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लो भाई...दो पत्नियों के बीच पति का ‘शिफ्ट वाइज’ बंटवारा! रविवार को मिलेगा ‘बेचारे हसबैंड’ को वीकली ऑफ
Rampur News: दो पत्नियों के बीच पति के “बंटवारे” को लेकर पंचायत ने ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने सभी को चौंका दिया है।
Rampur News
Rampur News: उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से पति-पत्नी विवाद का एक अनोखा मामला सामने आया है, जिसकी चर्चा पूरे इलाके में हो रही है। यहां दो पत्नियों के बीच पति के “बंटवारे” को लेकर पंचायत ने ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने सभी को चौंका दिया है। मामला जिले के अजीमनगर थाना क्षेत्र के नगलिया आकिल गांव का है, जहां एक मुस्लिम युवक अपनी दो पत्नियों के साथ रहता है।
जानकारी के अनुसार युवक की पहली शादी अरेंज मैरिज है, जबकि दूसरी शादी उसने प्रेम विवाह के तौर पर की थी। दोनों पत्नियों के बीच पति को अपने साथ रखने को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। आए दिन झगड़े होते थे और मामला कई बार इतना बढ़ गया कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। लगातार बढ़ते तनाव और घरेलू विवाद से परेशान होकर आखिरकार पुलिस ने गांव के बुजुर्गों से इस मसले को आपसी सहमति से सुलझाने को कहा।
गांव की पंचायत में हुआ फैसला
इसके बाद गांव में एक पंचायत बुलाई गई, जिसमें पति और उसकी दोनों पत्नियां मौजूद रहीं। पंचायत में तीनों पक्षों की बातें विस्तार से सुनी गईं। दोनों पत्नियों ने अपनी-अपनी शिकायतें रखीं और पति ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। लंबी चर्चा के बाद पंचायत ने बीच का रास्ता निकालते हुए एक ऐसा फार्मूला तय किया, जिससे विवाद को खत्म किया जा सके।
पंचायत के फैसले के अनुसार पति सप्ताह के छह दिन दोनों पत्नियों के साथ बराबर समय बिताएगा। तय किया गया कि सप्ताह के पहले तीन दिन यानी सोमवार, मंगलवार और बुधवार पति पहली पत्नी के साथ रहेगा। इसके बाद गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को वह दूसरी पत्नी के साथ रहेगा। वहीं रविवार का दिन पति के लिए “अवकाश” के रूप में तय किया गया है। इस दिन पति को स्वतंत्रता होगी कि वह अकेले कहीं रहे या अपनी मर्जी से समय बिताए।
पंचायत ने यह भी फैसला किया कि किसी विशेष परिस्थिति में दिन आगे-पीछे करने की आपसी सहमति से छूट दी जा सकती है। फैसले को अंतिम रूप देते हुए पति और दोनों पत्नियों ने पंचायत में लिखित समझौते पर हस्ताक्षर भी किए। यह मामला अब पूरे रामपुर जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ लोग पंचायत के फैसले को घरेलू शांति की दिशा में उठाया गया कदम बता रहे हैं, तो कुछ इसे सामाजिक व्यवस्था पर सवाल उठाने वाला मान रहे हैं।


