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केशव मौर्य जैसा मुख्यमंत्री... शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान, लखनऊ-दिल्ली तक गई गूंज
Magh Mela Controversy: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने विवाद के बीच डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का नाम लेकर सबको चौंका दिया है। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि प्रदेश की कमान किसी 'अकड़' वाले व्यक्ति के हाथ में होने के बजाय केशव मौर्य जैसे सुलझे हुए और समझदार इंसान के पास होनी चाहिए।
Magh Mela Controversy: प्रयागराज की पावन धरती पर माघ मेले के दौरान संगम तट पर जो कुछ भी हो रहा है, उसने न केवल संतों के बीच बल्कि प्रदेश के सत्ता के गलियारों में भी खलबली मचा दी है। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती कड़ाके की ठंड में धरने पर बैठे हैं। यह धरना सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रह गया है, बल्कि इसने एक बहुत बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। शंकराचार्य ने सीधे तौर पर प्रदेश की सत्ता और मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर ऐसा बयान दे दिया है, जिससे भाजपा के भीतर की गुटबाजी सड़कों पर नजर आने लगी है।
डिप्टी सीएम केशव मौर्य के समर्थन में खुलकर आए शंकराचार्य
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पालकी विवाद के बीच डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का नाम लेकर सबको चौंका दिया है। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि प्रदेश की कमान किसी 'अकड़' वाले व्यक्ति के हाथ में होने के बजाय केशव मौर्य जैसे सुलझे हुए और समझदार इंसान के पास होनी चाहिए। शंकराचार्य ने डिप्टी सीएम के बयान का दिल खोलकर स्वागत किया, जिसमें केशव मौर्य ने संतों के साथ हुई बदसलूकी पर कार्रवाई की बात कही थी। स्वामी जी का मानना है कि केशव प्रसाद मौर्य राजनीति की बारीकियों को समझते हैं उन्हें पता है कि प्रशासन की गलतियों से पार्टी का नुकसान हो रहा है।
परंपरा के नाम पर 'सफेद झूठ' और प्रशासन की तानाशाही
उन्होंने साफ लहजे में कह दिया कि जो व्यक्ति जिद पालकर बैठा हो या बदले की भावना रखता हो, मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने का कोई हक नहीं है। शंकराचार्य की नाराजगी का सबसे बड़ा कारण संगम स्नान के दौरान पालकी को लेकर पैदा हुआ विवाद है। प्रशासन का कहना है कि पालकी के साथ स्नान 'नई परंपरा' है, लेकिन शंकराचार्य ने इसे प्रशासन का 'सफेद झूठ' करार दिया है। उन्होंने इतिहास के पन्ने पलटते हुए याद दिलाया कि मुगल काल में भी पेशवाओं ने शंकराचार्य की पालकी के साथ ससम्मान स्नान सुनिश्चित कराया था। आज बसंत पंचमी जैसे महापर्व पर भी शंकराचार्य ने स्नान नहीं किया है।
हिंदुत्व के मुद्दे पर भाजपा को घेरा और दी बड़ी चेतावनी
उन्होंने संकल्प लिया है प्रशासन अपनी गलती मानकर ससम्मान पालकी के साथ स्नान नहीं कराता, वह अपनी जगह से नहीं हिलेंगे। विपक्षी नेताओं के धरने पर पहुंचने को लेकर हो रही राजनीति पर शंकराचार्य ने भाजपा को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कड़ा सवाल दागते हुए पूछा कि खुद को 'हिंदू रक्षक' बताने वाली भाजपा चुप क्यों है? अगर विपक्षी दल संतों का हाल जानने आ सकते हैं, तो भाजपा के नेता क्यों नहीं आ रहे? क्या संतों और दंडी सन्यासियों का अपमान भाजपा को दिखाई नहीं दे रहा है? भाजपा को लगता है कि वह जो चाहे वो कर सकती है, तो जनता इसका जवाब आने वाले समय में जरूर देगी।


