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Sambhal News: बड़ा फैसला: 7.5 टन तक कमर्शियल वाहनों पर वन टाइम टैक्स लागू, राहत की नई राह
योगी सरकार ने 7.5 टन तक के कमर्शियल वाहनों पर वन टाइम टैक्स लागू किया। टैक्सी और छोटे वाहन मालिकों को बड़ी राहत, टैक्स व्यवस्था हुई आसान।
Sambhal News(Photo-Social Media)
Sambhal News: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने कमर्शियल वाहन मालिकों को बड़ी राहत देते हुए टैक्स व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव किया है। 1 फरवरी 2026 से लागू संशोधित नियमों के तहत अब 7.5 टन तक के कमर्शियल वाहनों पर वन टाइम टैक्स (OTT) लागू कर दिया गया है। इस फैसले को छोटे व्यापारियों, टैक्सी संचालकों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए बड़ा राहत पैकेज माना जा रहा है।
एआरटीओ संभल अमिताभ चतुर्वेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि अब वाहन मालिकों को हर तीन महीने में टैक्स जमा करने की भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। न चालान का डर रहेगा और न ही बकाया नोटिस की चिंता। एक बार टैक्स जमा करने के बाद वाहन स्वामी लंबे समय तक निश्चिंत होकर अपना वाहन चला सकेंगे।
पहले टैक्सी और छोटे कमर्शियल वाहन मालिकों को सीट क्षमता और अवधि के आधार पर तिमाही या वार्षिक टैक्स जमा करना पड़ता था। यदि समय पर टैक्स जमा नहीं किया जाता था तो चालान, नोटिस और यहां तक कि वाहन सीज होने की स्थिति भी बन जाती थी। इस जटिल व्यवस्था से वाहन मालिकों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियां झेलनी पड़ती थीं। अब नई व्यवस्था के तहत इन सभी झंझटों से मुक्ति मिलेगी।
नए नियमों के अनुसार 7.5 टन ग्रॉस व्हीकल वेट (GVW) तक की सभी कमर्शियल गाड़ियां—चाहे वह छोटी टैक्सी हो, हैचबैक हो, मल्टी-यूटिलिटी वाहन (MUV) हो या मिनी बस—सभी को वन टाइम टैक्स के दायरे में शामिल किया गया है। इसका सीधा मतलब है कि एक बार टैक्स जमा करने के बाद बार-बार की औपचारिकताओं से छुटकारा मिलेगा।
सरकार ने कमर्शियल से प्राइवेट और प्राइवेट से कमर्शियल वाहन में परिवर्तन (कन्वर्जन) की प्रक्रिया को भी आसान बना दिया है। पहले इस प्रक्रिया में अतिरिक्त टैक्स का भारी बोझ पड़ता था, जिससे कई वाहन मालिक पीछे हट जाते थे। अब नियमों को सरल बनाते हुए केवल नाममात्र अतिरिक्त शुल्क पर यह प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। इससे व्यापार और स्वरोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इस फैसले से न केवल वाहन मालिकों को राहत मिलेगी, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था भी अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ होगी। बार-बार की वसूली, बकाया नोटिस और लंबित फाइलों की समस्या में कमी आएगी। राजस्व विभाग का काम भी आसान होगा और भ्रष्टाचार की संभावनाओं पर अंकुश लगेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने के लक्ष्य की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। छोटे व्यापारियों और परिवहन क्षेत्र को मजबूती देने से राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। योगी सरकार का यह फैसला परिवहन क्षेत्र में एक “गेम चेंजर” के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें राहत, पारदर्शिता और विकास—तीनों का संतुलन नजर आता है।


