UP Politics: मंत्री बन गए, मंत्रालय गायब! UP में कुर्सियां बंटीं, फाइलें अभी दिल्ली दरबार में अटकीं

UP Politics: यूपी में मंत्री तो बन गए, लेकिन विभाग अब तक तय नहीं! योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद फाइलें दिल्ली दरबार में अटकीं। जानिए किस मंत्री को कौन-सा विभाग मिलने पर चल रहा है बड़ा राजनीतिक मंथन।

Snigdha Singh
Published on: 15 May 2026 12:51 PM IST
UP Politics: मंत्री बन गए, मंत्रालय गायब! UP में कुर्सियां बंटीं, फाइलें अभी दिल्ली दरबार में अटकीं
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UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में मंत्रिमंडल विस्तार वैसे ही होता है जैसे शादी में रिश्तेदारों को मिठाई बांटना सबको उम्मीद रहती है कि डिब्बे में काजू कतली होगी, लेकिन खुलते-खुलते पता चलता है कि अभी तो सिर्फ नाम लिखे गए हैं, मिठाई बाद में मिलेगी।

योगी आदित्यनाथ सरकार के हालिया मंत्रिमंडल विस्तार को पांच दिन बीत चुके हैं, मगर नए मंत्रियों के विभाग अब तक तय नहीं हो पाए हैं। आठ नए चेहरों को शपथ तो दिला दी गई, लेकिन अब सवाल यह है कि किसके हाथ में कौन-सी फाइल जाएगी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कुर्सियां बांटना आसान था, मगर मेज पर रखी फाइलों का वजन नापना अब भारी पड़ रहा है।

पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। वहीं अजीत पाल सिंह और सोमेंद्र तोमर को प्रमोशन देकर स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री का दर्जा मिला है। बाकी चार नेताओं को राज्य मंत्री बनाया गया है। लेकिन फिलहाल स्थिति ऐसी है कि मंत्री जी के पास गाड़ी है, लालबत्ती की चर्चा है, बधाइयों के पोस्टर हैं, बस विभाग का पता नहीं है।

मिशन 2027 में फिट करने में लगे मोहरे

सूत्र बताते हैं कि असली मंथन विभागों को लेकर चल रहा है। कौन-सा मंत्रालय किस जातीय समीकरण को मजबूत करेगा, किस क्षेत्र को संतुलित करेगा और 2027 की चुनावी बिसात में कौन-सा मोहरा कहां फिट बैठेगा, यही गणित सरकार और संगठन दोनों को उलझाए हुए है। यानी मामला सिर्फ प्रशासन का नहीं, पूरा राजनीतिक ज्योतिष चल रहा है।

इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दिल्ली दौरा और अमित शाह से मुलाकात भी चर्चाओं में है। माना जा रहा है कि लखनऊ में जो विभाग 'उपयुक्त' माने जा रहे थे, दिल्ली की राजनीतिक प्रयोगशाला में उनकी रिपोर्ट अभी पेंडिंग” है। इसलिए विभागों का बंटवारा उस सरकारी फाइल जैसा हो गया है जिस पर हर टेबल से एक नई टिप्पणी जुड़ती जाती है।

दिल्ली से तय होगा फैसला!

अब उम्मीद जताई जा रही है कि दिल्ली से लौटने के बाद तस्वीर साफ होगी। हालांकि राजनीतिक गलियारों में लोग मजाक में कह रहे हैं कि विभागों का ऐलान होते-होते कहीं अगला विस्तार न आ जाए। फिलहाल नए मंत्री इंतजार में हैं, समर्थक उत्साह में हैं और विपक्ष इस देरी को “डबल इंजन की डबल कंसल्टेंसी” बताने में जुटा है।

अब सबकी नजर मुख्यमंत्री कार्यालय की उस आधिकारिक सूची पर टिकी है, जो तय करेगी कि सत्ता के इस नए अध्याय में किस नेता के हिस्से कौन-सा विभाग और कितनी राजनीतिक चमक आने वाली है।

Snigdha Singh
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Snigdha Singh

Hi! I am Snigdha Singh, Leadership role in Newstrack. Leading the editorial desk team with ideation and news selection and also contributes with special articles and features as well. I started my journey in journalism in 2017 and has worked with leading publications such as Jagran, Hindustan and Rajasthan Patrika and served in Kanpur, Lucknow, Noida and Delhi during my journalistic pursuits.

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