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मैं खुद को डिप्टी सीएम नहीं... मंच पर फफक-फफक कर रोने लगे बृजेश पाठक, जानें वजह
DCM Brijesh Pathak Emotional: मेरठ के कवि सम्मेलन के मंच पर अचानक सन्नाटा पसर गया जब प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े नेता के शब्द लड़खड़ाने लगे और उनकी आंखों से आंसुओं का सैलाब बह निकला। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर फैल रहा है, लोग पूछ रहे हैं आखिर ऐसा क्या हुआ।
DCM Brijesh Pathak Emotional: उत्तर प्रदेश की राजनीति में हमेशा अपनी तेज-तर्रार छवि और जनता के बीच सक्रिय रहने वाले उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक का एक ऐसा चेहरा सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश की आंखों में नमी ला दी है। मेरठ की धरती पर आयोजित एक कार्यक्रम में डिप्टी सीएम बोलने के लिए खड़े हुए, तो किसी ने नहीं सोचा था कि सत्ता के शीर्ष पर बैठा व्यक्ति बच्चों की तरह फफक पड़ेगा। मेरठ के कवि सम्मेलन के मंच पर अचानक सन्नाटा पसर गया जब प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े नेता के शब्द लड़खड़ाने लगे और उनकी आंखों से आंसुओं का सैलाब बह निकला।
संघर्ष के उन अंधेरे दिनों की कड़वी यादें
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती के उपलक्ष्य में कवि सम्मेलन का आयोजन था। जब बृजेश पाठक संबोधन के लिए माइक पर आए, तो उन्होंने राजनीति की बातें छोड़कर अपने निजी जीवन की परतों को खोलना शुरू किया, जिन्हें दुनिया नहीं जानती है। उन्होंने बेहद रुआंसी आवाज में बताया कि आज भले ही उनके पास सुरक्षा और गाड़ियों का काफिला है, लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब उनके पास बुनियादी सुविधाएं नहीं थीं। उन्होंने याद किया कि जब वे अपने शुरुआती दिनों में पढ़ाई और राजनीति के सिलसिले में पहली बार लखनऊ पहुंचे थे, तो कड़ाके की ठंड पड़ रही थी।
डिप्टी सीएम नहीं, मैं गरीबों का सेवक हूं
उस बर्फीली सर्दी में उनके पास पहनने के लिए पैरों में जूते तक नहीं थे। रोते हुए डिप्टी सीएम ने साफ शब्दों में कहा, "मैं खुद को डिप्टी सीएम नहीं मानता, मैं तो बस गरीबों का सेवक हूं। उनकी आवाज में दर्द साफ झलक रहा था, जो केवल वही महसूस कर सकता है जिसने जमीन से उठकर आसमान छुआ हो। उन्होंने मंच से हाथ जोड़कर कहा कि वे गरीबी का दर्द बखूबी समझते हैं क्योंकि उन्होंने इसे सिर्फ देखा नहीं, जिया है। जब भी वे किसी गरीब को परेशानी में देखते हैं, तो उन्हें अपना वो पुराना दौर याद आ जाता है जब वे भी उसी तरह लाचार थे।
सन्न रह गया मेरठ, वायरल हुआ वीडियो
आज सरकार में होने के बावजूद उनका पूरा ध्यान समाज के अंतिम व्यक्ति तक मदद पहुंचाने पर रहता है। बृजेश पाठक का इमोशनल रूप देख मौजूद कवि, साहित्यकार और आम जनता दंग रह गई। मंच पर मौजूद दिग्गज कुछ पल के लिए शांत हो गए। यूपी की सियासत में घटना को बेहद अहम माना जा रहा है। आमतौर पर नेता अपनी कमजोरी या गरीबी को छिपाते हैं, लेकिन बृजेश पाठक ने जिस तरह सार्वजनिक मंच पर अपने आंसुओं से अपने संघर्ष को स्वीकार किया, उसने लोगों को उनका कायल बना दिया है। सोशल मीडिया पर लोग वीडियो को साझा कर रहे हैं।


