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चीन-पाकिस्तान का दिखा 'दम'! एक कूटनीति चाल... और ठंडा पड़ गया युद्ध; अब कल सुबह होगा बड़ा धमाका?
China-Pakistan Middle East conflict: चीन-पाकिस्तान का 5-सूत्रीय शांति प्रस्ताव और ईरान की शर्तें मिडिल ईस्ट के संघर्ष को खत्म करने की दिशा में अहम हैं।
China-Pakistan Middle East conflict: मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब अपने पांचवें हफ्ते में आ चुकी है और हर दिन नई चुनौतियों और बढ़ते तनाव के साथ दुनिया की निगाहें इस संघर्ष पर टिक गई हैं। ऐसे समय में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2 अप्रैल की सुबह देश को संबोधित करने जा रहे हैं। इस संबोधन से यह साफ होगा कि अमेरिका युद्ध को खत्म करने की दिशा में क्या कदम उठाने वाला है और खाड़ी क्षेत्र में हालात कब और कैसे सामान्य होंगे।
चीन-पाकिस्तान का 5-सूत्रीय शांति प्रस्ताव
बीजिंग में हुई उच्चस्तरीय बातचीत के बाद चीन और पाकिस्तान ने युद्धविराम के लिए 5-सूत्रीय शांति योजना पेश की है। इस प्रस्ताव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बिना किसी शर्त के तुरंत संघर्ष रोकने और सभी पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने पर जोर देता है। इसमें नागरिकों और अहम ढांचे, जैसे ऊर्जा प्लांट्स, जल संसाधन और परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ होरमुज स्ट्रेट में सुरक्षित जहाज मार्ग की बात भी शामिल है। प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को भी मजबूत करने की बात कही गई है, ताकि एक स्थायी और व्यापक शांति ढांचा तैयार किया जा सके।
ईरान की शर्तें: हमले बंद, अंतरराष्ट्रीय गारंटी
हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि किसी भी समझौते से पहले उसे पूरी सुरक्षा गारंटी चाहिए। ईरान चाहता है कि टारगेट किलिंग और हमले पूरी तरह बंद हों और भविष्य में ऐसी स्थिति न बने। इसके अलावा, उसने युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई और पूरे क्षेत्र में संघर्ष समाप्त करने की मांग भी रखी है। सबसे विवादास्पद मुद्दा होरमुज स्ट्रेट पर नियंत्रण का है, जहां ईरान अंतरराष्ट्रीय मान्यता चाहता है।
अमेरिका का सख्त रुख और शर्तें
अमेरिका का प्रस्ताव ईरान के लिए चुनौतीपूर्ण है। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने, प्रमुख परमाणु ठिकानों को बंद करने, यूरेनियम संवर्धन रोकने और मौजूदा स्टॉक अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को सौंपने की मांग की गई है। इसके अलावा मिसाइल कार्यक्रम पर रोक और क्षेत्रीय समूहों को समर्थन खत्म करने की शर्त भी रखी गई है। बदले में अमेरिका ने प्रतिबंधों में राहत और शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा सहयोग का वादा किया है।
किस ओर झुकेगा भरोसा?
चीन-पाकिस्तान का प्रस्ताव बातचीत का एक मार्ग दिखाता है, लेकिन वास्तविक चुनौती भरोसे की कमी और सख्त शर्तों में है। जब तक दोनों पक्ष अपने रुख में नरमी नहीं लाते, ठोस शांति की उम्मीद कम ही दिखाई दे रही है। ट्रंप का संबोधन इस जंग की दिशा बदल सकता है या फिर भरोसे के संकट को और गहरा सकता है।


