

ग्राम समाज की जमीन पर हुआ था निर्माण

पूरा मामला संभल जिले के सदर तहसील क्षेत्र के सैफ खां सराय गांव का है। यहां गाटा संख्या 452 की करीब 0.134 हेक्टेयर जमीन राजस्व अभिलेखों में शुरू से ही ग्राम समाज की संपत्ति के रूप में दर्ज है। रिकॉर्ड के अनुसार यह जमीन पेड़ लगाने के लिए आरक्षित स्थान के तौर पर दर्ज थी।

जांच के दौरान सामने आया कि इसी जमीन पर आफताब हुसैन और मेहताब हुसैन ने मस्जिद और दरगाह का निर्माण कर लिया और उस पर कब्जा कर लिया।

लेखपाल की रिपोर्ट के बाद शुरू हुई कार्रवाई

मामले की शुरुआत 24 जून 2025 को हुई जब क्षेत्रीय लेखपाल ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ग्राम समाज की जमीन पर पक्का धार्मिक ढांचा खड़ा कर लिया गया है। इसके बाद तहसील प्रशासन ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 67 के तहत मामला दर्ज कर आरोपियों को नोटिस जारी किया।

वक्फ संपत्ति होने का दिया गया तर्क

अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि मस्जिद और मजार बहुत पुराने समय से मौजूद हैं और यह सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में पंजीकृत वक्फ संपत्ति है। साथ ही यह भी कहा गया कि यहां हर साल उर्स का आयोजन होता है और यह धार्मिक स्थल अंग्रेजों के समय से चला आ रहा है।

अदालत ने दलीलों को किया खारिज

तहसीलदार अदालत ने इन सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन स्पष्ट रूप से ग्राम समाज की संपत्ति है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सार्वजनिक या सरकारी जमीन को वक्फ घोषित नहीं किया जा सकता और केवल धार्मिक ढांचा बना देने से जमीन पर मालिकाना हक नहीं मिल जाता।

अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि सार्वजनिक जमीन पर नमाज पढ़ने या धार्मिक संरचना खड़ी कर देने से वह जमीन मस्जिद या वक्फ की नहीं हो जाती।

बेदखली और जुर्माने का आदेश

लंबी सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तहसीलदार ने कड़ा फैसला सुनाते हुए आफताब हुसैन और मेहताब हुसैन को ग्राम समाज की जमीन से बेदखल करने का आदेश दिया। साथ ही 6 करोड़ 94 लाख 79 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति भी आरोपित की गई।

अदालत ने राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जमीन से अतिक्रमण हटाकर उसे खाली कराया जाए और लगाए गए जुर्माने की वसूली भू-राजस्व की तरह की जाए।

इलाके में चर्चा का विषय बना फैसला

इस फैसले के बाद संभल जिले में यह मामला चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया है। प्रशासन इसे ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई के रूप में देख रहा है।

मामले को लेकर तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह, राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन चतुर्वेदी, नरोत्तम पाराशर और बिना कौर के बयान भी सामने आए हैं, जिनमें इस कार्रवाई को कानून के तहत की गई प्रक्रिया बताया गया है।

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