गर्मी के अलर्ट के बाद UP के अस्पतालों का रियलिटी चेक! कहीं तैयारी पूरी, तो कहीं अब भी बड़े सवाल

UP Heatwave Alert: उत्तर प्रदेश में बढ़ती गर्मी और संभावित हीट वेव के बीच न्यूज ट्रैक ने अलीगढ़, रायबरेली और हरदोई के अस्पतालों की पड़ताल की। कहीं व्यवस्थाएं चाक-चौबंद मिलीं तो कहीं बर्न वार्ड जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव सामने आया।

Aditya Kumar Verma
Published on: 31 May 2026 12:55 PM IST (Updated on: 31 May 2026 12:57 PM IST)
UP Heatwave Alert
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Image Source- Newstrack Reportes

UP Heatwave Alert: पिछले कुछ दिनों में आंधी, बारिश और तेज हवाओं ने उत्तर प्रदेश में मौसम का मिजाज बदल दिया था। हालांकि अब मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में तापमान बढ़ने और लू चलने की आशंका जताई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि भीषण गर्मी और उससे जुड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए सरकारी अस्पताल कितने तैयार हैं।

सरकारी स्तर पर दावे तो बड़े-बड़े किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत क्या है? क्या मरीजों को समय पर इलाज, दवाएं और गर्मी से राहत देने वाली सुविधाएं मिल रही हैं या फिर व्यवस्थाओं में अब भी खामियां मौजूद हैं? इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए न्यूज ट्रैक के रिपोर्टरों ने अलीगढ़, रायबरेली और हरदोई में अस्पतालों की पड़ताल की।

इस पड़ताल में अलीगढ़ के अस्पतालों में कूलर, एसी और मुफ्त दवा जैसी व्यवस्थाएं देखने को मिलीं, रायबरेली जिला अस्पताल भी अलर्ट मोड में नजर आया। वहीं दूसरी ओर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के गृह जनपद हरदोई में मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद बर्न वार्ड जैसी महत्वपूर्ण सुविधा का अभाव सामने आया। तीन जिलों से आई ये रिपोर्टें बताती हैं कि प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की तस्वीर हर जगह एक जैसी नहीं है।

हरदोई में बर्न वार्ड का इंतजार कर रहा मेडिकल कॉलेज

हरदोई से पुलकित शर्मा की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में गर्मी बढ़ने के साथ आग लगने और झुलसने की घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे समय में हरदोई की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बड़े सवाल के घेरे में है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक का गृह जनपद होने के बावजूद जिले के राजकीय मेडिकल कॉलेज में अब तक आधुनिक बर्न वार्ड की व्यवस्था नहीं हो सकी है।

मेडिकल कॉलेज की स्थापना के समय लोगों को उम्मीद थी कि गंभीर बीमारियों और दुर्घटनाओं के इलाज के लिए अब उन्हें दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। लेकिन वर्षों बाद भी कई महत्वपूर्ण सुविधाएं अधूरी हैं और बर्न वार्ड उनमें सबसे प्रमुख है।


उपलब्ध नहीं हैं बर्न वार्ड

गर्मी के मौसम में खेतों, मकानों और छप्परों में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। वहीं मानसून के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से भी कई लोग गंभीर रूप से झुलस जाते हैं। हर साल ऐसे मरीज उपचार के लिए अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज में उनके लिए अलग और आधुनिक बर्न यूनिट उपलब्ध नहीं है।

स्थिति यह है कि गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को अक्सर लखनऊ, सीतापुर और शाहजहांपुर जैसे बड़े अस्पतालों के लिए रेफर करना पड़ता है। जो मरीज किसी कारणवश बाहर नहीं जा पाते, उनका इलाज सामान्य सर्जिकल वार्ड में किया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि झुलसे मरीजों को संक्रमण से बचाने और नियंत्रित तापमान में रखने के लिए विशेष सुविधाओं की जरूरत होती है, लेकिन वर्तमान व्यवस्थाएं उनकी जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं।


दरअसल, स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर सुविधाएं बेहतर करने के दावे जरूर करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर बर्न वार्ड जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव अब भी बना हुआ है। ऐसे में बढ़ती गर्मी और आग की घटनाओं के बीच जिले के लोगों की चिंता भी बढ़ रही है। सवाल यह है कि मेडिकल कॉलेज बनने के बाद जिन सुविधाओं की उम्मीद की गई थी, वे आखिर मरीजों तक कब पहुंचेंगी।

अलीगढ़ में मरीजों ने जताया संतोष

अलीगढ़ से लक्ष्मण सिंह राघव की रिपोर्ट के अनुसार, मौसम विभाग की ओर से अगले 48 घंटों में तापमान बढ़ने और लू चलने की आशंका जताए जाने के बाद अलीगढ़ का स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में आ गया है। जिले के सभी सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को विशेष तैयारियां करने के निर्देश दिए गए हैं। न्यूज ट्रैक की टीम ने खैर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया तो अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों ने संतोष जताया।


अपनी भाभी की डिलीवरी कराने आए तनुज ने बताया कि सरकारी अस्पतालों को लेकर बनी नकारात्मक धारणा यहां आकर बदल गई। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने बाहर से एक भी दवा नहीं लिखी और सभी दवाएं अस्पताल की फार्मेसी से ही उपलब्ध कराई गईं। भर्ती मरीजों को समय पर पौष्टिक भोजन भी दिया जा रहा है। तनुज के मुताबिक वार्डों में कूलर और पंखे लगे हैं, जबकि लेबर रूम और प्रसूता वार्ड में एसी संचालित हैं।

निगरानी कर रहे चिकित्सक

वहीं अपने बाबा का इलाज कराने पहुंचे शिवम ने बताया कि तेज बुखार और शरीर में जलन की शिकायत के बाद डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू किया। उन्होंने कहा कि अस्पताल में दवाओं की कोई कमी नहीं है और डॉक्टर लगातार मरीजों की निगरानी कर रहे हैं। वार्डों में गर्मी से राहत के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं।


क्या बोले अधिकारी?

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नीरज त्यागी के अनुसार सभी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक वार्ड और ओआरएस कॉर्नर बनाए गए हैं। दवाओं का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मरीजों को बाहर से दवाएं न खरीदनी पड़ें। उन्होंने बताया कि खैर सीएचसी में हाल ही में 8 नए कूलर और 12 पंखे लगवाए गए हैं। साथ ही 108 एंबुलेंस सेवाओं को भी अलर्ट पर रखा गया है।

स्वास्थ्य विभाग ने आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं को गांव-गांव जाकर लोगों को लू से बचाव के उपाय बताने के निर्देश दिए हैं। वहीं स्थानीय निवासी रमेश चंद का कहना है कि पिछले एक साल में खैर सीएचसी की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। पहले जहां लोगों को दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ती थीं, वहीं अब अस्पताल में ही अधिकांश सुविधाएं उपलब्ध हैं।

हर मोर्चे पर तैयार मिला जिला रायबरेली का अस्पताल

रायबरेली से नरेंद्र सिंह की रिपोर्ट के अनुसार, मौसम में बदलाव और दैवी आपदाओं को लेकर जारी अलर्ट के बीच न्यूज ट्रैक की टीम ने रायबरेली जिला अस्पताल का औचक रियलिटी चेक किया। अस्पताल प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया और मरीजों की सुविधा के लिए किए गए इंतजाम व्यवस्थित पाए गए।


क्या बोले अधिकारी?

जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पुष्पेंद्र कुमार ने बताया कि मरीजों की सुरक्षा और आराम को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। बढ़ती गर्मी को देखते हुए वार्डों में कूलर और एसी सुचारू रूप से संचालित किए जा रहे हैं ताकि भर्ती मरीजों को राहत मिल सके।

अस्पताल में मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए साफ और ठंडे पेयजल की व्यवस्था की गई है। आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ घड़ों में ठंडा पानी भी उपलब्ध कराया गया है। डिहाइड्रेशन और लू की आशंका को देखते हुए ओआरएस पाउडर का पर्याप्त स्टॉक रखा गया है।

अस्पताल प्रशासन का दावा है कि डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीमें 24 घंटे मुस्तैद हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। न्यूज ट्रैक की टीम ने भर्ती मरीजों से भी बातचीत की, जिन्होंने अस्पताल में मिल रही सुविधाओं को संतोषजनक बताया।

रियलिटी चेक के दौरान अस्पताल की तैयारियों में कोई बड़ी कमी सामने नहीं आई। अलर्ट के बाद प्रशासन पूरी तरह सक्रिय दिखा और मरीजों की देखभाल के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त मिलीं।

गर्मी की परीक्षा में स्वास्थ्य विभाग कितना सफल?

तीनों जिलों से सामने आई तस्वीर बताती है कि उत्तर प्रदेश में बढ़ती गर्मी को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने कई जगह तैयारी तेज कर दी है। अलीगढ़ और रायबरेली में अस्पताल प्रशासन अलर्ट मोड में दिखाई दिया और व्यवस्थाएं भी काफी हद तक दुरुस्त मिलीं। वहीं हरदोई में बर्न वार्ड जैसी महत्वपूर्ण सुविधा का अभाव अब भी चिंता का विषय बना हुआ है। मौसम विभाग की चेतावनी के बीच आने वाले दिनों में यह तैयारियां कितनी कारगर साबित होती हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी।

Aditya Kumar Verma
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Aditya Kumar Verma

आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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