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फिर भी हमको माफ़ करें..... चंद्रशेखर आज़ाद और बांसी
सिद्धार्थनगर के बांसी में चंद्रशेखर आज़ाद की धूलधूसरित प्रतिमा देखकर भावुक हुए लेखक दीपक मिश्र, स्वयं सफाई कर प्रशासन से रखरखाव की मांग की
Chandrashekhar Azad (Photo_ Social Media).jpg
Siddharthnagar: बड़े दिनों बाद बांसी जाने का सुअवसर और सौभाग्य मिला l सिद्धार्थनगर जिले में स्थित बांसी में चंद्रशेखर आज़ाद ने उस समय प्रवास किया था जब वे हिंदुस्तान समाजवादी गणतान्त्रिक सेना के अध्यक्ष थे l बांसी हिन्दू मुस्लिम एकता की पावन धरती है, यहाँ के हिन्दू बच्चों को ईद और मुस्लिम बच्चों को होली व दिवाली का इंतज़ार साल भर रहता है l चंद्रशेखर आज़ाद के कारण इस जगह की ऐतिहासिक महिमा अपने आप कई गुणा बढ़ जाती है l यहाँ के नागरिकों के प्रयास से चंद्रशेखर आज़ाद की आदमकद प्रतिमा स्थापित हुई ताकि आने वाली पीढ़ी प्रेरणा लेती रही l बांसी यात्रा के दौरान मन मुदित रहा क्योंकि विधायक रहे और सपा के जिलाध्यक्ष भाई श्री लालजी यादव और नगर पालिका अध्यक्ष पटवारीजी ने माल्यार्पण कर स्वागत किया, लोग शब्देतर स्नेह व सम्मान से मिले l तीन मिनट की दूरी तय करने में तीन घण्टे लगे l बांसी ने महसूस कराया कि
जर्रे -जर्रे से रिश्तेदारी है
ये ज़मीन हरसू हमारी है
रात में आज़ाद की प्रतिमा पर नज़र पडी, प्रतिमा को धूल धूसरित देख मन व्यथित हुआ l जिस आज़ाद ने हमारे लिए अपनी जिंदगी दी, उनके लिए हमारे पास पांच पल भी नहीं l सुबह कार्यक्रमों की व्यस्तता में नाशुक्र दिल उस महान विभूति को भूल गया l गोरखपुर के आधे रास्ते आने पर आज़ाद की अचानक मन सरोवर में ऐसे आई जैसे ठहरे हुए पानी में कोई कंकड़ मार दे, दिल में हलचल सी मच गई l
उस समय गाड़ी में गाना बज रहा था -
तुम आए तो ख्याले दिले
नाशाद आया
कितने भूले हुए जख्मों का पता याद आया
सर्व समाज फाउंडेशन के अध्यक्ष धीरज गुप्ता दो दिनों से अपनी गाड़ी के मेरे साथ अपनी समय बर्बाद कर रहे थे l उनसे वापस लौटने को कहने में हिचक हो रही थी l कृष्णचंद्र को बांसी लौटना था, धीरज ने कहा कि चलिए बांसी तक पहुंचा आता हूँ l मुझे लगा कि चंद्रशेखर आज़ाद बुलावा था l आज़ाद की प्रतिमा को देखकर आँखों में अनायास आँसू आ गए l प्रतिमा के ऊपर कौवे ने बीट किया था और नीचे कुछ कुत्ते लेते हुए थे, एक कुत्ता वहीं पिशाब कर रहा था l यदि वहां सफाई होती तो शायद कुत्तों का जमावड़ा नहीं होता l पास की दुकान से एक लाल और एक सफ़ेद गमछा खरीदा, धीरज से कहा कि वीडियो और फोटो बनाइए l पद और पैसे के मोह से मैंने खुद को बचाए रखा किन्तु प्रसिद्धि के लोभ से अपने दूर नहीं कर पाया और अब नहीं लगता कि कर पाऊँगा l इंसान हूँ तो कमियां होना स्वाभाविक है l हाजी साहब कहते भी थे -
तुममें ये कमियां,न होती तो मियाँ
दीपक! तुम धरती के फ़रिश्ते होते
सफ़ेद गमछे से प्रतिमा की सफाई की और लाल गमछे की पगड़ी पहना राष्ट्रनायक आज़ाद के साथ खिंचाया l मुझे समाजवादी बनाने में इनका और इनके एक दोस्त भगत सिंह का बड़ा योगदान है l हनुमान भक्त आज़ाद भारत को आज़ाद करा कर रामराज्य के साथ साथ यहाँ शोषण विहीन समता मूलक समाजवादी समाज की स्थापना करना चाहते थे, अब यह स्वप्न हमारी धरोहर है, जब हम निकृष्ट लोग उनकी प्रतिमा तक का ध्यान नहीं रख पा रहे हैं तो उनके सपनों का क्या ख्याल रखेंगे? हमारे सौभाग्य है कि हमें आज़ाद जैसे पूर्वज मिले और आज़ाद की बदनसीबी है कि उन्हें हम जैसे स्वार्थी और संकीर्ण सोच वाले वंशज नसीब हुए l
फिलहाल, बांसी के माननीय विधायक, एसडीएम, नगर पालिका अध्यक्ष से आग्रह कर लिया है कि प्रतिमा की यथोचित सफाई हो, जवाब तो सबका सकारात्मक ही मिला है l
यद्यपि माफ़ी योग्य नहीं हम
फिर भी, हम को माफ करें
प्रभुजी,अवगुण,न ध्यान धरें
दीपक मिश्र
पुनश्च- प्रभु रामजी माफ करें मेरे मन में जो सम्मान व श्रद्धा उनके प्रति है, उतना ही आज़ाद सदृश नायकों के प्रति भी है, इसलिए आज़ाद को प्रभु कहा है l
दीपक


