UP Election 2027: अखिलेश के सबसे मजबूत गढ़ में BJP धुरंधर की एंट्री! UP चुनाव 2027 में लगेगी जीत की हैट्रिक?

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी ने सपा के गढ़ मुरादाबाद से चुनावी शंखनाद करने का फैसला किया है। बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से बंजर मानी जाने वाली इन सीटों को जीतने के लिए आरएलडी ने पूर्व विधायक विजय यादव को पाले में कर नई रणनीति बनाई है। जानिए क्या है जयंत चौधरी का पूरा प्लान।

Harsh Srivastava
Published on: 4 Jun 2026 7:46 AM IST (Updated on: 4 Jun 2026 7:46 AM IST)
UP Election 2027: अखिलेश के सबसे मजबूत गढ़ में BJP धुरंधर की एंट्री! UP चुनाव 2027 में लगेगी जीत की हैट्रिक?
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UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है। राज्य में सत्ता की हैट्रिक लगाने के उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पूरी तरह से चुनावी मोड में आ चुकी है। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद प्रदेश में भगवा माहौल को मजबूत करने में जुट गए हैं, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से बंजर मानी जाने वाली सीटों को उपजाऊ बनाने के बड़े मिशन पर राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के प्रमुख जयंत चौधरी लग गए हैं। जयंत चौधरी ने अपने चुनावी अभियान की शुरुआत के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) के सबसे मजबूत किलों में से एक, मुरादाबाद को चुना है। मुरादाबाद से ही आरएलडी अपने नए चुनावी सफर का आगाज करने जा रही है।

सपा के मजबूत गढ़ में जयंत चौधरी की हुंकार

केंद्रीय मंत्री और आरएलडी के मुखिया जयंत चौधरी मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा इलाके में एक बहुत बड़ी जनसभा को संबोधित करने जा रहे हैं। इस रैली के जरिए वे साल 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपनी सियासी ताकत का अहसास कराएंगे। मुरादाबाद को हमेशा से समाजवादी पार्टी का एक बेहद सुरक्षित और पारंपरिक गढ़ माना जाता रहा है, जहां मुस्लिम और अन्य समीकरणों के चलते विपक्षी दल बेहद मजबूत स्थिति में रहते हैं। अब जयंत चौधरी इसी इलाके में सेंध लगाने और आरएलडी के लिए एक नई राजनीतिक जमीन तैयार करने के उद्देश्य से मैदान में उतर रहे हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में जयंत चौधरी को पश्चिमी यूपी का एक बहुत बड़ा और प्रभावी चेहरा माना जाता है। बागपत, बिजनौर और मुजफ्फरनगर जैसे जाटलैंड वाले क्षेत्रों में उनका सिक्का चलता है और अब वे इसी जनाधार के बल पर बीजेपी की कमजोर सीटों को जीतने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

किसानों और युवाओं को एकजुट करने की बड़ी तैयारी

मुरादाबाद की इस रैली को सफल बनाने के लिए आरएलडी के कार्यकर्ताओं और शीर्ष नेताओं ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। गांव-गांव जाकर लोगों से संपर्क किया जा रहा है ताकि जनसभा में भारी भीड़ जुटाई जा सके। योगी सरकार में आरएलडी कोटे से मंत्री अनिल कुमार को इस पूरी रैली को कामयाब बनाने की मुख्य जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनका कहना है कि जयंत चौधरी इस इलाके के किसानों, मजदूरों और बेरोजगार युवाओं की आवाज को एक नई बुलंद पहचान देने के लिए मुरादाबाद आ रहे हैं। आरएलडी के नेताओं का मानना है कि मुरादाबाद का देश के पूर्व प्रधानमंत्री और किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह के साथ हमेशा से एक बहुत ही गहरा और भावनात्मक नाता रहा है। इसी नाते को दोबारा जीवित करते हुए आरएलडी राज्य में सामाजिक न्याय, बेहतर शिक्षा, रोजगार और चौतरफा विकास के संकल्प को लेकर आगे बढ़ रही है।

BJP के लिए बंजर पड़ी जमीन को 'सींचने' का अनोखा प्लान

मुरादाबाद जिला मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने की वजह से बीजेपी के लिए चुनावी रूप से हमेशा से एक कठिन चुनौती रहा है। साल 2022 के विधानसभा चुनावों में जिले की कुल 6 सीटों में से 5 सीटों पर समाजवादी पार्टी ने एकतरफा जीत हासिल की थी, जबकि बीजेपी के खाते में महज एक सीट ही आई थी। मुरादाबाद की लोकसभा सीट पर भी समाजवादी पार्टी का ही पूरी तरह से कब्जा रहा है। जयंत चौधरी जानबूझकर उन क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक गुंजाइश तलाश रहे हैं, जहां बीजेपी काफी समय से कमजोर रही है ताकि गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर कोई आपसी मतभेद पैदा न हो। जयंत चौधरी मुरादाबाद के जरिए अपने पुराने और नए मतदाताओं को यह बड़ा संदेश देना चाहते हैं कि उनके एजेंडे में केवल बागपत या मुजफ्फरनगर ही नहीं, बल्कि मुरादाबाद का विकास भी बराबर शामिल है।

गठबंधन के नए समीकरणों से करेंगे फतह

जयंत चौधरी की पैनी नजर मुख्य रूप से मुरादाबाद जिले की तीन महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर टिकी हुई है, जहां मौजूदा समय में सपा के विधायक काबिज हैं। इसी दूरगामी रणनीति के तहत उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर साल 2007 में ठाकुरद्वारा से विधायक रह चुके विजय यादव को अपनी पार्टी में शामिल किया है। आरएलडी का मानना है कि ठाकुरद्वारा के अलावा कांठ और मुरादाबाद ग्रामीण सीटों पर उनका पुराना और परंपरागत वोट बैंक मौजूद है। भले ही आरएलडी पूर्व में यहां चुनाव न जीत सकी हो, लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि बीजेपी के साथ मिलकर वे इस बार बड़ा उलटफेर कर सकते हैं। सपा के इस पुराने गढ़ में जहां कमल का खिलना मुश्किल रहा है, वहां आरएलडी अपने 'हैंडपंप' के जरिए सियासी जमीन को हरा-भरा करने और गठबंधन को ऐतिहासिक जीत दिलाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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