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Unnao News: उम्रकैद काट रहे पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत, हाईकोर्ट ने लगाईं सख्त शर्तें
Unnao News: उन्नाव रेप केस में बड़ा मोड़, दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित करते हुए सख्त शर्तों के साथ अंतरिम जमानत दी।
उम्रकैद काट रहे पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत, हाईकोर्ट ने लगाईं सख्त शर्तें (Photo- Newstrack)
Unnao News: उन्नाव रेप केस में एक बार फिर बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। उम्रकैद की सजा काट रहे भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। हाईकोर्ट ने उनकी अपील पर अंतिम सुनवाई पूरी होने तक सजा को निलंबित करने का आदेश दिया है। यह फैसला जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने सुनाया।
15 लाख के मुचलके पर रिहाई
कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को 15 लाख रुपये के निजी मुचलके पर सशर्त रिहा करने का निर्देश दिया है। हालांकि अदालत ने जमानत के साथ बेहद कड़ी शर्तें भी लगाई हैं, ताकि किसी भी तरह से पीड़िता या उसके परिवार को खतरा न हो।
पीड़िता से दूरी और साप्ताहिक हाजिरी अनिवार्य
अदालत के आदेश के मुताबिक सेंगर को पीड़िता से कम से कम 5 किलोमीटर की दूरी बनाए रखनी होगी। इसके अलावा, उन्हें हर सोमवार स्थानीय पुलिस थाने में हाजिरी देनी होगी। उनका पासपोर्ट संबंधित प्राधिकरण के पास जमा रहेगा, जिससे वह देश छोड़कर न जा सकें। कोर्ट ने साफ कहा है कि शर्तों का उल्लंघन होने पर जमानत तुरंत रद्द कर दी जाएगी।
2017 का मामला जिसने देश को झकझोरा
यह वही मामला है जिसने वर्ष 2017 में पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। आरोप था कि कुलदीप सिंह सेंगर ने अपने साथियों के साथ मिलकर 17 वर्षीय नाबालिग लड़की का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया। बाद में इस केस की जांच सीबीआई को सौंपी गई। सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में मामले को उत्तर प्रदेश से ट्रांसफर कर दिल्ली भेज दिया था और रोजाना सुनवाई के आदेश दिए थे।
2019 में सुनाई गई थी उम्रकैद की सजा
20 दिसंबर 2019 को दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने आदेश दिया था कि उसे मृत्यु तक जेल में रखा जाए और 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई और भाजपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
परिवार पर मंडराया खतरा
इस केस की सबसे दर्दनाक कड़ी पीड़िता के परिवार पर हुई घटनाएं रहीं। पीड़िता के पिता की जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी, जबकि एक सड़क हादसे में उसकी चाची और मौसी की जान चली गई थी। करीब 42 महीनों में इस केस से जुड़े चार लोगों की मौत ने न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए।
अब निगाहें अगले फैसले पर
कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत मिलने के बाद एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में है। सवाल यही है कि क्या पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित हो पाएगी और क्या न्याय की अंतिम जीत होगी। देश की निगाहें अब अदालत के अगले फैसले पर टिकी हैं।


