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Sonbhadra News: नाबालिग के अपहरण पर कोर्ट का कड़ा फैसला: दोषी सरवन कुमार को 4 साल की कैद
Sonbhadra News: सोनभद्र की अदालत ने नाबालिग किशोरी के अपहरण मामले में आरोपी सरवन कुमार को दोषी ठहराते हुए चार वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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Sonbhadra News: नाबालिग किशोरी के अपहरण के मामले में शनिवार को सोनभद्र की अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी सरवन कुमार को दोषी करार दिया है। करीब डेढ़ वर्ष पुराने इस मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने आरोपी को चार वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में उसे दो माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी द्वारा जेल में पहले से बिताई गई अवधि सजा में समाहित की जाएगी।अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी/सीएडब्ल्यू सोनभद्र बिपिन कुमार तृतीय की अदालत ने शनिवार को यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। फैसले को नाबालिगों के विरुद्ध अपराधों पर न्यायपालिका की सख्त कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
रात के अंधेरे में किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार, दुद्धी थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी पीड़िता के पिता ने 29 जनवरी 2024 को थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उनकी 15 वर्षीय पुत्री को 23 जनवरी 2024 की रात करीब दो बजे सरवन कुमार बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया।शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया था कि इससे पहले भी आरोपी उनकी बेटी को भगा कर ले गया था, लेकिन उस समय आपसी समझौते के बाद मामला शांत हो गया था। दूसरी बार घटना होने पर परिवार ने पुलिस की शरण ली और कड़ी कार्रवाई की मांग की।
जांच में मिले पर्याप्त साक्ष्य, कोर्ट में दाखिल हुई चार्जशीट
तहरीर मिलने के बाद दुद्धी पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की गंभीरता से जांच शुरू की। विवेचना के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पर्याप्त प्रमाण पाए। इसके बाद विवेचक ने न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया।मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और अन्य प्रमाण प्रस्तुत किए। बचाव पक्ष की ओर से भी अपने तर्क रखे गए।
गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध
सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों, गवाहों के बयानों और केस डायरी सहित संपूर्ण पत्रावली का गहन परीक्षण किया। उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए अदालत ने सरवन कुमार को दोषी ठहराया और उसके खिलाफ सजा का आदेश पारित किया।कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि नाबालिग लड़कियों को बहला-फुसलाकर ले जाने जैसे अपराध समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं और ऐसे मामलों में कानून के तहत कठोर कार्रवाई आवश्यक है।
सरकारी वकील ने प्रभावी पैरवी की
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी अधिवक्ता सत्यप्रकाश त्रिपाठी ने अदालत में प्रभावी ढंग से पक्ष रखा। उनके द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और कानूनी तर्कों के आधार पर अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने में सफल रहा।अदालत के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है, क्योंकि नाबालिगों के अपहरण जैसे मामलों में न्यायालय द्वारा दिए जा रहे सख्त संदेश को कानून व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


