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BJP Cabinet Expansion: 2027 से पहले BJP का मेगा सियासी रीसेट, योगी कैबिनेट से निकलेगा बड़ा संदेश
BJP Cabinet Expansion: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी बड़ा सियासी रीसेट करने की तैयारी में है। योगी कैबिनेट विस्तार के जरिए पार्टी जातीय संतुलन, महिला प्रतिनिधित्व और हिंदुत्व के समीकरण साधने में जुटी है।
BJP Cabinet Expansion (Image Credit-Social Media)
BJP Cabinet Expansion: UP में 2027 की बिसात बिछाने में BJP जुट गई। छह नए चेहरों से जाति-सियासत और हिंदुत्व का समीकरण साधेगी। 2027 के लिए सोशल इंजीनियरिंग प्लान तैयार हो चुका।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में अगले 48 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सत्ता और संगठन दोनों स्तर पर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों की मानें तो केंद्रीय नेतृत्व से संकेत मिलने के बाद संभावित मंत्रियों को लखनऊ पहुंचने का संदेश दे दिया गया है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री जल्द ही राज्यपाल से मुलाकात कर सकते हैं, जिसके बाद शपथ ग्रहण की तस्वीर साफ हो जाएगी।
लेकिन यह सिर्फ कैबिनेट विस्तार नहीं, बल्कि बीजेपी का मिशन 2027 है। पार्टी इस फेरबदल के जरिए आने वाले विधानसभा चुनाव की सामाजिक और राजनीतिक जमीन को मजबूत करने में जुटी है। बीजेपी की रणनीति साफ है विकास, हिंदुत्व और जातीय संतुलन के त्रिकोण पर चुनावी किला तैयार करना।
2027 पर नजर, संगठन और सरकार दोनों को धार
बीजेपी लंबे समय से चुनावी मोड में रहने वाली पार्टी मानी जाती है। ऐसे में यह विस्तार महज प्रशासनिक कवायद नहीं बल्कि बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। पार्टी सरकार के साथ-साथ बोर्ड, निगम और आयोगों में भी नए चेहरों को मौका देकर कार्यकर्ताओं और सामाजिक समूहों को साधने की तैयारी कर रही है।
सियासी जानकारों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल मॉडल की तर्ज पर बीजेपी यूपी में “विकास + हिंदुत्व + सामाजिक समीकरण” का फॉर्मूला और आक्रामक तरीके से लागू करना चाहती है।
महिला कार्ड से PDA की काट
इस बार मंत्रिमंडल विस्तार में महिला चेहरों पर खास फोकस देखने को मिल सकता है। बीजेपी विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नैरेटिव का जवाब “नारी शक्ति” के जरिए देने की तैयारी में है।
फतेहपुर से तीन बार विधायक रहीं कृष्णा पासवान का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। उनके जरिए बीजेपी दलित-पासी समाज के साथ महिला वोट बैंक को साधने की कोशिश करेगी। वहीं सपा की बागी विधायक पूजा पाल को भी मंत्रिमंडल में जगह देकर बीजेपी विपक्ष को सीधा राजनीतिक संदेश देना चाहती है।
छह चेहरे, कई समीकरण
सूत्रों के मुताबिक इस विस्तार में छह नए चेहरों को जगह मिल सकती है और हर नाम के पीछे बड़ा जातीय और क्षेत्रीय गणित छिपा हुआ है। मनोज पांडेय को शामिल कर बीजेपी अवध में ब्राह्मण समीकरण मजबूत करना चाहती है। चौधरी भूपेंद्र सिंह के जरिए पश्चिम यूपी के जाट वोटरों को साधने की तैयारी है। अशोक कटारिया की वापसी से गुर्जर समाज में संदेश देने की कोशिश होगी। रोमी साहनी को मौका देकर खीरी और तराई क्षेत्र में सिख व पंजाबी खत्री समाज की नाराजगी कम करने का प्रयास किया जा सकता है। यानी बीजेपी एक तीर से कई राजनीतिक निशाने साधने की रणनीति पर काम कर रही है।
सिर्फ नए चेहरे नहीं, पुराने मंत्रियों का भी रिपोर्ट कार्ड
सूत्र बताते हैं कि विस्तार के साथ-साथ कई मंत्रियों के विभागों में भी बड़ा फेरबदल हो सकता है। कुछ राज्य मंत्रियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर प्रमोशन मिलने की चर्चा है। खासकर बंगाल चुनाव के दौरान सक्रिय भूमिका निभाने वाले नेताओं को संगठन और सरकार दोनों में इनाम मिल सकता है।
बुजुर्ग नेताओं पर फिलहाल ‘नो रिस्क’ फॉर्मूला
हालांकि सियासी गलियारों में कुछ वरिष्ठ मंत्रियों की छुट्टी की चर्चा थी, लेकिन बीजेपी फिलहाल कोई बड़ा जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही। पार्टी मानती है कि चुनाव से पहले बड़े चेहरों को हटाना गलत राजनीतिक संदेश दे सकता है। यही वजह है कि क्षेत्रीय संतुलन और वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी से बचते हुए सॉफ्ट रीशफल की रणनीति अपनाई जा रही है। कुल मिलाकर, योगी कैबिनेट का यह विस्तार सिर्फ मंत्री बदलने की कवायद नहीं, बल्कि 2027 की चुनावी पटकथा का शुरुआती अध्याय माना जा रहा है।


